खरगोन : नाबालिग को फिल्मों में काम दिलाने का झांसा देने के आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज

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खरगोन। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के मंडलेश्वर स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय ने महेश्वर थाना क्षेत्र की एक नाबालिग बालिका को फिल्मों में काम दिलाने का झांसा देकर भगाने और उससे विवाह करने के आरोपी मोहम्मद फरमान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। विशेष न्यायाधीश रवि जारोला ने मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आरोपी को अग्रिम जमानत दिए जाने का आधार नहीं बनता।

अभियोजन के अनुसार महेश्वर थाने में उत्तरप्रदेश के बागपत जिले के निवासी मोहम्मद फरमान के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 81, 83 और 87, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्रकरण दर्ज है।

शिकायत के अनुसार 25 मार्च 2026 को पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया था कि आरोपी उनकी नाबालिग पुत्री को फिल्मों में काम दिलाने का झांसा देकर केरल ले गया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने पीड़िता से विवाह कर लिया था।

अभियोजन ने न्यायालय को बताया कि उपलब्ध जन्म संबंधी दस्तावेजों के अनुसार पीड़िता की जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 है, जबकि आरोपी की ओर से प्रस्तुत जन्म प्रमाण-पत्र की प्रामाणिकता पर प्रश्न उठाए गए। अभियोजन ने यह भी कहा कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और उसके फरार रहने के कारण साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका है।

बचाव पक्ष ने दावा किया कि पीड़िता अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी, उसने स्वयं को बालिग बताया था तथा दोनों ने सहमति से विवाह कर उसका पंजीयन भी कराया था। बचाव पक्ष ने प्रकरण को झूठा बताया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि पीड़िता की वास्तविक आयु का निर्धारण साक्ष्यों के आधार पर विचारण के दौरान किया जाएगा। उपलब्ध दस्तावेजों, प्रकरण डायरी और जांच की स्थिति को देखते हुए न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 482 के तहत दायर आरोपी की प्रथम अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।