खुदा भी मिला और बिसाले सनम भी

सबगुरु न्यूज। मानव इतिहास गवाह है कि इस दुनिया में जब जब धर्म, जाति, विद्वता, ऊंच नीच, शासन प्रशासन अंहकारी बनकर गाजा तब तब उसका समूल विनाश हो गया।

वाणी की अश्लीलता, आंतरिक जलन, छींटा कसी, दोगलेपन की भूमिका, लूट खसोट, बंटवारा और फूट का आतंक फैलाना, किसी को मुसीबत में डालकर सहायता का नाटक कर हिमायती बनना, पीठ पर छुरा घोंप कर विश्वासघात कर शक्ति मान समझना। भावुकता के खेल से गुमराह करना आदि तरह तरह के अनाचार अत्याचार ओर दुर्व्यवहार करने वाले का जर्जर अंत हुआ है।

वास्तविक ज्ञान के प्रदर्शन करने वाले दुर्बल को हंसी का पात्र बनाकर अपने अज्ञान रूपी दानव की हुकूमत को पूजवा कर श्रेष्ठता विद्वता और ज्ञान की उपाधि को धारण कर रहा है। अपनी शक्ति को अश्व शक्ति मान उस पर किसी दुर्बल के ज्ञान, धन, दौलत और उसकी इज्जत को लूटकर ले भाग रहा है तथा अपने अज्ञान अकर्म रूपी गधे को बोझा ढोने के लिए दूसरों के माथे पटक रहा है।

अंहकार, मानव इतिहास में सदा हारने के बावजूद भी आज तक अपनी झूठी अकड़ का घोडा लेकर घूम रहा है और रेस में अपने आप को बनाए रखने के लिए गधे और ट्टटूओं को बांधकर अपनी शान के कसीदे पढ़ रहा है। ऐसे अंहकारियों को ना तो खुदा मिला है और ना ही बिसाले सनम। जिनके मन में सदा मलिनता और धोखा रहा उसे ना तो खुदा नजर आया ना ही बिसाले सनम।

मन की शुद्धता ओर शीलता ओर सहजता ही खुदा और बिसाले सनम को पाती है क्योंकि वहां ज्ञान का पाखंड नहीं होता। आंतरिक जलन के आभूषण नही होते और नहीं होते हैं बलवान घोड़े जिन पर सवार होकर झूठ, फरेब के झंडो को लहराया जाए। वहां पर केवल मानव के मूल्य होते हैं। शील और सहजता के आभूषण होते हैं बस वही पर खुदा व बिसाले सनम खडे नजर आते हैं।

संत जन कहते हैं कि हे मानव भीतर का खुराफाती मन अपने बलवान घोडों को लेकर धन, दौलत और ऐश्वर्य को लूटने के लिए भागता है क्योंकि वह इन सब को ही खुदा मानता है और धोखा देकर जब इनको लूटने लगता है तो काल का चांटा पड़ता है, तब अपना फरेबी घोड़ा लेकर बचने के लिए इधर उधर भागता है और अंत में घोडा थक कर धराशायी हो जाता है।

तब मन को देख आत्मा मुसकुराते हुए कहती है कि मन मै हूं बिसाले सनम और मै ही हूं खुदा, तू मुझे नहीं उस झूठ, फरेब लालच और कपट को ही पहचानता है और कहता है कि ना तो खुदा मिला और ना ही बिसाले सनम।

इसलिए हे मानव तू झूठ, फरेब, कपट और लूट से मानवीय मूल्यों को धराशायी मत कर तथा अपनी सोच को नकारात्मक मत बना। जलन और ईर्ष्या को छोड़ ऊंच नीच की भावना तेरे दिल में मत रख। तुझे खुदा ओर बिसाले सनम घर में ही मिल जाएंगे।

सौजन्य : ज्योतिषाचार्य भंवरलाल, जोगणियाधाम पुष्कर