जर्नलिस्ट विजय सिंह मौर्य समेत 6 को मिला भारत गौरव सम्मान

दौसा। जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ भारत (जाब) व राष्ट्र सम्मत प्रकाशन समूह की ओर से रविवार को ‘सच्ची खबरें बनाम झूठी खबरें’ विषय पर संगोष्ठी और भारत गौरव पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें अतिथियों ने भारत गौरव, राजस्थान गौरव तथा दौसा गौरव से पत्रकारों को सम्मानित किया। इस मौके पर भारत के मूल संविधान में शामिल चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

फेक न्यूज के दौर में डिजिटल सत्याग्रह की जरूरत

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने फेक न्यूज पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि फेक न्यूज के इस दौर में डिजिटल सत्याग्रह की आवश्यकता है।

समारोह में बतौर मुख्य वक्ता प्रो. द्विवेदी ने कहा कि जिस तरह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने तीन बंदरों का उदाहरण देते हुए बुरा ना देखने, बुरा ना बोलने तथा बुरा ना सुनने की शिक्षा दी थी, उसी तरह आज सोशल मीडिया के दौर में ‘बुरा मत टाइप करो, बुरा मत लाइक करो और बुरा मत शेयर करो’ की सीख जरूरी है।

उन्होंने कहा कि हमें झूठी खबरें फैलाने वालों के समक्ष असहयोग आंदोलन की शुरुआत करनी चाहिए। सच में झूठ की मिलावट अगर नमक के बराबर भी होती है तो वह सच नहीं रहता, उसका स्वाद किरकिरा हो जाता है। इसलिए अब वक्त आ गया है कि असली खबरों पर झूठ का नमक छिड़कने वालों के खिलाफ खड़ा हुआ जाए।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार एवं लेखक लक्ष्मीनारायण भाला ने कहां कि सच्ची खबरें बनाम झूठी खबरें या झूठी खबरें बनाम सच्ची खबरें इस प्रकार के विषय पर चर्चा आयोजित करने का दुर्भाग्य हमारे लिए वास्तव में चिंता की बात है। ऐसी नौबत क्यों आई इस पर जब हम विचार करते हैं तो ऐसा लगता है कि संवाद माध्यम को या मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मानने के कारण ही यह गिरावट आई है।

वास्तव में मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ नहीं बल्कि लोकतंत्र के तीन स्तंभों पर अंकुश रखने वाला, नजर रखने वाला तथा उन्हें अपनी भूमिका की याद दिलाने वाला एक सतर्क कारीगर है। अपनी इस भूमिका को छोड़कर जब मीडिया भी केवल स्तंभ बनकर रह गया तो उसमें अन्य स्तंभों की तरह ही बुराइयां आने लगी।

अतः मीडिया को स्तभ नहीं बल्कि तीनों स्तंभों पर नजर रखने वाला तथा उसमें विकार न आने देने की व्यवस्था करने वाला कारीगर बने रहना चाहिए। मीडिया के क्षेत्र में कार्यरत सभी पत्रकार, स्तंभ लेखक, संपादक तथा संचालक इस बदलाव के लिये अपना मानस बनाएं यही समय की मांग है।

मुख्य अतिथि और दौसा सांसद जसकोर मीना ने कहा कि यदि झूठ हजार बार बोला जाए तो वह सच जैसा दिखने लगता है, लेकिन हमें झूठ और सच के बीच का अंतर समझने की जरूरत है। झूठी खबरों से देश का भविष्य कमजोर होता है। हमें झूठी खबरों के खिलाफ उठ खड़ा होना है। असत्य तब विजयी होता है, जब हम अपने को छोटा मान लेते हैं। इसलिए सत्य के साथ चलें। सांसद ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह प्रबुद्धजनों का संगम राष्ट्र निर्माण, समाज निर्माण तथा मानव निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम में राजस्थान लोकसेवा आयोग के पूर्व सदस्य विनोद बिहारी शर्मा, कवि, साहित्यकार और प्रशासनिक अधिकारी टीकम बोहरा, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य एलसी भारतीय, सर्वब्राह्मण समाज के प्रदेशाध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने भी विचार व्यक्त किए।

राजस्थान से प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य बनने पर एलसी भारतीय का सम्मान किया गया। पंडित नवल किशोर शर्मा सामुदायिक भवन में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में नन्ही गायिका आकांक्षा राव ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।

