चमन में खुशबू न थी ये हवाओं के बयां थे

सबगुरु न्यूज। हवाओं की तासीर यह बयां करती है कि ये चमन से निकल कर आ रही हैं या फिर उन बाजारों से आ रही है है जहां सुगंध का व्यापार हो रहा है। उजडे गुलशन, बहार आने के लिए अपनी चंद सांसों को बचाए हुए इंतजार में रहते हैं कि वे बहारें फिर आ कर गुलशन को रोशन करेंगी और फिर से गुलशन महकेंगे।

गुलशन के रास्ते से सुगंध आने लगीं तो भंवरों में भी जान आ गई कि अब पतझड़ जा चुका है और नई बंसत अपने संग महकती बहारों को ले कर आ रही है। हम लगातार श्रम करने वाले भंवरों और अन्य कीटों को शुद्ध हवाओं में फूलों की महकती खुशबू का आनंद मिलेगा। हमारे कुनबो को फूलों का मधुपान मिलेगा।

इसी दौरान एक इत्तेफाक हुआ, उन खयालों में घूमने वाले कीट पंतग और भंवरों के साथ। गुलशन के रास्तों से खुशबू तो आ रही थी पर उनकी तासीर में कुदरत की महर का तडका ना था। परेशान कीट पंतगे और भंवरे से रहा ना गया और वे गुलशन की ओर बढ़ गए।

गुलशन की हालत देखकर कीट पंतगे और भंवरे बेहोशी की हालत में हो गए, होश आने पर वे तुरंत वहां से उड गए और दूर जंगल में जाकर परमात्मा से दुआ करने लगे कि हे नाथ तूने यह क्या कर डाला। हमारे कुल पूर्वजों के गुलशन को क्यों उजाड़ डाला। ये संपति तो आपकी थीं फिर यहां किस कब्जाधारी नें यहां बाजार बना डाला। इन बाजारों में नकली गंघ बिक रहीं हैं व फूलों की जगह अब कपडों की कलियाां बिक रहीं हैं।

संत जन कहते हैं कि हे मानव इस जगत की तमाम संपति कुदरत की ही विरासत है जिस पर अनावश्यक कोई अपना नाम डाले खुश हो रहा हैं और दुनिया का साहूकार बना है। यह जानते हुए भी कि यह जीवन नश्वर है फिर भी सदियों से कागजों पर नाम बदल कर प्रसन्न हो रहा है। प्रकृति के आशियानों को उजाड़ कर उन बेजुबान जानवरों व पक्षियों के हिस्सो को भी छीन रहा है।

इसलिए हे मानव तू चंद कागजों पर लिखे तेरे नाम की संपति की चिंता को छोड़ और परमात्मा की इस विरासत को संभाल जो शरीर के रूप में तुझे दी है इसे ईर्ष्या जलन और बैर बदले, लेने में ही समय को बर्बाद मत कर क्योंकि सृष्टि के आकाश के ग्रहों की दृष्टि कब तेरी खुशबू को निरगंध कर दे इससे पहले तू अपने कल्याण के कर्म की खुशबू को इतना फैला दे कि सदा सदा तेरे नाम की खुशबू अमर हो जाए।

सौजन्य : भंवरलाल