महिलाओं को ही कब तक सिखाएंगे सावधान रहना? कुब्रा सैत ने उठाया सुरक्षा पर सवाल

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मुंबई। अभिनेत्री कुब्रा सैत ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर समाज की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा है कि लड़कियों और महिलाओं को बार-बार सावधान रहने की हिदायत देने के बजाय लड़कों और पुरुषों को यह सिखाने की जरूरत है कि वे किसी को असुरक्षित महसूस न कराएं। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में अभिनेत्री ने महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी प्रचलित सलाह और पाबंदियों को लेकर अपनी बात रखी है।

वीडियो की शुरुआत में कुब्रा ने व्यंग्यात्मक अंदाज में सुरक्षा की तुलना काल्पनिक दुनिया ‘नार्निया’ से की। इसके बाद उन्होंने उन हिदायतों का जिक्र किया जो आमतौर पर महिलाओं को दी जाती हैं—ठीक कपड़े पहनो, रात में अकेले बाहर मत निकलो, अपनी लोकेशन शेयर करो, पेपर स्प्रे रखो और हर समय सतर्क रहो।

आखिर महिलाओं को और कितना सावधान रहना होगा?

कुब्रा ने सवाल किया कि सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी बार-बार महिलाओं पर ही क्यों डाली जाती है। उनके मुताबिक अब बातचीत का रुख बदलने और पुरुषों को यह समझाने की जरूरत है कि किसी महिला का पीछा करना, उसे डराना या धमकाना गलत है और किसी के ‘ना’ कहने का स्पष्ट अर्थ ‘ना’ ही है।

अभिनेत्री ने व्यंग्य के जरिए उस सामाजिक सोच पर भी निशाना साधा, जिसमें पुरुषों के अनुचित व्यवहार को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने सहमति, व्यवहार और महिलाओं के प्रति सम्मान की शिक्षा पर जोर दिया।

सार्वजनिक जगहों पर बिना डर रहने का अधिकार

कुब्रा ने अपने संदेश में कहा कि महिलाओं को पढ़ने, हंसने, प्रेम करने, बाइक चलाने या सार्वजनिक स्थानों पर सामान्य रूप से मौजूद रहने के लिए डर का सामना नहीं करना चाहिए। उनका संदेश इस बात पर केंद्रित रहा कि सुरक्षा के नाम पर महिलाओं की स्वतंत्रता और आवाजाही को सीमित करने के बजाय असुरक्षा पैदा करने वाले व्यवहार में बदलाव होना चाहिए।

कुब्रा सैत का यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब देश में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ हाल की घटनाओं के बाद सुरक्षा को लेकर फिर बहस तेज है। दिल्ली में हाल की एक घटना के बाद छात्राओं ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन किया था। महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने बेहतर पुलिसिंग के साथ सामाजिक सोच में बदलाव और रोकथाम पर ध्यान देने की जरूरत बताई है।

महिलाओं पर पाबंदी नहीं, सोच में बदलाव पर जोर

कुब्रा के वीडियो का केंद्रीय सवाल यही है कि किसी अपराध या उत्पीड़न की आशंका के कारण महिलाओं से ही अपना पहनावा, समय, आवाजाही और जीवनशैली बदलने की अपेक्षा आखिर कब तक की जाएगी। उन्होंने महिलाओं को और अधिक प्रतिबंधित करने के बजाय सम्मान, सहमति और जिम्मेदार व्यवहार को सामाजिक संस्कार का हिस्सा बनाने की जरूरत पर जोर दिया।