लोकसभा चुनाव 2019 : जालोर में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला

Jalore-sirohi seat ratan dewasi vs devji patel
Jalore-sirohi seat ratan dewasi vs devji patel

जालोर। कांग्रेस का गढ़ रहे राजस्थान के जालौर संसदीय क्षेत्र में इस बार के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी सांसद देवजी एम पटेल और कांग्रेस उम्मीदवार एवं पूर्व विधायक रतन देवासी के बीच सीधा चुनावी मुकाबला होता नजर आ रहा है।

इस सीट से भाजपा लगातार चौथी जीत दर्ज करने के लिए चुनाव मैदान में उतरी है जबकि कांग्रेस फिर से राजनीतिक प्रभुत्व कायम करने के लिए अपनी ताकत झोंक रही है। यहां मतदान उन्नतीस अप्रेल को होगा।

चुनाव में कुल पन्द्रह उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें इन दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के अलावा राम राज्य परिषद पार्टी के कालूराम, बीएमयूपी के भंवर लाल, एपीओआई के रामप्रसाद जाटव, एसएचएस की विजयश्री तथा नौ निर्दलीय प्रत्याशी शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विदेशों में भारत की बढ़ी साख एवं गत फरवरी में आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बने माहौल एवं मोदी सरकार की उपलब्धियों के आधार पर भाजपा प्रत्याशी इस बार भी जीत का दावा कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार राज्य में उनकी सरकार एवं किसानों के कर्ज माफ एवं बेरोजगारों को भत्ता देने के साथ पूरे किए गए अन्य वादों एवं गहलोत सरकार की उपलब्धियां लेकर मतदाताओं के बीच जा रहे है।

अभी दोनों दलों के उम्मीदवारों के पक्ष में किसी बड़े नेता का चुनाव प्रचार नहीं हुआ है। मतदान में मात्र तेरह दिन शेष बचे हैं और शीघ्र ही स्टार प्रचारकों का चुनाव प्रचार होगा।

पटेल वर्ष 2009 एवं 2014 में दो बार लगातार लाेकसभा चुनाव जीत चुके हैं और इस बार जीत की तिकड़ी बनाने के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं। चुनाव जीतने के बाद जनता के बीच में कम आने को लेकर उनका विरोध भी हो रहा है जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को सिरोही से बागी होकर चुनाव लड़े संयम लोढ़ा की उनके करीब दो दर्जन समर्थकों के साथ पार्टी में वापसी का सहारा मिलने की उम्मीद है।

वहीं सांचौर से कांग्रेस विधायक सुखराम विश्नोई राज्य सरकार में मंत्री है और इस बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के चुनाव में संबंधित क्षेत्र के मंत्री की जिम्मेदारी तय करने के बयान के बाद विश्नोई की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हैं। ऐसे में कांग्रेस एकजुट नजर आने लगी है, जिसका रतन देवासी को फायदा हो सकता है।

देवासी जिले की रानीवाड़ा से 2008 में कांग्रेस विधायक रह चुके हैं और उन्हें उप मुख्य सचेतक भी बनाया गया। राजनीतिक प्रभुत्व एवं इस बार जिले में बदलते हालात के कारण लोकसभा चुनाव में उनकी पटेल के साथ कड़ी टक्कर हो सकती है।

जालोर संसदीय क्षेत्र में जालौर, सिरोही, सांचौर, पिंडवाड़ा-आबू, रानीवाड़ा, आहोर, भीनमाल एवं रेवदर विधानसभा क्षेत्र आते हैं जहां पिछले विधानसभा चुनाव में छह विधानसभा क्षेत्रों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था जबकि सांचौर में कांग्रेस तथा सिरोही में निर्दलीय प्रत्याशी ने चुनाव जीता था।

जालोर में अब तक हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस सर्वाधिक नौ बार, भाजपा चार तथा जनता पार्टी, स्वतंत्र पार्टी एवं निर्दलीय ने एक-एक बार चुनाव जीता है। वर्ष 1952 में भवानी सिंह निर्दलीय, 1957 में सूरज रतन दमानी कांग्रेस, 1962 में हरीश चंद कांग्रेस, 1967 डी एन पाटोदिया स्वतंत्री पार्टी, 1977 में हुकमाराम जनता पार्टी, 1980 में वीरदा राम फुलवारिया कांग्रेस, 1984, 1991, 1998 एवं 1999 में सरदार बूटा सिंह कांग्रेस, कैलाश मेघवाल भाजपा, 1996 में परसाराम मेघवाल कांग्रेस, 2004 में सुशीला बंगारु भाजपा प्रत्याशी ने चुनाव जीता था।

जालोर से बूटा सिंह सबसे अधिक चार बार लोकसभा पहुंचे। इस सीट पर सात बार राज्य के बाहर के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की जिनमें पंजाब के बूटा सिंह (चार बार), कोलकाता के सूरज रतन, देवी चंद पाटोदिया एवं उत्तर प्रदेश की सुशीला बंगारु शामिल है।