किसके फायदे में है सिरोही का ये पोलिंग ट्रेंड!

सबगुरु न्यूज  सिरोही
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सबगुरु न्यूज-सिरोही। जिले में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनावों के तीन चरण बुधवार को खतम हो गए। 4 सितम्बर को मतगणना होगी। तीन चरणों में जिले की आबूरो, रेवदर, सिरोही, पिण्डवाड़ा और शिवगंज पंचायत समितियों में जिला परिषद के 21 प्रत्याशियों के साथ पांचों पंचायत समिति के पंचायत समिति सदस्यों के लिए भी मतदान हुआ।

मतदान के दौरान जो स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई दे रही थी आंकड़ों में वहीं बाहर आई। पांचों पंचायत समितियों में चुनाव के दौरान वो उत्साह नदारद था जो इससे पहले ग्रामीण चुनावों में देखने को मिला था। जिले में तीन चरणों में हुए इन मतदानों में कुल 55.12 प्रतिशत मतदान होना इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि जो दृश्य फील्ड में दिख रहा था वहीं आंकड़ों में है।

आम चुनावों से ये पोलिंग प्रतिशत करीब दस से पंद्रह प्रतिशत कम है। मतदाताओं की ये कमी किसके फायदे में होगी और किसके नुकसान में ये इस मतदान की कमी की वजह जानने में उजागर हो पाएगी।
-गिरावट की बताई जा रही है ये वजह
सबगुरु न्यूज को ग्रामीणों ने मतदान दिवस पर अधिकांश गांवों में पोलिंग के प्रति उत्साह की कमी की जो वजह बताई वो ये थी कि इस बार जिले में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव सरपंचों के लिए चुनावों के साथ नहीं होना है। जिले में सरपंचों के चुनाव पिछले वर्ष हो चुके हैं।

न्यायालय में अटके होने के कारण इनमें देरी हुई। सरपंच के चुनावों के दौरान सरपंच पद प्रत्याशी जीतने के लिए प्रवासियों को लाते हैं। गांवों में बसें भर भर कर प्रवासी आते हैं। इस बार इसमें करीब अस्सी प्रतिशत तक कमी दिखी।
-ये पोलिंग टेंड बता रहा है प्रवासी फेक्टर
पोलिंग में प्रवासी फेक्टर को समझने के लिए वर्तमान में पंचायत समितिवार पोलिंग प्रतिशत पर एक नजर डालनी जरूरी है। सबसे ज्यादा 63.48 प्रतिशत पोलिंग पिण्डवाड़ा में हुई। इसके बाद आबूरोड में 58.31, शिवगंज में 56.50, सिरोही में में 51.07 तथा रेवदर में 50. 22 प्रतिशत मतदान हुआ। अब प्रवासियों के लिहाज से देखा जाए तो सिरोही जिले की इन पांच पंचायत समितियों में सिरोही और रेवदर में सबसे ज्यादा लोग दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए बसे हैं।

इसके बाद शिवगंज के सिरोही से सटे इलाके में। रोजगार के पर्याप्त अवसर और कुछ आदिवासी जनसंख्या होने के कारण आबूरोड में तथा दो तिहाई आदिवासी आबादी वाली पिण्डवाड़ा पंचायत समिति में परदेस जाकर कमाने की परंपरा काफी कम है। ये आंकड़े इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि प्रवासियों के कम आगमन के कारण भी पोलिंग प्रतिशत गिरी है।
-एक फेक्टर ये भी
पोलिंग प्रतिशत कम होने का दूसरा जो फेक्टर सामने आया है वो प्रधान की सीट के आरक्षण का है। पांचों पंचायत समितियों में सिर्फ पिण्डवाड़ा पंचायत समिति की सीट सामान्य पुरुष पद के लिए आरक्षित है। इसके अलावा रेवदर की ओबीसी, आबूरोड की एसटी, सिरोही की एससी व शिवगंज का प्रधान पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है।

पोलिंग टें्रड में भी पिण्डवाड़ा में सबसे ज्यादा पोलिंग इस बात की ओर इशारा कर रही है कि मुख्य पद सामान्य वर्ग के पुरुषों के लिए आरक्षित होने पर भी पोलिंग के प्रति उत्साह रहता है। जिले में प्रवासी वोट बैंक भाजपा के कोर वोटर हैं। ऐसे में भाजपा के प्रत्याशियों ने स्थानीय मुद्दों और यहां रहने वाले लागों को रिझाने में मेहनत की होगी तो बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं।