चांद दिखाई देने के साथ ही ख्वाजा के सालाना उर्स का विधिवत आगाज

अजमेर। राजस्थान के अजमेर में दरगाह कमेटी के अधीन हिलाल कमेटी ने अब से कुछ देर पहले रजब माह के चांद दिखाई देने का ऐलान कर दिया। इसी के साथ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 810वें सालाना उर्स का विधिवत आगाज हो गया।

चांद के दीदार के लिए हिलाल कमेटी की बैठक दरगाह नाजिम के यहां हुई जिसमें चांद की पुष्टि होने पर शहर काजी तौसीफ अहमद सिद्दीकी ने चांद के दीदार का एलान किया।

चांद दिखाई देने की घोषणा के साथ ही रोशनी से नहाई दरगाह शरीफ के शाहजहांनी दरवाजे से शादियाने बजाय गए और बड़े पीर साहब की पहाड़ी से तोपे दागी गई। अब दरगाह शरीफ में परंपरा अनुसार धार्मिक रस्में शुरू कर दी गई जिसके तहत रात्रि में पहली महफिल होगी।

शहर काजी के अनुसार आठ फरवरी को छह रजब और 11 फरवरी को नौ रजब की तारीख रहेगी। दौराने उर्स दो जुम्मे पड़ेंगे जिसमें चार एवं ग्यारह तारीख को जुम्मे की नमाज अदा की जाएगी। आठ फरवरी को छठी का कुल जिसे छोटा कुल कहा जाता है तथा ग्यारह फरवरी को नवी का कुल बड़े कुल के रूप में होगा और उर्स संपन्न हो जाएगा।

महरौली से आए कलंदरों के जत्थे ने दिखाये हेरतअंगेज करतब

अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 810वें सालाना उर्स में दिल्ली के महरौली से आए कलंदरों एवं मलंगों के जत्थे ने पूरे उत्साह, अकीदत के साथ हैरतअंगेज करतब दिखाते हुए दरगाह शरीफ में छड़ी पेश की।

अजमेर में ऋषि घाटी स्थित चिल्ले वाले बाबा के यहां से मलंगों एवं कलंदरों का जुलूस सायं पांच बजे दरगाह की ओर ढोल धमाकों, ताशों के साथ निकला जिसका नेतृत्व कलंदरों के सरगिरोह उत्तराखंड निवासी चमन अली ने किया।

500 से ज्यादा कलंदर हाथों में झंडे लिए ख्वाजा साहब की शान में उनके नाम को बुलंद करते हुए बढ़े और पूरे रास्ते हैरतअंगेज करतब दिखाए। दरगाह पहुंचने पर दरगाह कमेटी और अंजुमनों की ओर से कलंदरों व मलंगों की अगवानी की गई। रोशनी से पहले ही उन्होंने छड़ी पेश कर दुआ की।

इधर, अजमेर जिला प्रशासन भी अब कोरोना नियमों के बावजूद उर्स की पूरी तैयारी में जुटा है। जिला कलेक्टर अंशदीप ने सभी विभागों को उर्स मे माकूल व्यवस्था के निर्देश दिए है। पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा ने बताया कि पूरे उर्स के दौरान दरगाह मेला क्षेत्र व कायड़ विश्राम स्थली में पांच हजार पुलिकर्मी तैनात किए जा रहे है।