उन कागज के टुकड़ों का अहंकार

सबगुरु न्यूज। अलग अलग कागज के टुकड़ों मे बंधे कई समान जब इकट्ठे रख दिए जाते हैं तो वो सभी टुकड़े अपनी-अपनी चीजों का मोल बता कर उस अहंकारी युद्ध को छेड देते हैं जिनका आधार कुछ भी नहीं होता है और वे एक दूसरे की हैसियत को ललकाराते हैं।

अपने कागज के टुकड़े में बंधा सोना, जब लोहे को बांधे कागज के टुकड़े को ललकाराता है कि तेरी काबलियत मेरे बराबर नहीं है। अगर है, तो तू मेरे बराबर बाजार में अपना मूल्य सिद्ध कर, नहीं तो मैं घोडे की पीठ पर सवार होकर रहूंगा और तू गधे की पीठ पर।

लोहा जिस पुड़िया में बंधा था वह मुस्कुरा कर बोला अगर तुझे अपनी काबिलियत पर घमंड है तो तू मेरी दुनिया में आकर अपनी हैसियत बता। तेरी हैसियत केवल गिरवी की ही रह जाएगी और मुझे तू कहीं भी पटक, मैं सर्वत्र सबकी सुरक्षा ही करूंगा। अमीरों की तिजोरी बनकर और तलवार बन कर।

सांपों की बस्ती में जाकर नेवला दोस्ती नहीं करता और ना ही शेरों की मांद में जाकर हिरण क्योंकि कि अलग अलग विशेषताओं के कारण वे एक क्षण भी नहीं मिल सकते। सांप, सांपों की ही बस्ती में तो हिरण, हिरणों के समूह मे ही जाता है।

साफ सुथरा कबूतर चीलो के झुंड का राजा नहीं बनता और ना ही मोरपंख लगाकर कौवां मोर बनता। यदि फिर भी ऐसा घटनाक्रम होता है तो सिद्ध कर देता है कि वे दोनों ही चोर है या दोनों ही साहूकार। केवल अपने बडे हित के लिए एक दूसरे पर लांछन लगा चतुर व्यक्ति अपना पाला बदल लेता है।

संतजन कहते हैं कि हे मानव, कर्ण को महाभारत में केवल अपनी निष्ठा के लिए ही जाना जाता है क्योंकि वह जानता था दुर्योधन अधर्मी है फिर भी फिर भी उसकी निष्ठा दुर्योधन के साथ ही थी क्योंकि उस अधर्मी ने ही उसे राजा बनाया। ये जानते हुए भी कि महाभारत के महासंग्राम मे दुर्योधन की हार होगी फिर भी अंत तक वह निष्ठावान ही रहा।

इसलिए हे मानव तू अपने हितों के लिए मत लड। जनहित में काम करने के लिए ही व्यक्ति को लडना और सोचना चाहिए ना कि अच्छा व दागी लिबास अपने भावी लाभ के लिए ओढना चाहिए। कागज के टुकड़ों में बंधे अहंकार बिना आधार के धरातल पर ओंधे मुंह गिरते हैं।

सौजन्य : भंवरलाल