जाधव मामले में विधेयक पारित कर पाक ने ICJ में अवमानना याचिका दायर करने से भारत को रोका : फरोग नसीम

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कानून एवं न्याय मंत्री डॉ फरोग नसीम ने कहा है कि भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव से संबंधित विधेयक पारित कर पाकिस्तान ने भारत को अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत के निर्देश का पालन नहीं करने के लिए उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के समक्ष अवमानना याचिका दायर करने से रोक दिया है।

नसीम ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि संसद के दोनों सदनों से पारित और जाधव से संबंधित यह विधेयक किसी व्यक्ति विशेष से नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है।

उन्होंने कहा कि बुधवार को पारित आईसीजे (समीक्षा एवं पुनर्विचार) विधेयक 2021 किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं है और कानून के दायरे में आने वाले हर व्यक्ति पर लागू होगा। पाकिस्तान सरकार द्वारा लाए गए कानून से जाधव को अपनी सजा के विरुद्ध अपील करने की अनुमति मिल सकती है जो आईसीजे के फैसले के भी अनुरूप है।

कानून मंत्री ने कहा कि यह पाकिस्तान के लिए जोखिम भरा था। यदि हम यह कानून नहीं बनाते तो भारत आईसीजे की शरण में जाता और हमारे खिलाफ अवमानना याचिका दायर कर देता।

अंग्रेजी दैनिक डॉन के मुताबिक वसीम ने कहा कि कानून पारित करके पाकिस्तान ने भारत को अवमानना ​​मामला दर्ज करने से ‘रोका’ है जिसे आईसीजे में ‘अवज्ञा’ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि भारत, पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का दरवाजा भी खटखटा सकता था।

उन्होंने विपक्ष के उस आरोप को खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि मौत की सजा पाए भारतीय कुलभूषण जाधव को समीक्षा का अधिकार देने वाला नया कानून किसी व्यक्ति विशेष के लिए लाया गया है।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के निर्देश के अनुसार कुलभूषण जाधव को उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील करने का अधिकार देने के लिए पारित पाकिस्तानी कानून को अप्रभावी बताते हुए गुरुवार को खारिज कर दिया। भारत का मानना है कि पाकिस्तान ने जाधव को निर्बाध राजनयिक पहुंच से इनकार करना जारी रखा है तथा ऐसा माहौल बनाने में नाकाम रहा है जिसमें निष्पक्ष सुनवाई हो सके।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत ने बार-बार पाकिस्तान से आईसीजे के फैसले के अनुरूप काम करने का आह्वान किया है।

गौरतलब है कि जाधव (50) को पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में जासूसी करने और आतंकवाद फैलाने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई थी। भारत ने इसके खिलाफ आईसीजे में अपील की थी।