धूल चेहरे पर जमी, वे साफ करते रहे आईना

सबगुरु न्यूज। धूल के तूफानों ने उनके चेहरे इतने बदल दिए कि वे कौन थे, किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। उनकी आंखों पर चढे चश्मे और उससे निकलती आग की लपटें माहौल जला रही थीं और अपनी बैबसी बयां कर बार बार आईना तोड़ रही थीं क्योंकि उन आईनों में उनकीं बदसूरती दिख रहीं थी।

वे आईने तोडते रहे ओर जो बच गए उन्हें बार बार साफ़ करते रहे फिर भी उन आईने में उनके मन की गंदगी की आग और चेहरे पर लगीं धूल ही नजर आ रही थी। मन की गंदगी से चेहरों पर चढ़ी धूल वे साफ नहीं कर रहे थे। सच आईना दिखा रहा था लेकिन वे बार बार आईने को गंदा बता बताकर उसकी किस्म में खराबी बता कर भ्रम में जीते रहते हैं।

इतना ही नहीं वे अपना बनाया हुआ फरेबी आईना दुनिया में लेकर घूमते रहे ओर अपने चेहरों को बैदाग बताकर सबसे भीख मांग रहे थे कि हमे बचाओ, हमारे चेहरे गलत बताए जा रहे हैं।

संत जन कहते हैं कि हे मानव हर इंसान को अपनी-अपनी मंजिलें तय करने और ख्वाईशे रखने का अधिकार होता है, भले ही उसका सपना पूरा हो या ना हो। यह उसका अहंकार या अभिमान नहीं बल्कि मानव की एक मनोवृत्ति होती है। हर व्यक्ति अपने आप का कैरियर बनाने के लिए एक योजना बनाता है और सफलता की कामना कर उस अनरूप परिश्रम करता है। उसका परिश्रम अहंकार नहीं उसका प्रयास है और उसे हतोत्साहित करना मानवता नहीं केवल अपने मन के आईने का मेल होता है जो दूसरों के सफल होने के भय से डरता है और पहले स्तर पर ही उसे सोतियां ढाह की तरह जलाता रहता है।

इसलिए हे मानव तू अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ और दुनिया के बैरहम विचारों की ओर अपने को मत मोड। तेरा लक्ष्य तुझे सफलता की ओर ले जाएगा ओर तेरे ख्वाईशों के समुद्र की लहरों से गंदगी किनारों की ओर चली जाएगी।

सौजन्य : भंवरलाल