कर्नाटक में सियासी नाटक का पटाक्षेप, सीएम कुमारस्वामी का इस्तीफा

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बेंगलूरु। कर्नाटक की 14 माह पुरानी जनता दल (एस) और कांग्रेस गठबंधन सरकार मंगलवार को गिर गई जिसके साथ ही छह दिन तक चले सियासी नाटक का पटाक्षेप हो गया। मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने में विफल रहने के तुरंत बाद मंगलवार देर शाम राज्यपाल वजूभाई वाला को अपना इस्तीफा सौंप दिया जिसे राज्यपाल ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया।

राज्यपाल ने कुमारस्वामी का इस्तीफा स्वीकार करने के साथ ही उनसे अगली व्यवस्था होने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रुप में पद पर बने रहने का अनुरुोध किया है। लेकिन इस दौरान उनसे कोई नीतिगत निर्णय नहीं लेने को कहा है।

मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की तरफ से लाए गए विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 99 और विरोध में 105 मत पड़े। कांग्रेस और जद (एस) के 15 विधायकों के इस्तीफा देने से गठबंधन सरकार अल्पमत में आ गई थी। गठबंधन के नेताओं ने सरकार बचाने की भरसक कोशिश की। मुख्यमंत्री ने विश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराये जाने से बचने के कई ‘उपाय’ किए।

चार दिन चली चर्चा के बाद आज शाम साढ़े सात बजे मतदान कराया गया जिसका नतीजा गठबंधन दलों के विपरीत गया और आखिरकार सरकार गिर गई। कुमारस्वामी सरकार 23 मई 2018 को बनी थी। विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था जिसके बाद कांग्रेस तथा जनता दल (एस) ने गठबंधन सरकार बनायी थी। कांग्रेस के ज्यादा विधायक होने के बावजूद मुख्यमंत्री पद जद(एस) को दिया गया था।

सरकार बनने के कुछ समय बाद ही गठबंधन में मतभेद उभरने लगे थे। गठबंधन के 15 विधायकों के इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष ने तुरंत स्वीकार नहीं किये थे। इसके मद्देनजर इन विधायकों ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे स्वीकार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।

न्यायालय ने इस पर अपने फैसले में इस्तीफों का निर्णय विधानसभा अध्यक्ष पर छोड़ दिया था लेकिन कहा था कि इन सदस्यों को विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस और जनता दल (एस) ने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी पर ‘ऑपरेशन लोट्स’ के तहत पैसा और मंत्री पद देने का लालच देकर गठबंधन के विधायकों को तोड़ने का आरोप लगाया है। अध्यक्ष द्वारा समन जारी करने के बावजूद गठबंधन के बागी विधायक विश्वास प्रस्ताव के दौरान सदन में उपस्थित नहीं हुए।

विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कुमारस्वामी ने कहा कि मैं वोटिंग के लिए तैयार हूं। मैं खुशी-खुशी यह पद भी छोड़ने को तैयार हूं। मैं राजनीति में अप्रत्याशित तौर पर आया था ।जब वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव का परिणाम आया था, तब मैं राजनीति छोड़ने की सोच रहा था।

इससे पहले मंगलवार शाम छह बजे से बेंगलूरु में सभी शराब की दुकानें और बार को अगले 48 घंटों के लिए बंद करके धारा 144 लगू कर दी गई थी। पुलिस आयुक्त आलोक कुमार ने कहा था कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

हाल ही में मंत्रिमंडल के विस्तान के दौरान मंत्री बनाए गए दो निर्दलीय विधायकों ने सरकार से समर्थन वापस लिया था और भाजपा को समर्थन किया। राजधानी बेंगलूरु में एक और ड्रामा देखा गया। रेस कोर्स रोड पर एक फ्लैट में दोनों निर्दलीय विधायक ठहरे हुए थे। इस बीच कांग्रेस के कार्यकर्ता वहां पहुंच गए और इसके बाद भाजपा के कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई।

भाजपा के भ्रष्टाचार से कर्नाटक में हारा लोकतंत्र : कांग्रेस

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक में कांग्रेस-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन सरकार गिराने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने विधायकों की खरीद फरोख्त करके नैतिकता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को पराजित किया है।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि कर्नाटक में खरीद फरोख्त के जरिए चुनी हुई सरकार गिराकर भाजपा ने अत्यधिक जघन्य उदाहरण पेश किया है। कांग्रेस और जद-एस ने अपनी लड़ाई मजबूती से लड़ी है और उसकी नैतिक जीत हुई है।

गठबंधन सरकार गिराने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार, राज्य के राज्यपाल, महाराष्ट्र सरकार तथा भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर आरोप लगाया और कहा कि इन सबने मिलकर कर्नाटक में लोकतंत्र की हत्या की है।

भाजपा ने सरकार गिराने के लिए विधायकों को मोटी रकम देने तथा मंत्री पद देने का लालच देकर यह यह नाटक कराया है। उसने विधायकों को अपने पक्ष में करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय तथा आयकर विभाग का भी इस्तेमाल किया और सरकार गिराने के लिए केंद्र की सत्ता का दुरुपयोग किया।

वेणुगोपाल ने कहा कि उनके पास वीडियो है जिसमें भाजपा नेता विधायकों को पैसा देकर गठबंधन सरकार गिराने के लिए कह रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी तथा जनता दल (एस) की सरकार ने न सिर्फ सदन में बल्कि उच्चतम न्यायालय में तथा गलियों में प्रदर्शन कर खरीद फरोख्त का डटकर मुकाबला किया है। उन्होंने कहा कि इस दौरान जो विधायक और कार्यकर्ता पार्टी के साथ जुडे रहे हैं और राजनीतिक नैतिकता की लडाई लड़ते रहे हैं वे सब अपार सम्मान के पात्र हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि इस लडाई में संख्या के बल पर भाजपा भले ही जीत गई है लेकिन कांग्रेस तथा जनता दल को इसमें नैतिक जीत हासिल हुई है।