‘ऑपरेशन पी-हंट’ में 150 विशेष टीमों ने की राज्यव्यापी कार्रवाई, 212 डिजिटल डिवाइस जब्त; 135 मामले दर्ज
तिरुवनंतपुरम। बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी अवैध सामग्री को इंटरनेट पर प्रसारित करने वालों के खिलाफ केरल पुलिस ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया है। ‘ऑपरेशन पी-हंट’ के तहत राज्यभर में 398 संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। कार्रवाई में आठ लोगों को गिरफ्तार करने के साथ मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, मेमोरी कार्ड सहित 212 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।
केरल पुलिस के साइबर विंग के इस अभियान में जिला पुलिस प्रमुखों की निगरानी में गठित 150 विशेष जांच टीमों को लगाया गया था। इन टीमों में साइबर सेल के पुलिसकर्मी, तकनीकी विशेषज्ञ और महिला पुलिसकर्मी भी शामिल रहे। पुलिस ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री (CSEAM) को रखने, बेचने अथवा प्रसारित करने के संदिग्ध मामलों के साथ बार-बार इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों को भी जांच के दायरे में लिया।
सोशल मीडिया से क्लाउड स्टोरेज तक पहुंची जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार ऐसी गैरकानूनी सामग्री के प्रसार के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और क्लाउड स्टोरेज सेवाओं का इस्तेमाल किए जाने के संकेत मिले हैं।
पुलिस जांच में कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर मैलवेयर के जरिए नाबालिगों के वेबकैम तक पहुंच बनाने और उनकी निजी जानकारियां हासिल करने का प्रयास किया गया। इसके बाद साइबर पुलिस की Countering Child Sexual Exploitation (CCSE) टीम ने आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल सुरागों का विश्लेषण कर संदिग्धों की पहचान की।
135 मामले दर्ज, जब्त उपकरणों की होगी फॉरेंसिक जांच
राज्यव्यापी कार्रवाई के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत 135 मामले दर्ज किए गए। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत 70 रिपोर्ट तथा नौ सोशल बैकग्राउंड रिपोर्ट भी तैयार की हैं। छापेमारी में बरामद मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, मेमोरी कार्ड और अन्य डिजिटल उपकरणों को विस्तृत फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि उपकरणों से मिलने वाले डिजिटल साक्ष्यों की जांच के आधार पर कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है और आगे अन्य गिरफ्तारियां भी संभव हैं।
डिजिटल सुरागों से संदिग्धों तक पहुंची पुलिस
केरल पुलिस की CCSE इकाई ऑनलाइन बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की पहचान के लिए साइबर टिपलाइन, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल सूचनाओं का विश्लेषण करती है। संदिग्धों तक पहुंचने के लिए आईपी एड्रेस, ईमेल, फोन नंबर और इस्तेमाल किए गए उपकरणों से जुड़ी तकनीकी जानकारियों की जांच की जाती है।
केरल पुलिस लंबे समय से ‘ऑपरेशन पी-हंट’ के जरिए बच्चों से संबंधित यौन शोषण सामग्री को ऑनलाइन रखने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। इसी साल फरवरी में चलाए गए पी-हंट 26.1 अभियान में भी 15 लोगों को गिरफ्तार कर 100 एफआईआर दर्ज की गई थीं और 243 डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे।
संदिग्ध ग्रुप या चैनल दिखे तो पुलिस को दें सूचना
पुलिस ने आम लोगों से भी ऑनलाइन बच्चों के यौन शोषण के खिलाफ अभियान में सहयोग करने की अपील की है। किसी सोशल मीडिया ग्रुप, चैनल या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित गैरकानूनी सामग्री दिखाई देने पर उसे आगे शेयर करने के बजाय तत्काल पुलिस के CCSE सेंटर अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर रिपोर्ट करने को कहा गया है।



