हिमाचल में 66 प्रतिशत मतदान, 412 प्रत्याशियों की राजनीतिक किस्मत EVM में लॉक

शिमला। हिमाचल प्रदेश की 68 सदस्यीय 14वीं विधानसभा के शुक्रवार को हुये चुनावों में राज्य के कुल 55,92,828 मतदाताओं में से लगभग 66 प्रतिशत ने मतदान किया और चुनावी रण में उतरे 24 महिलाओं समेत 412 उम्मीदवारों की राजनीतिक किस्मत ईवीएम में लॉक कर दी।

मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ। राज्य के ऊंचाई वाले और मैदानी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड के बावजूद मतदाता सूरज चढ़ते ही मतदान केंद्रों की ओर उमड़ने लगे और देखते ही देखते मतदान केंद्रों पर कतारें लग गईं। ये कतारें शाम पांच बजे मतदान का आधिकारिक समय निकल जाने के बाद भी लगी हुईं थीं। ऐसे में उस समय तक पहुंचे मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। मतदान के अंतिम आंकड़े बढ़ सकते हैं। राज्य में मतदान शांतिपूर्ण रहा तथा कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। मतगणना आठ दिसम्बर को होगी तथा उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे।

चुनाव आयोग के अनुसार शाम पांच बजे तक सिरमौर में सबसे ज्यादा वोटिंग हुई। यहां 72.35 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। इसके बाद सोलन में 68.48 प्रतिशत बिलासपुर में 65.72 प्रतिशत, चम्बा में 63.09 प्रतिशत, हमीरपुर में 64.74 प्रतिशत, कांगड़ा में 63.95 प्रतिशत, किन्नौर में 62.00 प्रतिशत कुल्लू में 64.59 प्रतिशत, लाहौल स्पीती में 67.50 प्रतिशत, मंडी में 66.75 प्रतिशत, शिमला में 65.66 प्रतिशत, सोलन में 68.48 प्रतिशत और उना जिले में 67.67 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला।

राज्य में चुनावों के लिए 7881 मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे, जिनमें 7235 ग्रामीण और 646 शहरी क्षेत्रों में थे। इनके अलावा तीन सहायक मतदान केंद्र सिद्धबाड़ी, बड़ा भंगाल तथा ढिल्लवां में बनाए गए थे। राज्य में 157 मतदान केंद्र का संचालन का केवल महिलाकर्मियों ने किया। मतदान के बाद ईवीएम को स्ट्रांग रूम में रखा गया है।

शिमला में विधानसभा क्षेत्र में स्थापित कुल 1044 मतदान केंद्रों में से 513 पर वेबकास्टिंग से माध्यम से मतदान का सीधा प्रसारण किया गया। इस नियंत्रण कक्ष उपायुक्त कार्यालय में स्थापित किया गया था। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र चैपाल के 69,ठियोग 77, कुसुम्पटी 54, शिमला शहरी 45, शिमला ग्रामीण 65, जुब्बल कोटखाई 65, रामपुर 77 तथा रोहड़ू के 61 मतदान केंद्रों की वेबकास्टिंग हुई।

राज्य में तीन बजे तक 55.65 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया और अब इस तरफ सभी की नज़रें हैं कि हैं कि क्या अगले दो घंटे का मतदान वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों के रिकार्ड 75.57 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर पाएगा। इससे पहले वर्ष 2007 में राज्य में 71.61 प्रतिशत और 2012 में 72.69 प्रतिशत मतदान हुआ था। निर्वाचन आयोग ने राज्य में इस बार 80 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य रखा था।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पत्नी साधना ठाकुर और दो पुत्रियों चंद्रिका और प्रियंका के साथ सुबह सिराज के बगलामुखी मंदिर में मत्था टेका और इसके बाद आहौंण मतदान बूथ पहुंच कर मतदान किया। उन्होंने दावा किया किक राज्य में इस बार रिवाज बदलेगा और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पहले से अधिक सीटें जीत कर पुन: सरकार बनाएगी।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, उनकी पत्नी मल्लिका नड्डा तथा पुत्र हरीश नड्डा ने भी सुबह बिलासपुर जिले के झंडूता के स्थानीय मंदिर में मत्था टेका और इसके बाद विजयपुर के मतदान केंद्र पर मतदान किया। नड्डा ने मीडिया से बातचीत में राज्य में हुए विकास और शुरू की गईं जनकल्याण योजनाओं के बूते पर पार्टी की राज्य में पुन: सरकार बनने का दावा किया। वहीं मल्लिका नड्डा ने इस मौके पर कहा कि मतदाता अपने विवेक से मतदान करेंगे तथा राज्य और देश में हुये विकास तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोरोनाकाल में की गई सेवाओं को अवश्य ही लोग ध्यान में रखेंगे।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर उनके पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने परिवार सहित भोरंज के मतदान बूथ पर मतदान किया। पुरानी पेंशन बहाल करने के कांग्रेस के वादे को लेकर ठाकुर ने कहा कि पेंशन बंद करने और एनपीएस लाने वाली कांग्रेस ही थी। कांग्रेस 2012 में राज्य में सत्ता में थी तब क्यों नहीं पुरानी पेंशन बहाल की। पुरानी पेंशन का मुद्दा 2017 के विधानसभा चुनावों में भी नहीं था।

