अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने को नई नीतियां बना रहा है भारत : शिवन

दुबई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के प्रमुख और अंतरिक्ष विज्ञान विभाग के सचिव डॉ के शिवन ने यहां रविवार को कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी वर्तमान नीतियों में संशोधन कर रहा है और नई नीति तैयार करने में लगा है।

डाॅ शिवन ने कहा कि भारतीय कंपनियों को आगे वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष उद्योग में बड़ी भूमिका निभानी है। डाॅ शिवन ने कहा कि भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र में हाल के नीतिगत सुधारों से निजी क्षेत्र की इकाइयों को केवल आपूर्तिकर्ता से आगे बढ़ कर पूरी प्रक्रिया में भागीदार बनाने का अवसर मिलने लगा है।

उन्होंने यहां चल रही अंतराष्ट्रीय प्रदर्शनी— दुबई एक्सपो 2000 में भारतीय मंडप में अंतरिक्ष उद्योग का भविष्य— अंतरराष्ट्रीय सहभागिता एवं सहयोग विषय पर एक संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित किया। इस संगोष्ठी का आयोजन भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग और उद्योगमंडल फिक्की ने मिल कर किया था। इसमें रुस, अमेरिका और आस्ट्रेलिया की अंतरिक्ष एजेंसियों के कई अधिकारियों ने भी भाग लिया।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष उन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में है जहां भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपेक्षा रखता है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि वाणिज्यिक और तकनीकी सहभागिता से इस क्षेत्र में सहयोग अधिक मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योगों को वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभानी है।

डॉ शिवन ने कहा कि सरकार अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी इकाइयों को आमंत्रित करने को तैयार है और इसरो अब स्टार्टअप इकाइयों और उद्योगों के साथ गठजोड़ करने लगा है। उन्होंने कहा कि भारत इस मामले में अंतरराष्ट्रीय सहभागिता ध्यान दे रहा है जिसमें द्विपक्षीय और बहुपक्षीय भागीदारी भी शामिल हैं। इसरो प्रमुख ने कहा कि भारतीय उद्योग अंतरिक्ष क्षेत्र में आगे बड़ी भूमिका निभाएगा क्यों कि अब इसमें स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु और मझोले क्षेत्र के उद्यमों को भी स्थान मिलने लगा है।

उन्होंने भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर संतोष जताया। डॉ शिवन ने इस अवसर पर यह भी कहा कि वाह्य अंतरिक्ष को सुरक्षित बनाए रखना सरकारों और गैर सरकारी संगठनों सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। इसरो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मानवता की भलाई के लिए सहयोग के सभी अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में योगदान देने को तैयार है।

संगोष्ठी का विषय रखते हुए भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं अनुमोदन केंद्र :इन—स्पेस: के चेयरमैन डाॅ पवन गोयनका ने कहा कि भारत नवप्रवर्तनकारी मिशनों और पुन:—पुन: प्रयोग में लाए जा सकने में सक्षम प्रक्षेपण यानों के विकास में अंतराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि भारत अन्य देशों के निजी स्तर पर सेवाओं की भी पेशकश करेगा।