स्वागताध्यक्ष दीपक लवानिया ने सभी आगुन्तकों का स्वागत किया। कार्यक्रम संयोजक महेश बालाहेड़ी, सह संयोजक कमलेश त्रिवेदी, वरिष्ठ पत्रकार विनोद पाठक और संजीव माथुर ने अतिथियों का स्वागत किया। समारोह का संचालन श्रीकांत शर्मा ने किया। समारोह में राजस्थान, बिहार, दिल्ली, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश आदि देशभर से आए पत्रकारों ने शिरकत की। समारोह राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ।

इन्हें मिला भारत गौरव सम्मान

अजमेर से सबगुरु डॉट कॉम के संपादक विजय मौर्य, दिल्ली से विष्णु गुप्त, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फोटो जर्नलिस्ट शैलेन्द्र पांडेय, बिहार से दीपक कुमार, हिमाचल प्रदेश से गोपाल शर्मा, मध्यप्रदेश से जितेंद्र जाट।

इन्हें मिला राजस्थान गौरव सम्मान

जयपुर से दैनिक जागरण के संवाददाता नरेंद्र शर्मा, दैनिक नवज्योति के के.एल शर्मा, राजस्थान पंछी के श्याम सुंदर शर्मा, ढूढ़ाढ़ री ललकार के अशोक शर्मा, लालसोट दौसा से कमलेश बैंदाड़ा, अलवर से प्रशांत।

इन्हें मिला दौसा गौरव सम्मान

दौसा से गौरव खंडेलवाल, राजेन्द्र जैन, रोशन जोशी, भास्कर जैमन, जुगल शर्मा, राजेन्द्र जैमन, विनय जोशी, बांदीकुई से गजेंद्र राठौड़, लालसोट से कमलेश आसिका, धर्मेंद्र शर्मा, पूजा जोशी, तरुण त्रिवेदी, सिकंदरा से विश्राम सैनी, विनोद जैमन, मानपुर से मुकेश सैनी, महुवा से संजय लाटा, अवधेश अवस्थी, राजेन्द्र पीपलखेड़ा, मेहंदीपुर बालाजी से सुरेश तिवाड़ी।

भारत के मूल संविधान में शामिल चित्रों की प्रदर्शनी

दौसा में भारत गौरव पत्रकार सम्मान समारोह में भारतीय संविधान में शामिल चित्रों पर आधारित एक प्रदर्शनी लगाई गई। दौसा में पहली बार आयोजित इस प्रदर्शनी में भारतीय संविधान की मूल प्रति की हिन्दी व अंग्रेजी भाषा की प्रतिलिपि भी प्रदर्शित की गई।

एडवोकेट सूर्यप्रताप सिंह राजावत एवं ऋषि अग्रवाल के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी में लोगों को भारतीय संविधान की मूल प्रति और उसमें शामिल चित्रों के संबंध में जानकारी दी गई। उल्लेखनीय है कि भारतीय संविधान की मूल प्रति को संसद भवन के तलघर में हीलियम गैस के चैम्बर में संरक्षित करके रखा गया है। पूर्व में यह नाइट्रोजन गैस के चैम्बर में रखी गई थी।

वर्ष 2014 में तत्कालीन सरकार द्वारा संविधान की मूल प्रति की प्रतिलिपियां आम जन को विक्रय मूल्य पर उपलब्ध कराने के लिए प्रकाशित की गई। इन्हीं प्रकाशित प्रतिलिपियों में से शामिल भारतीय संविधान को और उनमें शामिल 25 चित्रों को अलग से प्रदर्शित किया गया।

संविधान के चित्रों में वैदिक गुरुकुल का, मर्यादा पुरुषोत्तम राम का, भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए, मोहनजोदड़ो मुद्रा, भगवान बुद्ध, भगवान नटराज, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अन्य चित्र भी हैं। ये सभी चित्र नंद लाल बोस द्वारा बनाए गए थे। समारोह में आए अतिथियों व आगंतुकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर इसकी प्रशंसा की।

गौरतलब है कि संविधान में शामिल चित्रों पर वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मीनारायण भाला द्वारा “हमारा संविधान : भाव एवं रेखांकन” पुस्तक लिखी गई है। इसमें लेखक ने चित्रों के बारे में विस्तार से बताया गया है। संविधान निर्माताओं का उन चित्रों को संविधान में शामिल करते समय क्या भाव रहा होगा, उसके बारे में भी उल्लेख किया गया है।