मुंबई। अभिनेत्री, लेखिका और एडवेंचर लवर कुब्रा सैत ने अपने लिए एक नई चुनौती स्वीकार करते हुए पीरियड्स के दौरान अपनी पहली Via Ferrata Summit चढ़ाई पूरी की। इस अनुभव को उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीरों और एक भावनात्मक पोस्ट के जरिए साझा किया। कुब्रा ने बताया कि यह सफर शारीरिक रूप से आसान नहीं था, लेकिन इसी चुनौती ने उन्हें शरीर की अनुकूलन क्षमता, मानसिक मजबूती और अपने ऊपर भरोसा रखने का एक नया सबक दिया।
‘Sacred Games’ और ‘Farzi’ जैसी चर्चित वेब सीरीज में अपने अभिनय से पहचान बना चुकीं कुब्रा सैत का एडवेंचर से पुराना रिश्ता रहा है। वह पहले भी पर्वतारोहण और अलग-अलग रोमांचक गतिविधियों में हिस्सा ले चुकी हैं। ऐसे में इस बार उन्होंने अपने अनुभव को केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि के तौर पर नहीं देखा, बल्कि इसे खुद को चुनौती देने और मानसिक सीमाओं से आगे निकलने के अनुभव के रूप में पेश किया।
पीरियड्स के दौरान चढ़ाई ने बढ़ाया आत्मविश्वास
कुब्रा ने बताया कि उन्होंने पहली बार Via Ferrata Summit उस समय पूरा किया, जब वह पीरियड्स से गुजर रही थीं। उनके मुताबिक, यह बात अपने आप में कोई असाधारण उपलब्धि हो या न हो, लेकिन इस अनुभव ने उन्हें अपने शरीर के प्रति एक अलग तरह की कृतज्ञता महसूस कराई।
उन्होंने अपने पोस्ट में शरीर के बदलते हालात के साथ उसके सामंजस्य बैठाने की क्षमता पर बात की। उनके अनुसार, मुश्किल परिस्थितियों में शरीर और दिमाग जिस तरह प्रतिक्रिया देते हैं, वह अपने आप में सीखने वाली बात है।
कुब्रा ने इस अनुभव को महिलाओं के लिए किसी ‘सीमा’ की तरह पेश करने के बजाय यह बताने की कोशिश की कि हर व्यक्ति को अपनी शारीरिक स्थिति और क्षमता को समझते हुए चुनौतियों का सामना करना चाहिए।
‘अपने कदमों पर भरोसा रखिए’
कुब्रा की पोस्ट का सबसे चर्चित संदेश रहा—’अपने कदमों पर भरोसा रखिए।’
उन्होंने लिखा कि लोग बदलाव के बारे में बहुत बात करते हैं, बदलाव की तैयारी करते हैं और उसे समझने की कोशिश करते हैं, लेकिन वास्तविक बदलाव तब आता है जब इंसान अपने परिचित और सुरक्षित दायरे से बाहर निकलकर ऐसी चुनौती स्वीकार करता है, जिसका उसने पहले सामना नहीं किया हो।
उनके मुताबिक, कठिन परिस्थितियों से बचना स्वाभाविक है। शायद ही कोई व्यक्ति खुद से कहे कि उसे और मुश्किलें चाहिए। लेकिन अनिश्चितता और कठिन अनुभव ही व्यक्ति को भीतर से बदलने और मजबूत बनाने का काम करते हैं।
मुश्किल काम चुनना भी एक तरह की तैयारी
कुब्रा ने अपने अनुभव से यह सवाल भी उठाया कि जब जिंदगी में मुश्किलें बिना किसी चेतावनी के आ सकती हैं तो क्यों न इंसान कभी-कभी अपनी इच्छा से भी कठिन अनुभवों को चुने।
उनका मानना है कि जानबूझकर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना भविष्य में आने वाली अनिश्चितताओं से निपटने के लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार कर सकता है। हर बार जब कोई व्यक्ति उस काम को पूरा करता है, जिसे वह पहले अपने लिए असंभव समझता था, तो उसके भीतर यह विश्वास मजबूत होता है कि वह कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकता है।
