Tokyo Olympics में भारतीय मुक्केबाज जीत सकते हैं 2-3 पदक: कविंदर

Indian boxers can win 2-3 medals at Tokyo Olympics
Indian boxers can win 2-3 medals at Tokyo Olympics

नई दिल्ली। विश्व चैंपियनशिप के क्वार्टरफाइनलिस्ट और अगले साल होने जा रहे टोक्यो ओलम्पिक में भारत की पदक उम्मीद माने जा रहे 57 किलो वर्ग के मुक्केबाज कविंदर सिंह बिष्ट का मानना है कि यदि भारतीय मुक्केबाजों ने इसी तरह अपना बेहतरीन प्रदर्शन जारी रखा तो टोक्यो ओलंपिक में भारत के खाते में मुक्केबाजी से दो-तीन पदक आ सकते हैं।

कविंदर ने इस साल एशियाई मुक्केबाजी प्रतियोगिता में मौजूदा विश्व चैंपियन कैरात येरालिएव को क्वार्टरफाइनल में हराकर तहलका मचाया था और आगे चलकर इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था। वह इसके अलावा विश्व चैंपियनशिप में 2017 और 2019 में दो बार क्वार्टरफाइनलिस्ट रहे हैं।

इस समय दिल्ली में चल रही बिग बाउट इंडियन बॉक्सिंग लीग की टीम बॉम्बे बुलेट्स के भरोसेमंद मुक्केबाज ने मंगलवार को विश्व प्रसिद्ध स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन ब्रांड मसलमोंक को लांच करने के अवसर पर कहा कि भारतीय मुक्केबाजी में लगातार सुधार हो रहा है और इसका प्रमाण इस साल की विश्व चैंपियनशिप में भारतीय मुक्केबाजों का प्रदर्शन है। विश्व चैंपियनशिप में भारतीय पुरुष मुक्केबाजों ने पहली बार एक प्रतियोगिता में दो पदक जीते जबकि महिला मुक्केबाजों ने चार पदक जीतने में सफलता हासिल की।

कविंदर ने कहा, “भारतीय मुक्केबाजी का स्तर इस समय काफी ऊंचा हो गया है। पहले मुक्केबाजों को लोग ज्यादा नहीं जानते थे लेकिन अब मुक्केबाजी को लेकर देश में काफी उत्साह है। हमें यकीन है कि टोक्यो ओलम्पिक में भारतीय मुक्केबाज अच्छा प्रदर्शन करेंगे और देश के लिए 2-3 पदक जीतेंगे।”

बिग बाउट बॉक्सिंग लीग के सेमीफाइनल में पहुंच चुकी बॉम्बे टीम के कोच गिरीश पवार ने भी कविंदर की बात का समर्थन करते हुए कहा कि अब भारतीय मुक्केबाजी बदल रही है और आने वाले वर्षों में उनके मुक्केबाजों को भी चैंपियन क्रिकेटरों की तरह जाना पहचाना जाएगा। कोच ने साथ ही कहा कि भारतीय मुक्केबाज टोक्यो में कम से कम दो पदक जीत सकते हैं। पवार के अनुसार कविंदर बिष्ट और अमित पंघल में ओलंपिक पदक जीतने का दम है।

इस अवसर पर मसलमोंक के संस्थापक और देश के सबसे छोटी उम्र के राष्ट्रीय अवार्ड विजेता वैज्ञानिक डॉक्टर प्रकाश भट्ट और सदस्य दिनेश फुलारा ने बॉम्बे टीम के प्रदर्शन को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि उनका प्रॉडक्ट को भारतीय खिलाड़ियों में खासा पसंद किया जा रहा है क्योंकि वह अपने उत्पाद भारतीय लाइफस्टाइल और यहां के खिलाड़ियों की जरूरतों के हिसाब से बना रहे हैं।

कोलंबिया की ओलंपिक पदक विजेता लोरिना, प्रयाग चौहान, दिव्यांशु जायसवाल ,नवीन बूरा आदि मुक्केबाजों ने अपने प्रायोजक द्वारा दी जा रही सुविधाओं को शानदार बताया और कहा कि खिलाड़ियों को उनकी जरूरत के हिसाब से खुराक मिल रही है और मसलमोंक के इस्तेमाल से उनके प्रदर्शन में सुधार आएगा।

कोच गिरीश पवार ने ओलम्पिक पदक विजेता मुक्केबाज विजेंदर सिंह और एमसी मैरीकॉम के प्रदर्शन को खिलाड़ियों के लिए अनुकरणीय बताया और कहा कि आने वाले वर्षों में उनकी तरह कई चैंपियन उभर कर सामने आएंगे लेकिन जरूरत खेल में गंभीर प्रयास करने की है। उन्होंने कहा कि भारतीय मुक्केबाजों को हर प्रकार की सुविधाएं मिल रही हैं और यह सब फेडरेशन के प्रयासों के कारण ही संभव हो पाया है।