2018 की पहली छमाही में भारत ने चीन को धराशायी किया

2018 की पहली छमाही में भारत ने चीन को धराशायी किया
2018 की पहली छमाही में भारत ने चीन को धराशायी किया

नवीकरणीय ऊर्जा के मामले में दुनिया में अग्रणी चीन को इस क्षेत्र में वृद्धि के लिहाज से अब भारत की तरफ से चुनौती दी जा रही है। ब्लूमबर्ग न्यू एनर्जी फाइनेंस (बीएनईएफ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में स्वच्छ ऊर्जा में निवेश पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 2018 की पहली छमाही में 22 प्रतिशत बढ़ा, जबकि चीन में इस अवधि के दौरान निवेश में 15 प्रतिशत की कमी आई। यही दर कायम रही, तो भारत के चीन से आगे निकलने की उम्मीद है और 2020 के दशक के अंत तक यह सबसे बड़ा विकास बाजार बन जाएगा।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में परिवर्तन की स्थिति पर गहरी नजर रखी है, जिसमें 2022 तक कम से कम 175,000 मेगावाट ;डॅद्ध स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता की तलाश भी शामिल है। इसी दिशा में काम करते हुए भारत नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश को तेजी से बढ़ा रहा है। पिछले साल देश ने परंपरागत स्रोतों की तुलना में अक्षय स्रोतों से अधिक बिजली उत्पादन क्षमता को हासिल किया।

वास्तव में भारत में, इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान नवीनीकरण ऊर्जा के क्षेत्र में नई क्षमता वृद्धि 1,541 मेगावाट से अधिक थी, जबकि पिछले साल की तिमाही में 1,059 मेगावाट क्षमता बढ़ी थी। फीड-इन-टैरिफ (एफआईटी) से प्रतिस्पर्धी बोली-प्रक्रिया व्यवस्था में परिवर्तन के कारण चुनौतीपूर्ण अवधि के बाद पवन ऊर्जा सेगमेंटिस निकट अवधि की संभावनाओं को लेकर बहुत उत्साहित हैं।

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के मुताबिक 30 जून, 2018 को भारत में टोटल ग्रिड कनेक्टेड स्थापित नवीकरणीय बिजली क्षमता 71,325 मेगावाट थी। पवन ऊर्जा की कुल क्षमता 34,293 मेगावाट थी, इसके बाद सौर ऊर्जा का नंबर आता है, जिसकी क्षमता 23,023 मेगावॉट (ग्राउंड माउंटेड और रूपटाॅप दोनों मिलाकर) थी।

भारत ने वित्त वर्ष 17 में 5,400 मेगावाट के साथ अपनी सर्वाधिक पवन ऊर्जा क्षमता को जोड़ा। वित्त वर्ष 17 भारत में नवीकरणीय ऊर्जा उद्योग के लिहाज से एक महत्वपूर्ण साल रहा, जब पवन ऊर्जा में प्रतिस्पर्धी बोली लगाने, रिकॉर्ड कम टैरिफ और वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) जैसे प्रमुख सुधार हुए थे। 2018 की पहली छमाही ने संकेत दिए हैं कि उद्योग इस संक्रमण काल से बाहर आ चुका है और इसके आगे बढ़ने की संभावना है।

पवन उद्योग को वित्त वर्ष 2020 से राज्य और केंद्रीय स्तर के बोली-प्रक्रिया के माध्यम से हर साल 10,000 मेगावाट से 12,000 मेगावाट की नीलामी के लिए तैयार किया गया है। सुजलॉन एनर्जी जैसी सूचीबद्ध कंपनियों को आॅनशोर और आॅफशोर पवन ऊर्जा क्षमता में बढोतरी के साथ अपेक्षित नीलामी के उछाल की उम्मीद होगी। पूंजी बाजार में भी जोरदार उथल-पुथल देखने की उम्मीद की जा सकती है, क्यांेकि सेम्बकाॅर्प इंडिया, रीन्यू पावर जैसी कंपनियों के प्रस्तावित आईपीओ इस रोमांचक क्षेत्र में हलचल मचाएंगे।