जानिए विजय दशमी के त्यौहार का महत्त्व

दशहरा हिंदूओ का त्यौहार हैं इसे अश्वीनी शुक्ल पक्ष की दशमी तिथी को मनाया जाता हैं जिसे दशहरा / विजयादशमी नाम से जाना जाता हैं । इस त्योहार को सभी हिंदु से श्रध्दा से मनाया जाता है । दशहरे का सबंध शक्ती से भी हैं जिस प्रकार ज्ञान के लिए सरस्वती की उपासना की जाती हैं! उसी तरह शक्ती के लिए माँ दुगा की पुजा की जाती हैं ।

अर्थ-
दशहरा शब्द की उत्पती संस्कृत के शब्द दश – हर से हुई हैं जिसका अर्थ बुराईयो का विनाश होना होता हैं । श्रीराम ने रावण से सीता मैया को छुटकारा दिलाया था इसी उपलक्ष पर मनाया जाता हैं जिससे बुराई पर अच्छाई की जीत मानी जाती हैं । दशहरा मेला- दशहरे के 10 दिन पहले से रामलिला का आयोजन किया जाता हैं। दिल्ली में हर घर में रामलीला होती हैं ।

दिल्ली के रामलीला ग्राउंड की रामलीला मशहुर हैं! उसको देखने प्रधानमंत्री खुद आते हैं तथा मन्त्रीगण भी मौजुद होते हैं। ऐसा माना जाता हैं कि इसी दिन दुर्गा माँ ने अत्याचार करने वाले महिषासुर नाम के राक्षस का संहार किया था । इसके लिए उन्होने महिषासुर मर्दिनी का रुप धारण किया था । माँ दुर्गा ने ही शुंभ -निशुंभ नाम के राक्षसो को मार गिराया था इसलिए बंगाल में तथा अन्य कुछ क्षेत्रो में भी इसी पर्व को दुर्गा पुजा के नाम से जाना जाता हैं ।

इसी दिन क्षेत्रीय अपने अस्त्र शस्त्र की पुजा करते हैं एवं जिन घरो में घोडा हैं उनके आँगन में घोडा लाया जाता हैं । इसके बाद उस घोडे को विजयादशमी की परिक्रमा करवाई जाती हैं! घरके पुरुष घोडेपर सवार होते हैं । इस दिन मजदुर लोग अपने यंत्र की पुजा करके लड्डू बाँटकर खुशी जाहीर करते हैं ।

उपसंहार
हमारे हिंदू समाज में दशहारे का दिन शुभ माना जाता हैं । दशहरे का पर्व असत्यपर सत्य एवं बुराईपर अच्छाई की विजय मानी जाती हैं । अतः हमे भी अपनी बुराईयो को त्यागकर अच्छाई को ग्रहण करने का संदेश देता हैं ।