शहद की मिठास में सामूहिकता का रस

सबगुरु न्यूज। एक मधु मक्खी घूम घूमकर जब सब फूलों का मधुपान करतीं हैं तो व​ह शहद का निर्माण नहीं करतीं। केवल अपना ही पेट भरकर अपने जीवन के सफ़र को आसान करतीं हैं।

इसके ठीक विपरीत जब सभी मधु मक्खियां सभी फूलो पर सामूहिक रूप से आक्रमण कर मधुपान करतीं हैं तो वे शहद के छत्ते का निर्माण कर दिनोंदिन उसके आकार को बढाकर छत्ते को शहद से भर देती है। यह शहद का छत्ता असली शहद का निर्माण कर मानव कल्याण में हितकारी भूमिका का निर्वहन करता है।

पानी और आग का घर्षण जब सामूहिकता की भांप बनकर समुद्र से उठता है तो वह मानसून बनकर तपती और झुलसाती गर्मी को खत्म करने के लिए हवा से सघर्ष करता है और सर्वत्र बरसकर सभी को जलन, तपन और घुटन की गर्मी से मुक्त कर देता है। ठीक उस आदमखोर शेर की तरह जो मानव को मारकर खाने लगता है तो सभी की सामूहिकता उसे कैद कर पिंजरे में डाल देती है।

पौराणिक इतिहास की कथाएं सामूहिकता का संदेश देतीं हैं कि जब नकारात्मक शक्तियां सर्वत्र पाप और अत्याचार को बड़ा देती है तो फ़िर सारी सकारात्मक शक्तियां एक होकर उस सामूहिक बनकर नए अवतार का रूप लेती है और नकारात्मकता के उस दैत्य को मार देती है तथा सर्वत्र सुख, शांति व समृद्धि की वर्षा कर देती हैं।

संत जन कहते हैं कि हे मानव तू हम की भावना पैदा कर सामूहिकता के झंडे उठा, क्योंकि तू सकारात्मक एकाकी शक्ति बनकर नकारात्मक के दानव पर विजय नहीं प्राप्त कर सकता।सकारात्मक एकाकी शक्ति सदा ही विश्वासघात के जहर से घायल हुई और रण के मैदान में हार गई। मानव का इतिहास इन्हीं कहानियों से भरा हुआ है।

इसलिए हे मानव तू उस जन कल्याणकारी शहद का निर्माण कर जो सामूहिक शक्ति का परिचय देता है और एकाकी सकारात्मक या नकारात्मक शक्ति का पतन करता है क्योंकि दोनों में ही अहंकार के गुण छाए रहते हैं तथा सामूहिकता में अहंकार का स्थान सहयोग ओर समन्वय ले लेता है।

सौजन्य : भंवरलाल