ट्रेन किराए में हुई बढ़ोतरी यात्रियों के नहीं उतरी गले, विभाग ने दी सफाई

जयपुर। नव वर्ष 2020 के पहले महीने पहले तारीख से रेल विभाग का ट्रेनों का किराया बढ़ाना लोगों को अखर गया है। पहले जनवरी से बढ़े किराए के लिए देश की जनता केंद्र सरकार कोई ही जिम्मेदार मान रही है। साल के शुरुआत में ही ट्रेनों में बढ़ाया गया किराया लोगों के गले नहीं उतर रहा है। यात्रियों के आक्रोश के बाद रेलवे विभाग ने अब सफाई दी है जो इस प्रकार है। वित्त वर्ष 2017-18 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो 10 सालों में सबसे खराब रहा था। यानी रेलवे को 100 रुपए कमाने के लिए 98.44 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।

मौजूदा वक्त में भारतीय रेलवे 2 हजार करोड़ के घाटे में है। रेल यात्रियों की ओर हमेशा ऐसी शिकायतें सामने आती रहती हैं कि रेलवे सिर्फ किराया बढ़ाता है और एक आम यात्री को सुविधाएं मुहैया कराने पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता। वैसे इस बार रेलवे की तरफ से किराया बढ़ाए जाने के पीछे वजह भी बताई गई है। रेलवे का कहना है कि यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने के लिए किराए में मामूली बढ़ोतरी की गई है। बढ़े किराए से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल स्टेशन और रेलवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने में किया जाएगा।

यात्रियों को सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं

आपको बता दें कि रेलवे की ओर से पिछली बार साल 2014-15 में यात्री किराए में 14.2% और माल ढुलाई भाड़े में 6.5% की बढ़ोतरी हुई थी। किराया बढ़ाए जाने से इतर अगर आप रेलवे की हालत पर नजर डालेंगे तो जमीनी हकीकत कुछ और बयां होती है। हाल ही में सीएजी के कहा था रेलवे की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। वित्त वर्ष 2017-18 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो 10 सालों में सबसे खराब रहा था। यानी रेलवे को 100 रुपए कमाने के लिए 98.44 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। मौजूदा वक्त में भारतीय रेलवे 2 हजार करोड़ के घाटे में है। देश में 43 फीसदी ट्रेन इसलिए लेट होती हैं, क्योंकि पटरियों पर क्षमता से ज्यादा ट्रेन चल रही हैं। यानी हर दो से चार सालों में यात्रियों को सुविधाएं मुहैया कराने के नाम पर रेलवे में किराया तो बढ़ा दिया जाता है लेकिन एक आम यात्री तक वो सुविधाएं नहीं पहुंच पाती जिनकी बात हर बार की जाती है।

इस प्रकार की गई ट्रेनों में किराए की वृद्धि

भारतीय रेलवे ने रेल किरायों में बढ़ोतरी की है। रेलवे के आदेश के मुताबिक, पैसेंजर के बेसिक किराए में बढ़ोतरी की गई है। नॉन सब-अर्बन किराए में 1पैसे/ किलोमीटर की बढ़ोतरी की गई है। बढ़ी हुई दरें आज से लागू हो गई हैं। नॉन एसी ट्रेन और मेल एक्सप्रेस के भाड़े में दो पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की गई है। वहीं एसी क्लास के भाड़े में चार पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की गई है। यह शुल्क शताब्दी और राजधानी ट्रेनों पर भी लागू होगा। नए वर्ष में ट्रेनों के किराए में बढ़ोतरी को लेकर यात्रियों में नाराजगी भी देखी जा रही है।

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार