केजरीवाल रोगियों की जान नहीं बचा सकते तो सत्ता छोड दें : रमेश विधूडी

नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के सांसद रमेश विधूडी ने छतरपुर में बनाए गए सरदार पटेल कोविड सेंटर पर जनता को गुमराह करने का केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री लोगों की जान बचाने में सक्षम नहीं है तो सत्ता छोड़ दें।

बिधूड़ी ने आज संवाददाताओं से कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन के हस्तक्षेप के बाद यह अस्पताल शुरू हुआ है लेकिन केजरीवाल सरकार यहां 500 बेड के बजाय मात्र 140 बेड की ही व्यवस्था कर सकी है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल यदि कोरोना से मरते रोगियों की जान नहीं बचा सकते तो वह सत्ता छोड कर जनता पर उपकार करें।

दक्षिणी दिल्ली के सांसद ने कहा कि केजरीवाल कोरोना संक्रमण से मर रहे रोगियों को उपचार उपलब्ध कराने के बजाय हर पांच मिनट बाद टीवी चैनलों पर विज्ञापन देकर जनता को भ्रमित करने में अपनी ताकत लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि समूची दिल्ली में हाहाकार मचा है और मुख्यमंत्री केजरीवाल मीडिया स्टंट करके जनता को गुमराह करने में लगे हैं।

पिछले वर्ष भी जनता जब कोरोना के कारण त्राहि-त्राहि करने लगी तो केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छतरपुर में सरदार पटेल कोविड सेंटर शुरू करवाया जिसमें 10 हजार बेड की व्यवस्था की दिल्ली के लोगों की जान बचाई थी।

उन्होंने कहा कि छतरपुर के सरदार पटेल सेंटर पर केजरीवाल ने 18 अप्रैल को मीडिया बुलाकर 500 बेड का कोविड अस्पताल शुरु करने का एलान किया था लेकिन दस दिन तक वह वहां एक भी बेड नहीं लगवा सके। क्षेत्र की जिलाधिकारी से जब पूछा गया तो वह भी बार बार गुमराह करती रही।

इस बीच हमने केन्द्रीय गृह मंत्री से मदद मांगी तो उन्होंने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को वहां भेजा। केन्द्रीय मंत्री को भी जिलाधिकारी ने 12 से 24 घंटे में अस्पताल शुरु करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने जब इस मामले में रुचि लेनी शुरू की तो अचानक अगले दिन मुख्यम़त्री केजरीवाल ने वहां पहुंच कर 140 बेड का कोविड सेंटर शुरू किया जबकि दिल्ली की जनता को 500 बेड शुरू करने की जानकारी दी गई।

उन्होंने कहा कि यदि सेंटर में बेड हैं तो बाहर तडप रहे रोगियों को अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं किया जा रहा है। बिधूड़ी ने कहा कि सरकार जब लगातार जनवरी से पत्र लिखकर बोल रही थी कि कोरोना की दूसरी लहर आने वाली हैं तो समुचित इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

दिल्ली में आक्सीजन की जिस दिन कमी हुई उसी दिन केजरीवाल क्यों जागे, ये कैसी सरकार है जिसे अस्पतालों में आक्सीजन की स्थिति का ही अंदाजा नहीं था। पिछले छह माह में या पिछले एक माह में दिल्ली में आक्सीजन की मांग केजरीवाल ने केन्द्र सरकार से नहीं की तो फिर आक्सीजन की कमी के लिए कौन जिम्मेदार है। आखिर आज तक दिल्ली सरकार आक्सीजन की जमाखोरी पर अंकुश क्यों नहीं लगा सकी है।