संयम लोढ़ा ने उठाई माउंट आबू की समस्या, एसडीएम का ‘एकाधिकार’ तोड़ेगी सरकार

sanyam lodha
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सबगुरु न्यूज- माउंट आबू।  माउंट आबू उपखंड अधिकारी गौरव सैनी और नगर परिषद प्रशासन के बीच की जंग अंततः विधानसभा में पहुंच गई।  सिरोही विधायक संयम लोढ़ा ने सोमवार को विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत माउंट आबू के लोगों की समस्या को उठाया। इस पर स्वायत्त शासन मंत्री ने माना कि एसडीएम को इतना अधिकार दिया जाना भी ठीक नहीं है। उन्होंने एसडीएम के एकाधिकार को कम करने के आदेश निकलवाने का आश्वासन सदन में दिया।

सिरोही विधायक संयम लोढ़ा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिये विधानसभा में माउंट आबू के बिल्डिंग बायलॉज 2019 के तहत भवन निर्माण की स्वीकृति जारी करने और माउंट आबू में भवन मरम्मत के लिए निर्माण सामग्री के टोकन व्यवस्था लागू होने से फैल रहे भ्रष्टाचार पर सरकार का ध्यानाकर्षण करवाया।

विधायक लोढ़ा के प्रस्ताव पर जवाब देते हुए सरकार की तरफ से स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि इको सेंसेटिव का जोनल मास्टर प्लान बनाया जाना  था माउंट आबू में। इसके तहत ही माउंट आबू की मॉनिटरिंग कमेटी बना दी गई था। इस कमिटी के द्वारा ये तय किया गया था की इसमे एसडीओ को भी मेम्बर बनाया जाए।

उन्होंने बताया कि जब कमेटी भंग हो गई तो एसडीओ काम करता रहा। जो टोकन व्यवस्था उस कमेटी ने चालू की थी वही एसडीओ ने लगातार रखी। मंत्री ने कहा कि इसके बाद भी अवैध निर्माण होते रहे। मंत्री ने लोढ़ा की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि टोकन व्यवस्था से फैली अव्यवस्था को दूर करने के लिये वे भी इस व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव देवें।

लोढ़ा  ने अपने प्रस्ताव में बताय था कि 150 से ज्यादा भवन निर्माण की स्वीकृतियां अटकी हुई हैं।  मंत्री ने कहा कि सरकार भ्य मानती है कि इस व्यवस्था में सुधार तो होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुझाव के लिए विधायक लोढ़ा भी सुझाव देवें कि किस तरह से सुधार किया जा सकता है।

मंत्री ने लोढ़ा के प्रस्ताव में सिर्फ आठ लोगों को मरम्मत की स्वीकृति मिलने की बात का जवाब देते हुए कहा कि कई लोग मरम्मत की आड़ में ही निये निर्माण कर लेते हैं। मंत्री ने कहा कि 2009 में मोनिटरिंग कमेटी के होते हुए भी नये निर्माण हो गए, इसके लिए व्यवस्था ही जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा कि वे नहीं मानते की एक एसडीओ को ही सारे अधिकार दे दिए जाएं और एसडीओ ही सारे कार्य कर लेवे। इसमें सुधार तो किया जा सकता है।
इस पर लोढ़ा ने पूछा कि निर्माण स्वीकृतियों के लिए लंबित पत्रवलियाँ का कितने दिनों में निस्तारण कर दिया जाएगा। टोकन की आड़ में हुए अवैध निर्माणों की जांच करवाएगी।

लोढ़ा ने कहा कि नगर पालिका चुनावों के दौरान वन राज्य मंत्री ने टोकन प्रणाली को भ्रष्टाचार का माध्यम बताते हुए कांग्रेस का बोर्ड बनते ही इसे हटाने का आश्वासन दिया था। उन्होंने बताया कि 19 अगस्त 2019 को खुद मोनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष माउंट आबू एसडीओ को ये पत्र लिख चुके हैं कि ये टोकन सिस्टम अर्जेंट के लिए शुरू किया था। अब ये रेशनल नहीं है।

इस पर मंत्री ने कहा कि टोकन व्यवस्था खत्म करने के दुष्परिणाम होंगे। टोकन व्यवस्था से रेकर्ड मेंटेन रहता है। उन्होंने कहा कि एक अकेले एसडीओ को भी इतना अधिकार सम्पन्न नहीं बनाना चाहिए  क्योंकि मोटे तौर पर आदमी अफसरों के पास जाने से कतराता है और अफसर अपनी मर्जी के हिसाब से काम करने के आदि हो चुके हैं।

मंत्री ने माना कि नगर पालिका के चुनाव हो चुके हैं और भवन निर्माण के अधिकार सिर्फ नगर पालिका को है। उन्होंने कहा कि वे ये आदेश निकलवाने का प्रयास करेंगे कि जितने भी टोकन व्यवस्था के लिए कोई अप्लाई करता है तो उसका निर्णय अकेला एसडीओ माउंट आबू के साथ ईओ और इलेक्टेड चेयरमेन उसका फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि यदि 15 दिन में वो कमेटी फैसला नहीं करती है तो उसे परमिशन मान लिया जाएगा।
-दूसरी तरफ से भी घिरा एसडीएम का एकाधिकार
माउंट आबू के वर्तमान एसडीएम गौरव सैनी के कार्यकाल में माउंट आबू में टोकन व्यवस्था को लेकर विवाद ज्यादा गहरा गया है। विधानसभा में माउंट आबू एसडीएम के एकाधिकार की मनमानी को विधायक संयम लोढ़ा ने तो न्यायालय में माउंट आबू होटल एसोसिएशन ने घेर लिया है।

माउंट आबू होटल एसोसिएशन ने भी माउंट आबू एसडीएम कार्यालय के टोकन व्यवस्था की हठधर्मिता को चुनौती देते हुए इसे व्यवस्था को अवैधानिक बताया है।