वाजपेयी के निधन से लता मंगेशकर दुखी, आडवानी को खलेगी कमी

मुंबई। स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि उन्हें वैसा ही दुख हुआ जैसा उनके पिता के स्वर्गवास के समय हुआ था।

सुश्री मंगेशकर ने अपने शोक संदेश में कहा कि ऋषि तुल्य पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी के स्वर्गवास की खबर सुनकर मुझे ऐसे लगा जैसे मेरे सिर पर पहाड़ टूटा पड़ा, क्योंकि मैं उनको पिता समान मानती थी और उन्होंने मुझे अपनी बेटी बनाया था।

प्रख्यात गायिका ने कहा कि मुझे वह इतने प्यारे थे कि मैं उनको दद्दा कह कर बुलाती थी। आज मुझे वैसा दुख हुआ है जैसा मेरे पिता के स्वर्गवास के समय हुआ था। उन्होंने वाजपेयी की आत्मा को शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

दक्षिण भारत के सुपरस्टार रजनीकांत ने वाजपेयी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह यह समाचार सुनकर बहुत दुखी हैं। देश ने एक महान नेता खो दिया।

वाजपेयी की कमी बहुत खलेगी : आडवाणी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निकट सहयोगी रहे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने आज कहा कि उन्हें श्री वाजपेयी की कमी बहुत खलेगी। वाजपेयी के पूरे सार्वजनिक जीवन के दौरान अभिन्न सहयोगी एवं घनिष्ठ मित्र रहे आडवाणी ने अपने संदेश में कहा कि मेरे पास अपना गहरा दुख और शोक व्यक्त करने के लिए आज शब्द नहीं हैं।

देश के सबसे कद्दावर राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर हम सभी शाेकाकुल हैं। मेरे लिए अटल जी मेरे वरिष्ठ सहयोगी से अधिक थे और वास्तव में वह 65 साल से अधिक समय तक मेरे घनिष्ठतम मित्र रहे।

पूर्व उपप्रधानमंत्री ने लिखा कि मैं उनके साथ लंबे समय तक काम करने के दौरान की यादें हैं, जब हम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक थे, जब हम भारतीय जनसंघ में आए, आपातकाल के काले समय में संघर्ष से लेकर जनता पार्टी के गठन और बाद में 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के समय तक।

उन्होंने कहा कि वाजपेयी को केन्द्र में पहली गैर कांग्रेसी स्थिर सरकार बनाने के लिए भी याद किया जाएगा और मुझे छह साल तक उनके डिप्टी के रूप में काम करने का अवसर मिला। मेरे वरिष्ठ के रूप में उन्होंने हमेशा मुझे हर प्रकार से प्रोत्साहित किया और दिशा निर्देशित किया।

उनके अदभुत नेतृत्व गुण, चकित करने वाली वक्तृत्व कला, प्रखर राष्ट्रभक्ति और उससे भी बढ़कर उनकी खरी मानवीय भावनाएं जैसे स्नेह, विनम्रता और वैचारिक विरोधाभासों के बावजूद मतभेदों से पार निकलने की उनकी विलक्षण क्षमता का मुझ पर और मेरे पूरे सार्वजनिक जीवन में पड़ा। आडवाणी ने कहा कि मुझे अटल जी की कमी बहुत खलेगी।

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