ट्रांसजेंडर लेखिका की पहचान उजागर करने पर जापानी महिला जनप्रतिनिधि पर 11 लाख येन का जुर्माना

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टोक्यो। जापान की राजधानी टोक्यो की एक अदालत ने पुरस्कार विजेता लेखिका ली कोटोमी की निजी लैंगिक पहचान और उनसे जुड़ी संवेदनशील जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने के मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधि हिरोमी मुरामात्सु को 11 लाख येन (करीब 6,972 अमेरिकी डॉलर) का हर्जाना देने का आदेश दिया है। गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए फैसले में अदालत ने माना कि लेखिका की सहमति के बिना उनकी निजी जानकारी सार्वजनिक करना निजता के अधिकार का गैरकानूनी उल्लंघन था।

टोक्यो जिला अदालत के न्यायाधीश योहेई मोटोमुरा ने कहा कि सार्वजनिक की गई जानकारी लेखिका के शारीरिक लिंग और लैंगिक पहचान से गहराई से जुड़ी थी। ऐसी संवेदनशील जानकारी को गोपनीय रखने की पर्याप्त वजह थी और उसे सार्वजनिक करने का कोई उचित आधार नहीं था।

यह मामला किसी व्यक्ति की लैंगिक पहचान को उसकी इच्छा के विरुद्ध उजागर करने से जुड़े निजता अधिकारों पर महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले के रूप में देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यामानाशी प्रांत के कोफू शहर की जनप्रतिनिधि हिरोमी मुरामात्सु ने मई 2024 में सोशल मीडिया पर ली कोटोमी के बारे में टिप्पणियां की थीं। इन पोस्ट में लेखिका के जन्म के समय निर्धारित लिंग और उनकी लैंगिक पहचान से जुड़ी निजी जानकारियों का उल्लेख किया गया था।

मामले में यह भी सामने आया कि लेखिका के लैंगिक परिवर्तन से पहले की नाबालिग अवस्था की तस्वीर और उनका कानूनी नाम भी सोशल मीडिया पर साझा किया गया। लेखिका और संबंधित जनप्रतिनिधि के बीच पहले कोई व्यक्तिगत परिचय नहीं था।

ली कोटोमी ने इसे अपनी निजता और व्यक्तित्व संबंधी अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कानूनी कार्रवाई की। उन्होंने अदालत से 55 लाख येन के हर्जाने सहित अन्य राहत देने की मांग की थी।

अदालत ने क्यों लगाया हर्जाना?

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि संबंधित जानकारी लेखिका के निजी जीवन और लैंगिक पहचान से जुड़ी थी तथा इसे गोपनीय रखने की जरूरत थी। इसे सार्वजनिक करने के लिए कोई उचित और तर्कसंगत कारण नहीं था। इसी आधार पर अदालत ने जनप्रतिनिधि की कार्रवाई को गैरकानूनी निजता उल्लंघन माना और 11 लाख येन का मुआवजा देने का आदेश दिया।

हालांकि, अदालत ने लेखिका से संबंधित भविष्य की सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत का मानना था कि हर्जाने का आदेश भविष्य में इस तरह की गतिविधियों को रोकने में निवारक भूमिका निभा सकता है।

लेखिका ने कहा-ऐसा मुकदमा करने की नौबत ही नहीं आनी चाहिए थी

फैसले के बाद ली कोटोमी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें इस फैसले से खुशी या उत्सव जैसा महसूस नहीं हो रहा। उनके अनुसार, इस मुकदमे की जरूरत पड़ना ही अपने आप में दुखद है। उन्होंने संबंधित जनप्रतिनिधि से अपने कृत्य पर गंभीरता से विचार करने और ईमानदारी से आत्ममंथन करने की अपेक्षा जताई।

लेखिका ने अपने सार्वजनिक बयान में यह भी स्पष्ट किया कि ‘ट्रांसजेंडर’ शब्द का इस्तेमाल उनकी लैंगिक पहचान को पूरी तरह व्यक्त नहीं करता और उनकी पहचान एक महिला के रूप में है। उन्होंने कहा कि उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध सार्वजनिक किया गया, जिसके कारण उन्हें न्यायालय का सहारा लेना पड़ा। दूसरी ओर, हिरोमी मुरामात्सु ने कहा कि वह अपने वकील से सलाह लेकर आगे की कार्रवाई के बारे में निर्णय करेंगी।

कौन हैं ली कोटोमी?

ताइवान में जन्मी ली कोटोमी जापान में सक्रिय लेखिका हैं। उन्हें वर्ष 2021 में अपने उपन्यास ‘हिगानबाना गा साकु शिमा’ (जहां रेड स्पाइडर लिली खिलती है) के लिए प्रतिष्ठित अकुतागावा पुरस्कार मिला था। यह पुरस्कार जापान के साहित्यिक जगत के प्रमुख सम्मानों में गिना जाता है।

उनकी लैंगिक पहचान और निजी जानकारी को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद सामने आने के बाद यह मामला अदालत पहुंचा। 29 अक्टूबर 2026 का फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि किसी व्यक्ति की निजी लैंगिक जानकारी को उसकी सहमति के बिना सार्वजनिक करने पर कानूनी जवाबदेही तय हो सकती है।