क्या सिरोही को देवासी-ताराराम से बेहतर सुुविधाएं दिलवा पाई लोढ़ा-मेवाड़ा की जोड़ी?

सिरोही विधायक संयम लोढ़ा मार्च 2019 में भाजपा के बोर्ड के दौरान तत्कालीन सभापति ताराराम माली के साथ कोतवाली के बाहर स्थित नाले की सफाई का निरीक्षण करते हुए। फाईल
सिरोही विधायक संयम लोढ़ा मार्च 2019 में भाजपा के बोर्ड के दौरान तत्कालीन सभापति ताराराम माली के साथ कोतवाली के बाहर स्थित नाले की सफाई का निरीक्षण करते हुए। फाईल

सबगुरु न्यूज-सिरोही। भाजपा के पूर्व विधायक ओटाराम देवासी के कार्यकाल में सिरोही नगर परिषद पर काबिज भाजपा सभापति ताराराम माली के समय में सिरोही में अव्यवस्थाओं का आरोप लगा।

इसी मुद्दे को लेकर सिरोही विधायक संयम लोढ़ा नगर परिषद चुनावों में गए। उन पर विश्वास करके कांग्रेस को अभूतपूर्व तरीके से सिरोही ने जिताया। 35 में 22 पार्षद सिरोही सिरोही विधायक संयम लोढ़ा पर विश्वास करके इसलिए दे दिए कि सिरोही को जिम्मेदार और विश्वसनीय हाथों में देना उनकी मंशा था।

लेकिन, संयम लोढ़ा और सिरोही नगर परिषद में कांग्रेस के सभापति महेन्द्र मेवाड़ा इस विश्वास पर खरे उतर पाए हैं या नहीं, डेढ साल बीतने के बाद इसकी कड़ी दर कड़ी चर्चा करेंगे। इसकी शुरूआत उस पत्र से करते हैं जो कांग्रेस पार्षद ने नगर परिषद प्रशासन को लिखा। ये एक ही पत्र हो ऐसा नहीं है। कड़ी दर कड़ी सिरोही नगर परिषद के माध्यम से शहर में फैली बदहाली की लिखित शिकायतों की भी चर्चा करेंगे।

ये लिखा पत्र में

सबगुरु न्यूज के हाथ सिरोही नगर परिषद के कांग्रेस पार्षद का एक पत्र लगा है। इसमें पार्षद ने सिरोही नगर परिषद आयुक्त को लिखा कि ‘ठेकेदार को कई बार कहने के बाद भी उनके वार्ड में दो महीने से सफाई नहीं हो रही है, इसलिए सफाई ठेकेदार का भुगतान नहीं होना चाहिए।’

आरोप ये लग रहा है कि इसके बाद भी भुगतान हुआ। भुगतान होना नगर परिषद का विषय है। लेकिन, सवाल ये है कि आखिर नगर परिषद में सत्ता परिवर्तन के बाद भी वही स्थिति कैसे बनी हुई है जिस तरह की स्थिति की शिकायत ओटाराम देवासी-ताराराम की जोड़ी के समय सिरोही नगर परिषद में हुआ करती थीं।

डेढ़ साल के कार्यकाल में सिरोही विधायक संयम लोढ़ा-सभापति महेन्द्र मेवाड़ा नगर परिषद प्रशासन का इतना नहीं कस पाए कि सफाई और रोड लाइट जैसी आधारभूत समस्या के लिए सिरोही के लोग इन दोनों की तारीफ कर सकें।

आज भी विरेन्द्र मोदी कार्यकाल की ही चर्चा

सिरोही नगर परिषद में विरेन्द्र मोदी की कभी पकड़ हुआ करती थी। एक बार वो और एक बार उनकी सरपरस्ती में सुखदेव आर्य सिरोही की तत्कालीन नगर पालिका के अध्यक्ष बने। सफाई और रोड लाइटों की व्यवस्था के बारे में विधायक संयम लोढ़ा अपने बोर्ड के माध्मय से विरेन्द्र मोदी के कार्यकाल की यादों को मिटवा नहीं सके।

एक बार उन्हीं के आह्वान पर सिरोही नगर परिषद पर मोदी गुट को सत्ताच्युत करके जयश्री राठौड़ को कुर्सी पर बैठाया। वो उस वक्त भ्री वो मातहत से सिरोही को राहत दिलवाने में सफल नहीं हो पाए तो सिरोही ने भाजपा पर विश्वास किया। भाजपा बोर्ड ने भी सफाई और रोड लाइट के मामले में सिरोही शहर की आशाओं से विश्वासघात किया। अब वही विश्वासघात फिर से संयम लोढ़ा के आह्वान पर कांग्रेस पर विश्वास करने के कारण मिल रहा है।

इसके अलावा कोई बहुत बड़ी अपेक्षा नहीं

संयम लोढ़ा जब सिरोही विधायक बने थे तो ताराराम माली को बोर्ड था। उस समय सिरोही विधायक लोढ़ा ने शहर का जायजा लिया था। इस दौरान 18 मार्च 2019 को कोतवाली के बाहर की नाली में डंडी डालकर वहां फैली स्थाई गंदगी का फोटा- विडियो उस मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा का विषय रहा था।

आज ढाई साल बाद भी कोतवाली के बाहर की स्थित वही है जो संयम लोढ़ा के लकड़ी से नाले की तकनीकी समीक्षा करने के दौरान थी। जबकि सिरोही नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बन चुका है।

ये माना जा सकता है कि कोरोना काल में राजस्थान सरकार की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने से नाली सुधार और इन्फ्रास्ट्रक्चर संबंधित और काम नहीं हो पाए होंगे। लेकिन, सफाई और रोड लाइटों के पैसे तो एडवांस में नगर परिषद के पास आ रहे हैं। इसका नियमित भुगतान भी ठेकेदारों को हो रहा है तो सफाई की ये बदहाली आखिर है क्यों?

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