कानपुर में हत्यारोपी विकास दुबे अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर

कानपुर। उत्तर प्रदेश पुलिस के आठ पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या का आराेपी और हिस्ट्रीशीटर बदमाश विकास दुबे 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

पुलिस महानिदेशक एचसी अवस्थी ने शनिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स और पुलिस की कई टीमों ने आठ पुलिस कर्मियों के हत्या का आरोपी व हिस्ट्रीशीटर बदमाश विकास दुबे और उसके गुर्गों की तलाश में कई जगहों पर छापेमारी की। शुक्रवार दोपहर में मुठभेड़ के बाद पुलिस ने उसके दो साथियों को मार दिया गया था। अपराधियों पर नकेल कसने के लिए लगभग 100 टीमों का गठन किया गया है।

अवस्थी ने कहा कि हिस्ट्रीशीटर बदमाश पर 50,000 रुपए का इनाम घोषित किया गया है। गिरफ्तार किए जाने पर सरकार उसके खिलाफ एनएसए लागू करेगी। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की हत्या के पीछे के कारण का पता लगाने के लिए उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

हालांकि, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि बहुत जल्द दुबे को पकड़ा जाएगा क्योंकि पुलिस को उसके ठिकाने के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। इस बीच, ऐसी खबरें हैं कि बदमाश विकास दुबे किसी भी जिले में पुलिस को एक मुठभेड़ में जान से मारने की धमकी के मामले को लेकर अदालत में आत्मसमर्पण कर सकता है।

हिस्ट्रीशीटर की मां सरला देवी, जो लखनऊ में रहती हैं, ने भी पुलिस से कहा है कि हत्याओं का बदला लेने के लिए उसके बेटे को मार दें। एक जांच चल रही है जिसमें यह पता लगाया जायेगा कि पुलिस में बदमाश का मुखबिर कौन था, जिसने छापे के बारे में अपराधी को इत्तला दी थी। चौबेपुर पुलिस स्टेशन के तीन पुलिसकर्मी, जिनमें एक सब इंस्पेक्टर, एक पुलिसकर्मी और एक होमगार्ड जवान शामिल हैं, जांच के राडार में हैं और उनके मोबाइल कॉल डिटेल की जांच की जा रही है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्वीकार किया कि दुबे को पुलिस छापे के बारे में सभी जानकारी थी और उन्होंने उसी के अनुसार योजना बनाई थी। हमले में घायल हुए पुलिसकर्मियों ने भी बताया है कि अपराधियों ने एके-47 से हमला किया। विकास दुबे के दो मोबाइल, बीकरू गांव में उसके आवास से जब्त किए गए हैं और कॉल डिटेल की जांच की जा रही है।

शहीद पुलिसकर्मियों को पुष्पांजलि देने के लिए शुक्रवार को कानपुर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को एक एक करोड़ रूपए का मुआवजा, सरकारी नौकरी और एक को असाधारण पेंशन दिए जाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिए है।

इस बीच, सभी आठ पुलिसकर्मियों के पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांवों में पहुंच गए हैं और आज दोपहर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में 52 वर्षीय खूंखार अपराधी को गिरफ्तार करने गए तीन अधिकारियों सहित आठ पुलिसकर्मी घात लगाए बैठे थे और सात घायल हो गए थे।

शहीद हुए पुलिसकर्मियों में श्रेत्राधिकारी (सीओ) बिलौर देवेंद्र मिश्रा, एसओ शिवराजपुर महेश यादव, चौकी प्रभारी माधवन अनूप कुमार, सब इंस्पेक्टर शिवराजपुर नेबुलाल और चौबेपुर पुलिस स्टेशन के सुल्तान सिंह, कांस्टेबल सुल्तान सिंह, बिठूर थाने के सभी सिपाही राहुल, जितेंद्र और बबलू शामिल हैं। सात घायल पुलिसकर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनके स्वास्थ में सुधार हो रहा है।

अपराधी विकास पर हत्या और अपहरण के लगभग 60 मामले लंबित है जिनमें से एक में उसने एक भाजपा नेता और तत्कालीन मंत्री संतोष शुक्ला की 2001 में शिबली पुलिस स्टेशन के अंदर हत्या कर दी थी।