उन्होंने कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए कहा कि इसी पार्टीं ने हिमाचल प्रदेश का विशेष दर्जा वापिस ले लिया था, जिसे मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद बहाल किया। केंद्र की भाजपा सरकार ने हिमाचल को आईआईटी, एम्स और हाईड्रो इंजीनियरिंग जैसे बड़े संस्थान दिए हैं। राज्य की भाजपा सरकार ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के अनेक कार्य किए तथा जनता इन पर अवश्य की मुहर लगाएगी और भाजपा को पहले से भी ज्यादा सीटें देकर पुन: सरकार बनाने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से ही झूठे वादे करती रही है। कांग्रेस ने 2003 और 2012 में भी झूठे वादे किये थे। हर घर से एक व्यक्ति को रोजगार देने की बात कही थी लेकिन सत्ता में आने पर भूल गई। जनता को कांग्रेस का असली चेहरा मालूम है।
वहीं राज्य के दिवंगत मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी एवं सांसद प्रतिभा सिंह और उनके पुत्र बिक्रमादित्य सिंह ने भी शनि मंदिर में पूजा करने के बाद मतदान किया।

कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने भी मतदान किया। कांग्रेस ने राज्य में पुरानी पेंशन योजना, महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर चुनाव लड़ा, जबकि भाजपा विकास, सुसाशन और जन कल्याण कार्यों के आधार पर जनता के बीच गई है।

राज्य में अब तक परम्परागत तौर पर भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला होता रहा है लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी ने भी सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार कर अनेक सीटों पर मुकाबला तिकोना तो कहीं मजबूत निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी के चलते बहुकोणीय हो गया। राज्य में इस समय भाजपा सत्ता में है। वर्ष 2017 के चुनावों में भाजपा को 44, कांग्रेस को 21 सीटें मिलीं थीं। दो सीटों पर निर्दलीय और एक सीट पर माकपा प्रत्याशी जीता था।

प्रदेश के सिरमौर जिले में शिलाई की कमरऊ तहसील के मुणाना गांव की 72 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मतदान करने के लिए जाते समय दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। प्रदेश के सिरमौर जिले के उपमंडल शिलाई की कमरऊ तहसील के मुणाना गांव की 72 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मतदान करने के लिए जाते समय दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। मृतक महिला की शिनाख्त झुमा देवी के तौर पर हुई है।

राज्य में मतदान के लिये शनिवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था ताकि सरकारी कार्यालयों, बोर्ड, निगम, शैक्षणिक संस्थान, औद्योगिक परिसरों, दुकानों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारी अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए यह सवैतनिक अवकाश था। राज्य में 11 और 12 नवम्बर को ड्राई डे घोषित किया गया था। लेकिन पांच बजे मतदान समाप्त होने के बाद शराब के ठेके खुल गए।

राज्य में चुनाव चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्ध्था के बीच सम्पन्न हुआ। राज्य की सीमाएं कर दी गई थीं। चुनाव में राज्य पुलिस के 11880 जवान, 8381 होमगार्ड जवान के अलावा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 67 कम्पनियां तैनात की गईं थी। मतदान कार्यों के लिए राज्य सरकार के 31536 कर्मचारियों की तैनाती की गई थी।