69 वर्षीय गाइड से मिली एक और सीख
कुब्रा ने अपने अनुभव में अपने 69 वर्षीय माउंटेन गाइड का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके गाइड पिछले 43 वर्षों से पर्वतारोहण कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जिस पहाड़ी रास्ते को देखकर उन्हें चुनौती काफी कठिन और डरावनी लग रही थी, उस रास्ते को छोटे बच्चे भी पहले पूरा कर चुके हैं।
इस अनुभव ने उन्हें महसूस कराया कि कई बार वास्तविक चुनौती से ज्यादा बड़ा हमारा डर होता है। किसी अनजान रास्ते को पहली बार देखते समय वह जितना कठिन दिखाई देता है, उसे पूरा करने के बाद वही अनुभव व्यक्ति के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा सकता है।
एडवेंचर से पुराना नाता
कुब्रा सैत के लिए पर्वतारोहण कोई नया अनुभव नहीं है। इससे पहले वह किलिमंजारो के उहुरू पीक तक भी चढ़ाई कर चुकी हैं। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने पर्वतारोहण को बाहरी उपलब्धि से ज्यादा भीतर की यात्रा बताया था। उनके अनुसार, पहाड़ पर चढ़ते समय व्यक्ति का ध्यान बाहरी दुनिया से हटकर खुद पर केंद्रित हो जाता है।
2017 में उन्होंने अपने दोस्त के साथ Stok Kangri की चढ़ाई का अनुभव भी साझा किया था। उस दौरान उन्होंने कठिन मौसम, ऊंचाई, ठंड और बदलती परिस्थितियों के बीच पर्वतारोहण किया था। उन्होंने उस अनुभव से यह सीख साझा की थी कि किसी भी शिखर पर हमेशा नहीं रहा जा सकता—चढ़ाई के बाद नीचे उतरना भी जरूरी है और जिंदगी में आगे भी नई चोटियां सामने आती रहती हैं।
महिलाओं के लिए भी खास संदेश
कुब्रा की इस पोस्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू मासिक धर्म से जुड़ी सामाजिक धारणाओं पर भी जाता है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव के जरिए यह दिखाया कि पीरियड्स के दौरान शरीर की स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन इसे हर महिला के लिए एक समान सीमा मानना सही नहीं है।
हालांकि, उनकी पोस्ट का उद्देश्य यह कहना नहीं है कि हर महिला को पीरियड्स के दौरान शारीरिक रूप से कठिन गतिविधियां करनी ही चाहिए। बल्कि उनका जोर अपने शरीर को समझने, परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने और अपनी क्षमता पर भरोसा रखने पर है।
‘मुश्किल काम कीजिए, खुद का नया रूप मिलेगा’
कुब्रा ने अपनी पोस्ट का अंत भी प्रेरक संदेश के साथ किया। उन्होंने लोगों से कहा कि चुनौतीपूर्ण रास्तों से हमेशा बचने के बजाय कभी-कभी उन्हें स्वीकार करना चाहिए। उनका संदेश है कि पहाड़ पर चढ़िए, अपने कदमों पर भरोसा रखिए और कठिन काम करने की कोशिश कीजिए।
उनके मुताबिक, संभव है कि किसी कठिन चुनौती को पूरा करने के बाद व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व का ऐसा रूप देखने को मिले, जिसके बारे में उसने पहले कभी सोचा भी न हो।
कुब्रा का यह अनुभव इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने एक निजी और शारीरिक अनुभव को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे आत्मविश्वास, अनुकूलन क्षमता और चुनौतियों से मुकाबला करने के व्यापक संदेश से जोड़ दिया है।



