बर्फ की आहुति से असफल अनुष्ठान

सबगुरु न्यूज। यज्ञ कुंड की जलती आग में घी की आहुति ही उसकी पूर्णता के लिए जरूरी होती हैं अन्यथा इच्छित कार्यो में सफलता के लिए दी गई सामग्री जल नहीं पाती है और किए गए अनुष्ठान एक अनावश्यक श्रम ही साबित होते हैं।

तंत्र साहित्य बताते हैं कि शत्रु उच्चाटन के लिए पीली सरसों की आहुति तो अच्छे स्वास्थ के लिए काली मिर्च की आहुति तो शिव भक्ति और लक्ष्मी जी की कृपा के लिए गूगल की आहुति हवन समिधा के अतिरिक्त दी जातीं हैं। दस महाविद्या में दसों दैवी शक्तियों की अलग-अलग आहुतियां बतलाई गई हैं।

प्राचीन काल में इन हवन अनुष्ठान और यज्ञों से ही राजा सुरक्षा के लिए तथा राज्य के कल्याण के लिए बडे यज्ञों को लगातार करवाता था। ऋषि मुनि भी सृष्टि को प्रसन्न करने के लिए तथा मानव कल्याण के लिए नियमित रूप से हवन यज्ञ और अनुष्ठान अपने-अपने आश्रमों में करते थे।

एक बार राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने वेद व्यासजी से पूछा कि हे मुनि आप कहते हैं कि मेरे पिता परीक्षित की सर्प दंश से अकाल मृत्यु हुई है। इसलिए उनके मोक्ष के लिए हवन यज्ञ और अनुष्ठान करवाने से ही मुक्ति होगी लेकिन मुनिवर मेरा इसमें विश्वास नहीं है क्योंकि हमारे पूर्वजों ने इन्द्रप्रस्थ के लिए भूमि पूजन और महलों के निर्माण के बाद हवन यज्ञ तथा अनुष्ठान श्री कृष्णजी की उपस्थिति में विद्वानों से ही करवाया था।

इसके बावजूद भी उसका शुभ फल नहीं मिला। इन्द्रप्रस्थ का राज्य चला गया। हमारी कुल की नारी का घोर अपमान हुआ और हमारे पूर्वजों को वनवास जाना पडा, अज्ञातवास में उन्हें नौकर बन कर रहना पड़ा। महाभारत के महायुद्ध में लाखों लोगों को मरना पडा।

यदि आप कहते हो कि ये पूर्व जन्म के संस्कार हैं तो फिर इन यज्ञ और अनुष्ठान करने से क्या फायदा। यदि आप कहते हो कि हवन यज्ञ ओर अनुष्ठान में शुद्ध मन, कर्म और धन होना चाहिए। विद्वान द्वारा ही हवन यज्ञ ओर अनुष्ठान होना चाहिए तो भी यह सब शर्ते हमारे पूर्वजों ने पूरी कर ली थी।

यदि आप कहते हो कि यह विधि का ही विधान है तो फिर इन यज्ञ और अनुष्ठान करने की आवश्यकता ही नहीं होंगी। यह सुनकर वेद व्यास जी ने कहा कि हे पुत्र जनमेजय तुम ठीक ही कह रहे हो लेकिन कोई अज्ञात कारण तो होगा ही। फिर भी तुम अपने पिताजी की आत्मा की मुक्ति के लिए यह यज्ञ कर लो।

संत जन कहते हैं कि ये मानव यही अज्ञात कारण ,आज की जमीनी हकीकत है कि प्रकृति आज ठंड का कहर इतना ढाह रहीं हैं कि विश्व के सबसे बड़े रेगिस्तान सहारा में जहां का तापमान 80° रहता है वहां आज -10° माइन्स में आ गया है और वहां जलती हुई बालू मिटटी में बर्फ जम गई है। ऐसे लगता है कि यज्ञ कुंड की जलती आग में बर्फ की आहुति दी जा रही है और यज्ञ की आग को बर्फ ने बुझा दिया है ।

इसलिए हे मानव तू कर्म की आग मे अंहकार की आहुति दे जिससे, मानव कल्याण रूपी धुवा निकल कर तेरे इस जीवन के यज्ञ को सफ़ल बनाए।

सौजन्य : भंवरलाल