सूर्य एकमात्र ऐसे देवता जिनके होते हैं साक्षात दर्शन

सबगुरु न्यूज। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक मास के अलग-अलग देवता होते हैं। सृष्टि के प्रधान कारक है सूर्य देवता। शास्त्र के अनुसार प्रत्येक महीने के अलग-अलग देवताओं का शासन होता है। जैसे कि चैत्र का वेदांग भानु, वैशाख का तापन, ज्येष्ट का इंद्र, अषाढ का रवि, अधिक मास का पुरुषोत्तम श्रवण, इंद्र भाद्रपद का विवस्वान, आश्विन का पूषा, कार्तिक का क्रतु दिवाकर, मार्गशीष को मित्र, पौष का सनातन विष्णु, माध का अरुण, फाल्गुन का सूर्य, सूर्य के नाम अनुसार अलग अलग फल होते हैं। उस उस मास में आराधना अलग अलग नाम से करें अधिक मास को साथ लेकर 13 मासो के 13 स्वामी होते हैं और सूर्य के कारण ही सृष्टि प्रभावित होकर उत्तरायण दक्षिणायन, जाडा व गर्मी होती है।

आचार्य पंडित विमल पारीक के अनुसार जो त्रिकाल संध्या वंदन भगवान आदित्य की उपासना है और वह द्विज जाती विप्र के लिए विशेष कर्तव्य के अनुसार अनिवार्य भगवान सूर्य साक्षात नारायण का स्वरूप है। श्रुति धाम में वाजी (अश्व )रूप धारण करके महर्षि याज्ञवल्क्य को शुक्ल यजुर्वेद का उपदेश दिया, वही श्री सूर्यदेव हनुमान जी के विद्या गुरु भी है।

पौराणिक आख्यान के अनुसार भगवान सूर्य समस्त जीव जगत के आत्मस्वरुप अखिल सृष्टि के आदि कारण है। खगोलीय ब्रह्मांड में सूर्य का विशेष महत्व है। सूर्य उदय होते ही प्रत्येक प्राणी पक्षी से लेकर चींटी तक एवं सृष्टि के अधिकांश प्राणी अपने अपने कार्य में लीन हो जाते हैं। सूर्यास्त होते ही अपने अपने कार्यों में विराम देकर सभी रात्रि विश्राम करते हैं।

सूर्य के कारण ही हम समय टाइम की खोज कर सकें है। सूर्य एक ऐसे देवता हैं जिनके साक्षात हमें दर्शन प्रतिदिन होते हैं। सूर्य देव अपने रथ पर आसीन होकर अविलंब रहित भाव से मेरु की परिक्रमा करते रहते हैं तथा सूर्यदेव के द्वारा ही दिन, रात्रि, मास, ऋतु, अयन, वर्षा, आदि का विभाग होता है, वही दिशाओं का भी विभाग होता है।

सनातन धर्म में सूर्य से ही प्रथम वार की शुरुआत होती है। जिसे रविवार कहते हैं गणना के अनुसार 7 वारो में से प्रथम वार सूर्य का एक ही है। सूर्य का सृष्टि पर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण योगदान है। वहीं ज्योतिष गणना के अनुसार नवग्रहों में सर्व शिरोधार्य अगर कोई ग्रह है तो वह सूर्य ग्रह है। कुंडली के द्वादश स्थान भाव में अगर किसी ग्रह के साथ में सूर्य साथ में विराजमान हो उस ग्रह को निष्क्रिय प्रभावहीन कर देते हैं। सर्वाधिक प्रभावशाली तेजोमय सूर्य ग्रह ही है।