रक्तदान की अलख जगाने भारत भ्रमण पर निकले किरण वर्मा

अजमेर। रक्तदान की अलख जगाने के लिए भारत भ्रमण पर निकले किरण वर्मा ने शुक्रवार को अजमेर में नागरिकों को रक्तदान करने के लिए जागरूक किया।

दिल्ली के रहने वाले 33 वर्षीय किरण वर्मा आजकल भारत भ्रमण पर हैं। मकसद है लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करना। अपना जीवन रक्तदान के लिए समर्पित कर चुके किरण वर्मा देश के सभी राज्यों में 15 हजार किलोमीटर की यात्रा करते हुए डेढ़ लाख लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करेंगे।

इनके बनाए सिंपली ब्लड नामक ऎप पर 182 देशों के 17500 रक्तदाता रजस्टिर्ड हैं जो अपने आसपास जरूरतमंद के लिए रक्तदान करके उनकी जिंदगियां बचाने का काम करते हैं। शुक्रवार को अजमेर पहुंचे किरण वर्मा ने जिला अधीक्षक कार्यालय में अतिरिक्त जिला कलक्टर कैलाशचंद शर्मा से मुलाकात की और अपनी यात्रा के बारे में उन्हें जानकारी दी।

यहां-यहां फैला चुके हैं जागरूकता

श्रीनगर के लालचौक से 26 जनवरी को पैदल यात्रा शुरू करने वाले किरण वर्मा चंद्रकोट, उधमपुर, जम्मू, सांबा, पठानकोट, बटाला, अमृतसर, चंडीगढ़, पिंजौर, बड़ोग, समरहिल (शिमला), कालका, अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, रोहतक, हिषार, अलवर, जयपुर के रास्ते आज अजमेर पहुंचे।

इस दौरान वे विभिन्न स्कूलों-कॉलेजों व विश्वविद्यालयों के एक लाख से अधिक विद्र्याथियों को रक्तदान का महत्व, तरीका व सही समय बताकर उन्हें जागरूक कर चुके हैं। वे 14 जून तक देश के सभी राज्यों में 15 हजार किलोमीटर की यात्रा करते हुए प्रति किलोमीटर 10 लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य के साथ डेढ़ लाख लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करेंगे। यहां से वे रक्तदान की अलख जगाने के लिए राजस्थान से गुजरात जाएंगे।

प्रतिदिन 12 हजार लोगों की होती है मृत्यु

किरण वर्मा ने बताया कि नेशनल एड्स कंट्रोल ऑरगेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार देश में प्रतिदिन 12 हजार से ज्यादा लोग रक्त की कमी के चलते मृत्यु का शिकार हो जाते हैं। इनके जीवन को बचाने के लिए ही वे यह यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि रक्तदान के इच्छुक व्यक्ति को सीधा जरूरतमंद को ही रक्त का दान करना चाहिए ताकि जरूरतमंद का जीवन बचाया जा सके।

ऎसे मिली प्रेरणा

सात साल की उम्र में मां की मृत्यु के बाद जीवन में काफी कष्ट झेलने वाले किरण वर्मा को रक्तदान का महत्व उस समय पता चला जब इन्होंने अपने शिक्षक को रक्त दिया। उस समय शिक्षक के बेटे की आंखों में इनके लिए जो भाव थे उन्होंने रक्तदान को इनके जीवन का मकसद बना दिया। इसके बाद वे अक्सर ऎम्स व सफदरजंग अस्पताल में जाकर जरूरतमंदों को रक्तदान करने लगे।

यहां एक बार उनके द्वारा दान किए गए रक्त को दलालों ने किसी जरूरतमंद को बेच दिया जिसकी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने शिक्षण संस्थान में मार्केटिंग हेड की नौकरी छोड़कर पूरी तरह से रक्तदान के प्रति अलख जगाना शुरू कर दिया। वे खुद अब तक 40 बार रक्तदान कर चुके हैं।

सिंपली ब्लड ऎप से कर रहे मदद

किरण वर्मा ने 29 जनवरी 2017 को सिंपली ब्लड नामक ऎप लांच किया जिसके पहले चरण में दिल्ली में रक्तदाताओं को एक मंच प्रदान करते हुए जरूरतमंदों को समय पर रक्त देने की शुरुआत हुई। 23 सितंबर 2017 को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने इस ऎप के अपडेटिड वर्जन को लांच किया।

अब इस ऎप का डोनर बेस 2 लाख तक पहुंच चुका है और इसके माध्यम से 182 देशों में जरूरत मंदों तक रक्त की आपूर्ति की जा रही है। वे बताते हैं कि यह दुनिया का पहला वर्चुअल ब्लड डोनेशन और रक्तदान का पहला सोशल मीडिया प्लेटफार्म है।

एक प्रतिशत रक्तदाता बढ़ जाएं तो पूरी हो सकती है रक्त की आर्पूति

किरण वर्मा का कहना है कि देश में खून की जरूरत के मुकाबले इसकी आपूर्ति कम है। देश में हर 100 में से 3 लोग ही रक्तदान करते हैं। वे कहते हैं कि यदि प्रति सौ में से यदि एक रक्तदाता भी बढ़ जाता है तो देश में खून से संबंधति सभी जरूरतें पूरी हो सकती हैं।