महारानी लक्ष्मीबाई की जयंती के अवसर पर जश्न और रोशनी से सराबोर हुई झांसी

झांसी। उत्तर प्रदेश की वीरांगना नगरी झांसी में शनिवार को पूरा दिन ही महारानी लक्ष्मीबाई की जयंती के अवसर पर उनको समर्पित विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया और शाम के समय पूरा शहर रोशनी से सराबोर नजर आया।

इस अवसर पर सुबह से ही आयोजनों का सिलासिला शुरू हो गया। किले पर सबसे पहले श्री राधे राधेसेवा समिति ने महारानी को समर्पित एक शोभायात्रा का आयोजन किया। जिसमें वीरांगना की वेशभूषा में सजी दो बालिकाएं घोडों पर सवार होकर शोभायात्रा की अगुवाई करती निकली। जिला अधिवक्ता संग के तत्वाधान में जजी परिसर में अधिवक्ताओं ने रानी की प्रतिमापर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

उत्तर प्रदेश साहित्य सभा के पदाधिकारियों और सदस्यों ने रानी लक्ष्मीबाई के जन्मोत्सव पर महारानी लक्ष्मीबाई पार्क में उनकी प्रतिमा के सामने 101 द्वीप प्रजज्वलित कर वीरांगना के शौर्य को नमन किया। इस अवसर पर सीबीराय तरूण, वैभव दुबे, मोनिका पांडेय मनु, रिपुसूदन नामदेव, अजय साहू आदि कवियों ने कविता पाठ कर रानी को श्रद्धांजलि दी।

बुंदेलखंड सेवा मंडल के सदस्यों ने लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में स्थापित रानी झांसी की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर नमन किया। इस अवसर पर लक्ष्मी व्यायाम मंदिर के 1993 बैच के पुरातन छात्रों ने भी रानी के प्रतिमा के समक्ष दीपदान किया। दिन भर विभिन्न स्कूलों और सामाजिक संगठनों की ओर से रानी की शौर्यगाथा का गुणगान करती शोभा यात्राओं के निकलने का दौर चलता रहा।

इस अवसर पर महानगर के सभी चौराहों और सरकारी इमारतों के साथ साथ झांसी के ऐतिहासिक किले में विशेष रोशनी की व्यवस्था की गई। महारानी लक्ष्मीबाई से संंबंधित सभी एतिहासिक स्थल रोशनी से सराबोर नजर आए। महानगर के लोग विशेष रूप से इस अवसर पर परिवार सहित बाहर निकले और किले के मैदान, महारानी लक्ष्मीबाई पार्क जैसे सार्वजनिक स्थलों पर रानी के जयंती का जश्न मनाते नजर आए।

शाम के समय पूरे शहर का नजारा बेहद मोहक नजर आया जब महानगर का हर चौक चौराहा विभिन्न रंगों की रोशनी में सराबोर नजर आया। सभी जगहों पर रोशनी के विशेष इंतजाम किया गया और अंधेरा होने के बाद लोगों ने अपने अपने घरों के बाहर दीपक जलाकर रानी को नमन किया। पूरा शहर की दीपांजलि देकर अपनी ओर से श्रद्धांजलि देता नजर आया।

महारानी लक्ष्मीबाई का जिस गणेश मंदिर में विवाह संपन्न हुआ था वहां भी आज विशेष रोशनी और सजावट की व्यवस्था की गई। झांसी के लिए इस अतिविशिष्ट दिवस पर लोगों के लिए किले में प्रवेश नि:शुल्क रखा गया और रात के समय होने वाले लाइट शो भी नि:शुल्क रखा गया। इस कारण बड़ी संख्या में लोगों ने किले का रूख किया।