विदेशी आक्रांताओं के साथ पहली लड़ाई जनजाति समाज ने लड़ी : शेखावत

स्वतंत्रता संग्राम में जनजाति नायकों का योगदान विषयक प्रदर्शनी

जोधपुर। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आजादी में जनजाति नायकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विदेशी आक्रांताओं के साथ पहली लड़ाई आदिवासी समुदाय ने ही लड़ी है। आजादी में अनेक लोगों ने अपना जीवन समर्पित किया है, उनके योगदान और समर्पण को आने वाली पीढ़ी को बताना आवश्यक है। इनके योगदान को स्मरण करना आवश्यक है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली और जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में स्वतंत्रता संग्राम में जनजाति नायकों का योगदान विषयक प्रदर्शनी का शनिवार को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री शेखावत ने उद्घाटन किया। शेखावत ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन जन आंदोलन बना, जिसमें जनजाति समाज ने प्रभावी भूमिका निभाई। स्वीधनता संग्राम में जनजाति समाज का बहुत बड़ा योगदान है। संघर्ष जनजाति समाज के डीएनए में है।

शेखावत ने कहा कि जनजाति समाज ने जल, जमीन, जंगल और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष किया। अनेक विदेशी आक्रांता आए। इनके साथ सबसे पहले किसी को लड़ाई लड़नी पड़ी, वह जनजाति समाज था।

जब कभी भी देशी सत्ताएं पराभूत हुई, तब उस आजादी की मशाल की चिंगारी को जीवित रखने का काम जनजाति समाज ने नहीं किया होता तो आज हमारा अस्तित्व समाप्त हो जाता। देश का जनजातीय समुदाय भारत के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए रक्षक के रूप में अपनी भूमिका का निर्वहन करता रहा है। इसलिए यह समाज हमारे लिए प्रणम्य है।

शेखावत ने कहा कि वर्ष 2047 तक देश को विकसित भारत के रूप में देखना चाहते हैं तो आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए सभी को एकजुट होकर संकल्पित होना होगा। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत इन आयोजनों के माध्यम से आजादी के संघर्ष में जनजाति समाज ने जो संघर्ष और योगदान किया, उन सभी नायकों के योगदान को आजादी के 75 वर्ष में उनकी स्वतंत्रता के प्रति संकल्पना के लिए सभी को जिम्मेदारी लेकर आगामी 25 वर्ष के लिए संकल्पित होना होगा।

कार्यक्रम में जनजाति प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के उपनिदेशक एसपी मीना, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर की कुलसचिव गोमती शर्मा, परिवहन विभाग के संयुक्त परिवहन आयुक्त डॉ. मन्नालाल रावत, डॉ. अर्जुनलाल मीना, अधिकारीगण, विद्यार्थीगण मौजूद रहे।