चीटियां जब मारने लगी पंचसेरी को

सबगुरु न्यूज। सर्वत्र हाहाकार मच गया और बिना पंख के ऊडने वालीं अफवाहों ने चारों ओर फैला दिया कि देखो, अब चीटियां भी पंचसेरी को मारने लग गईं हैं। फिर क्या था कवि, लेखक, रचनाकार सभी अपनी कलमों पर धार देते हुए तथा विषय की गंभीरता को देखते हुए कई दर्शन और विचारधारा से ओतप्रोत होकर कलम से आग उगलने लगे।

किसी ने पूछा कि यहां क्या हो गया, तब सब एक ही स्वर में कहने लगे कि सरे आम एक चींटी ने पंचसेरी को घायल कर दिया। यह सुन वह व्यक्ति हैरान हो गया और बोला कि ऐसा कैसे हो सकता है। यह सोचते सोचते व्यक्ति वहां से आगे निकल गया है।

उसे रास्ते में एक व्यक्ति मिला उसने बताया कि आप हैरान न हो। यह सामान्य घटना है और ये पत्थर भी अपने आप को पूजवाना चाहता है और चींटी से ज्यादा अहमियत बताना चाहता है पर इस पत्थर को कोई पूछ नहीं रहा है और चींटी उसके ऊपर रोज आनंद से घूमती है।

इसलिए यह चींटी के बहाने सबका ध्यान आकर्षित करना चाहता है और कवि लेख़क के माध्यम से इन चींटियों को दूर रखना चाहता है। कवि लेख़क भी इन चींटियों के नहीं पत्थरों के पक्ष धर है, कारण चीटियां इन सब को काटती रहतीं हैं और कई को पिस्ती का रोग लगा चुकी हैं।

राहगीर भी मुस्कुराते हुए चला गया ओर बोला इन पत्थरों की राजनीति भी खतरनाक है। एक दिन उसने हजारों चींटियों की एक लम्बी कतार देखी। सभी अन्न का दाना मुंह में ले जा रही हैं और चींटियों का एक झुंड मरे हुए कीडे को चारों तरफ से उठाकर ले जा रहा है। तब एक ने कहा ये बरसात आने के संकेत है और चींटियों सुरक्षित जगह पर जा रही है। यह देखकर वह व्यक्ति समझ गया कि वास्तव में यह चीटियां अपनी आत्म रक्षा कर रही है ओर ये पत्थर ही शैतान है जो इधर उधर ही फेंके जा रहे हैं।

संत जन कहते हैं कि हे मानव जब किसी व्यक्ति स्थान व वस्तु की सब अहमियत खत्म हो जाती हैं तो व​ह उस अहमियत को बनाने के लिए हर हथकंडे इस्तेमाल कर लेता है और इस कारण वह अपनी मूल संस्कृति को भूल जाता है। हर प्याले में चरणामृत की जगह सुरा और सुंदरी अपना वर्चस्व स्थापित कर लेतीं हैं चाहे फिर मुखिया हो या आम-जन सब इस खेल में लग जाते हैं।

इस खेल में चीटियां भी इनके साथ होतीं हैं। चीटियां भी जब आनंद लेतीं हैं तो वहां शोर मच जाता है कि यह हम बडे लोगों को भी काट रही है। जब उन चोटियों को दुत्कारा जाता है तो चीटियां उनसे लिपट कर उन्हें काट लेती हैं।

इसलिए हे मानव इस संसार में जो व्यक्ति जन्मा है। उसके छोटे या बड़े होने का निर्धारण मानव ने ही किया है परमात्मा ने नहीं। इस कारण भेदभाव की नीति से चीटियां पंचसेरी को घेर लेतीं हैं और पंचसेरी को घायल कर देतीं हैं। इसलिए हे मानव समान दृष्टिकोण रख, तब ही एक बन सकता है नहीं तो एक एक अलग करके तू अकेला ही रह जाएगा।

सौजन्य : भंवरलाल