अतिक्रमियों का ये उबाल, सिरोही का सुप्रीम कोर्ट में करवा न दे खोरी जैसा हाल!

माउण्ट आबू में इसी वर्ष मई में माउण्ट आबू वन्यजीव अभयारण्य में बनाए गए अग्नेश्वर महादेव मंदिर से अतिक्रमण हटाने के बाद एकत्रित लोग।
माउण्ट आबू में इसी वर्ष मई में माउण्ट आबू वन्यजीव अभयारण्य में बनाए गए अग्नेश्वर महादेव मंदिर से अतिक्रमण हटाने के बाद एकत्रित लोग।

सबगुरु न्यूज-सिरोही। हरियाणा के चक्करपुर खोरी गांव की तरह क्या राजस्थान पर भी अब सुप्रीम कोर्ट की भृकुटी तनेगी। माउण्ट आबू में जंगल में अतिक्रमियों की वहां के डीएफओ के खिलाफ एफआईआर करवाना माउण्ट आबू के अतिक्रमियों को भारी पडऩे वाला है।

गत वर्ष माउण्ट आबू में अग्नेश्वर महादेव मंदिर में अतिक्रमण हटाने के दौरान गए वन विभाग के दल के साथ बहस हुई थी। इसके बाद कथित प्रशासनिक, राजनीतिक और धार्मिक दबाव में डीएफओ समेत माउण्ट आबू वन्यजीव अभयारण्य के कार्मिकों के खिलाफ एससीएसटी एक्ट में प्रकरण दर्ज कर लिया था।

मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में वनकर्मियों द्वारा अतिक्रमण हटाने के दौरान उनके खिलाफ कार्रवाई करने का माउण्ट आबू का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी उठा।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से वन विभाग की जमीनों पर कब्जे के प्रकरणों को अपने यहां मंगवा लिया है। माउण्ट आबू वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में भी ऐसे अतिक्रमणों की सूची सुप्रीम कोर्ट भेजी गई है।
-148 अतिक्रमणों की सूची
महाराष्ट्र की एक एजेंसी के द्वारा टी एन गोदावर्मन बनाम भारत सरकार की एक रिट पर माउण्ट आबू डीसीएफ बालाजी करी पर 23 मई, 2020 को दर्ज करवाई गई एफआईआर का भी जिक्र किया गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस एफआईआर की अग्रिम कार्रवाई पर तो रोक लगा दी।
इसकी जांच राज्य सरकार ने सिरोही के पूर्व एएसपी से करवाकर संपूर्ण प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में भेजा। इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों से वन क्षेत्र की भूमि पर हुए अतिक्रमणों की सूची मंगवा ली है। माउण्ट आबू वन्यजीव अभयारण्य कार्यालय से भेजी गई सूची में 148 अतिक्रमणों के नाम हैं।
-जिले की इन पंचायत समितियों में है ये अतिक्रमण
माउण्ट आबू वन्यजीव अभयारण्य द्वारा भेजी गई सूची में अभयारण्य के बीच और इसकी सीमा पर स्थिति पंचायत समितियों के गांवों में किए गए अतिक्रमण भी शामिल हैं। इसमें माउण्ट आबू के अंदर ओरिया, सालगांव ग्राम पंचायतों में किए गए अतिक्रमण के अलावा नगर परिषद सीमा में पडऩे वाली वन भूमि पर किए गए अतिक्रमणों के नाम भी मय जीपीएस लोकेशन के शामिल हैं। इसके अलावा आबूरोड, अनादरा, तलहटी के अतिक्रमण भी शामिल हैं।

माउण्ट आबू में इसी वर्ष मई में माउण्ट आबू वन्यजीव अभयारण्य में बनाए गए अग्नेश्वर महादेव मंदिर से अतिक्रमण हटाने के बाद उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन देते लोग।
माउण्ट आबू में इसी वर्ष मई में माउण्ट आबू वन्यजीव अभयारण्य में बनाए गए अग्नेश्वर महादेव मंदिर से अतिक्रमण हटाने के बाद उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन देते लोग।

-फिर भी नहीं सुधरे अतिक्रमी
वन विभाग के अधिकारियों के द्वारा अतिक्रमण हटाने के दौरान उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज करवाने या हमला करने के मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद भी अतिक्रमियों के हौंसले रुके नहीं।
इसी साल मई को फिर से माउण्ट आबू में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद वन विभाग के अधिकारियों को घेरने की कोशिश की गई। इसके बाद वर्तमान डीसीएफ के खिलाफ भी एफआईआर माउण्ट आबू थाने में दी गई।
वन क्षेत्र में अवैध खनन पर कार्रवाई करने पर पूर्व डीसीएफ केजी श्रीवास्तव को ब्रह्माकुमारी संस्थान के आसपास के क्षेत्र में कार्रवाई के बाद इसी तरह से परेशान किये जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
यदि सुप्रीम कोर्ट इन अतिक्रमणों पर खोरी गांव की तरह ही खफा होता है तो माउण्ट आबू वन्यजीव अभयारण्य में किए अतिक्रमिणों पर उसकी गाज गिरना तय है।
इनका कहना है…
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में वन भूमि में किए गए अतिक्रमणों की सूची मांगी थी। माउण्ट आबू वन्यजीव अभयारण्य द्वारा भी ऐसी अतिक्रमणों की सूची मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट की मांग पर ये सूची वहां भेज दी गई है।
विजयशंकर पांडे
डीसीएफ, वन्यजीव अभयारण्य, माउण्ट आबू।