कोटा के कोचिंग संचालकों ने किया चंबल नदी में जल सत्याग्रह

कोटा। राजस्थान में कोटा के हॉस्टल संचालकों ने आज चंबल नदी में जल सत्याग्रह करके कोटा के बंद पड़े विभिन्न कोचिंग संस्थानों में शैक्षणिक कार्य तुरंत शुरू कराने की मांग की।

कोटा की कुछ हॉस्टल संचालक सुबह कोटा में बैराज की अपस्ट्रीम पर स्थित भीतरिया कुंड पहुंचे और वहां चंबल नदी में खड़े होकर जल सत्याग्रह शुरू कर दिया। उन्होंने अपने हाथों में तख्तियां भी ली हुई थी जिसमें कोटा की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कोचिंग संस्थानों को तुरंत शुरू करने की राज्य सरकार से मांग की है।

कोचिंग संस्थानों के संचालकों का कहना है कि इस बारे में वह कल ही मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन भेज चुके हैं लेकिन कोटा में कोचिंग संस्थान कब शुरू होंगे, इस बारे में अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।

कोचिंग हॉस्टल संचालकों का कहना है कि कोटा में उद्योग धंधों के बंद होने के बाद कोचिंग संस्थान ही यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी बने हुए हैं और कोविड-19 के प्रकोप के बाद जब से कोटा में कोचिंग संस्थान बंद हुए हैं तब से इन संस्थानों से जुड़े अन्य कारोबार जैसे हॉस्टल, मैस, होटल, रेस्टोरेंट, नगरीय परिवहन आदि व्यवसाय पर भी जबरदस्त प्रतिकूल असर पड़ा है, जिसके चलते हजारों लोगों को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा है। इससे कोटा की आर्थिक व्यवस्था डगमगा गई है और लोग वापस अपने घरों को पलायन करने के लिए मजबूर हुए हैं।

कुछ हॉस्टल संचालकों का कहना है कि यदि कोचिंग संस्थान शुरू नहीं किए और बाहर से छात्रों का कोटा आना शुरू नहीं हुआ तो यहां के हॉस्टल संचालक गंभीर आर्थिक संकट में पड़ जाएंगे क्योंकि ज्यादातर हॉस्टल संचालकों ने बैंकों सहित विभिन्न वित्तीय संस्थानों से ऋण लेकर हॉस्टल बनाए हैं, लेकिन कोचिंग छात्रों के अपने राज्यों में लौट जाने के बाद हॉस्टलों पर ताले लग गए हैं। जिससे संचालक करोड़ों रुपए के कर्जे के बोझ तले दबते जा रहे हैं और उनके सामने परिवार की भरण पोषण की समस्या खड़ी हो गयी है।

हॉस्टल संचालकों ने मुख्यमंत्री से पुनः गुहार लगाई है कि कोटा के कोचिंग संस्थानों को फिर से शुरू किया जाए क्योंकि यह कोचिंग संस्थान ही कोटा की पहचान बन चुके हैं और समूचे देश में कोटा को कोचिंग सिटी के रूप में भी जाना जाता है।