हिंदू देवताओं का मजाक उड़ाने वाले वीर दास का मुंबई में नहीं होने देंगे कार्यक्रम

मुंबई। कोई भी उठकर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और कॉमेडी के नाम पर देवताओं का उपहास करता है। पहले स्टैंड अप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी था, अब वीर दास आ गया हैं। अभिव्यक्ति की आज़ादी का दुरुपयोग करना है, तो मुसलमानों या ईसाइयों के श्रद्धास्थान के बारे में ‘कॉमेडी’ करने का साहस है क्या?

सर तन से जुदा के डर से आज कोई ऐसा करने की हिम्मत नहीं करेगा, लेकिन ये धर्मद्रोही जानते हैं कि हिंदू सहिष्णु हैं, इसलिए केवल विरोध ही करेंगे। अगर हिंदू विरोध भी करते हैं, तो हिंदुओं को ही असहिष्णु बताया जाता है। अब हम अपने देवताओं का अपमान स्वीकार नही करेंगे। अगर पुलिस और आयोजकों ने इस कार्यक्रम को रद्द नहीं किया, तो हम सड़कों पर उतरेंगे और विरोध करेंगे और इस कार्यक्रम को नहीं होने देंगे। यदि इस देश में रहना है, तो उसे हिंदु देवताओं का सम्मान करना होगा।

पिछले सप्ताह वीर दास का बंगलौर में कार्यक्रम हिन्दू जनजागृति समिति के विरोध के कारण रद्द कर दिया गया था। अब ऐसा ही कार्यक्रम मुंबई में हो रहा है। इस कॉमेडी शो का हिंदुत्ववादी संगठनों और राष्ट्रवादी नागरिकों ने कड़ा विरोध किया है। हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से मुख्यमंत्री एकनाथजी शिंदे, गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस से कार्यक्रम रद्द करने की मांग की है। इस कार्यक्रम के विरोध में मुंबई पुलिस कमिश्नर और सायन पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर से पास शिकायत की गई है। साथ ही षणमुखानंद सभागृह के प्रबंधक को भी ज्ञापन देकर कार्यक्रम रद्द करने का अनुरोध किया है।

वीर दास इससे पहले अपने ‘कॉमेडी शो’ में भारतीय महिलाओं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी और भारत के बारे में आपत्तीजनक वक्तव्य किए हैं। सीता और लक्ष्मण चौदह वर्ष तक वन में एक साथ रहे और यह एक तथ्य है, वन में रहते हुए लक्ष्मण 14 वर्ष तक सोया नहीं, क्या आप सोच सकते हैं कि तब सीता कितनी डरी हुई होंगी, हिंदू गाय का पेशाब पीते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इस पेशाब में औषधीय गुण होते हैं। एक प्रश्न मैं पूछना चाहता हूं कि क्या वे अपने को पेशाब का विशेषज्ञ मानते हैं?, वीर दास ने हिंदू धर्म, देवताओं और संस्कृति का ऐसी अभद्र भाषा में मजाक उड़ाया है।

ऐसे धर्मद्रोही वीर दास का शो मुंबई में हुआ, तो कानून व्यवस्था बिगड सकती है। मुंबई में शांति बनाए रखने के लिए यह कार्यक्रम रद्द किया जाए। विज्ञापनों, फिल्मों, नाटकों, कॉमेडी शो आदि के माध्यम से देवताओं के अपमान को रोकने के लिए ईशनिंदा विरोधी कानून के साथ-साथ इस कार्यक्रम को तुरंत रद्द करने की मांग हिंदू जनजागृति समिति ने की है।