सीबीआई ने फिर घिसा इशरत जहां मुठभेड़ का जिन्न, डिस्चार्ज पीटिशन का विरोध

अहमदाबाद। सीबीआई ने इशरत जहां मुठभेड़ प्रकरण में आरोपी पूर्व डीआईजी डीजी वंजारा और पूर्व एसपी एनके अमीन की आरोप मुक्ति अर्जी (डिस्चार्ज पीटिशन) का यह कहते हुए विरोध किया है कि उसके पास दोनों के खिलाफ ठोस सबूत हैं।

वंजारा ने गत 12 मार्च को यह अर्जी दाखिल की थी और उनके बाद अमीन ने भी ऐसी अर्जी यहां इस मामले की सुनवाई कर रही सीबीआई की विशेष अदालत के जज जेके पंडया की अदालत में दी थी। सीबीआई ने दोनों अर्जियों का विरोध किया है। अदालत ने इस मामले में सुनवाई की अगली तिथि पांच मई तय की है।

इस मामले में आरोपित सात तत्कालीन पुलिस अधिकारियों में से एक 1987 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी वंजारा ने अपनी अर्जी में सीबीआई के आरोप पत्र को तत्कालीन केंद्र (कांग्रेस नीत संप्रग) सरकार के इशारे पर राजनीतिक रूप से प्रभावित तथा उस समय की गुजरात की नरेन्द्र मोदी सरकार को गिराने का षडयंत्र करार दिया है।

उन्होंने यह भी कहा है कि गत 21 फरवरी को आरोप मुक्त किए गए पांडेय जैसे ही आरोप उनके खिलाफ भी हैं। उन्होंने यह भी दावा किया है कि इस मामले में जांच अधिकारी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी से भी पूछताछ की थी और उन्हें इसमे फंसाने का प्रयास किया था। उन्होंने सीबीआई के आरोप पत्र को महज ‘कागजों का एक ढेर’ (बंडल ऑफ पेपर्स) भर बताया है।

ज्ञातव्य है कि सीबीआई ने पांडेय की आरोप मुक्ति अर्जी का विरोध किया था। 15 जून 2004 को अहमदाबाद के बाहरी इलाके में गुजरात पुलिस की एक टीम ने मुंबई की 19 वर्षीय कॉलेज छात्रा इशरतजहां, उसके पुरूष मित्र प्रणयेश पिल्लई उर्फ जावेद शेख तथा दो पाकिस्तानी युवकाें अमजद अली राणा और जीशान जौहर को मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था।

गुजरात पुलिस का कहना था कि ये सभी आतंकी संगठन लश्करे तैयबा के सदस्य थे जो तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी की हत्या की नीयत से आए थे। बाद में सीबीआई ने इस मामले की जांच की और इसे फर्जी मुठभेड़ करार दिया। वर्ष 2013 में इस मामले में वंजारा और पांडेय समेत अन्य आरोपी पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था।

सोहराबुद्दीन तथा तुलसीराम प्रजापति मुठभेड़ मामलों में भी आरोपी वंजारा को इन प्रकरणों में जमानत मिल गई थी। वह सादिक जमाल मुठभेड़ समेत अन्य मामलों में भी आरोपी हैं। इशरत जहां प्रकरण में जमानत मिलने के बाद वह जेल से रिहा हुए थे।

वंजारा ने अपनी अर्जी में कहा है कि जांच अधिकारी को किसी भी आरोपी को वादामाफ गवाह बनाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी के दबाव में ऐसा करने वाले कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों (कुल 19 आरोपी में से सात के खिलाफ आरोप पत्र दायर हुआ था) के बयान विश्वास योग्य नहीं हैं। अमीन ने भी खुद को निर्दोष बताते हुए आरोप मुक्ति अर्जी दी है।