कमलनाथ ने स्वीकार किया जनादेश, विपक्ष की भूमिका निभाएंगे

भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज कहा कि राज्य विधानसभा उपचुनाव में वे जनादेश को स्वीकार करते हैं और विपक्ष की भूमिका निभाएंगे।

कमलनाथ ने ट्वीट में लिखा है हम जनादेश को शिरोधार्य करते हैं। हमने जनता तक अपनी बात पहुंचाने का पूरा प्रयास किया। मैं उपचुनाव वाले क्षेत्रों के सभी मतदाताओं का भी आभार मानता हूँ। उम्मीद करता हूं कि भाजपा की सरकार किसानों के हितों का ध्यान रखेगी, युवाओं को रोजगार देगी, महिलाओं का सम्मान व सुरक्षा कायम रखेगी, प्रदेश के नव निर्माण के हमारे काम को आगे बढ़ाएगी, प्रदेश को विकास व प्रगति के पथ पर अग्रसर करेगी।

कमलनाथ ने कहा है कि हम जनादेश को स्वीकार कर विपक्ष का दायित्व निभाएंगे, प्रदेश हित और जनता के हित के लिए सदैव खड़े रहेंगे, संघर्षरत रहेंगे। इन परिणामों की हम समीक्षा करेंगे।

इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने उपचुनाव नतीजों के बीच इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के उपयोग पर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। उन्होंने यहां मीडिया से कहा कि अमरीका जैसे राष्ट्र में राष्ट्रपति के चुनाव में ईवीएम का उपयोग नहीं किया जाता है। उनका तर्क है कि ईवीएम में चिप लगी रहती है और उसे ‘हैक’ किया जा सकता है।

सिंह ने दावा करते हुए कहा कि मांधाता और नेपानगर जैसे विधानसभा उपचुनावों में कांग्रेस की पराजय जैसा कुछ नहीं था, लेकिन वहां भी कांग्रेस पराजित हुई है। इस तरह की और भी सीट हैं। इसलिए ईवीएम पर सवाल उठते हैं।

नवंबर दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद 17 दिसंबर 2018 को  कमलनाथ ने राज्य में 15 वर्षों के बाद कांग्रेस की सरकार बनने पर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

लगभग सवा साल बाद इसी वर्ष मार्च माह में कांग्रेस के लगभग 22 विधायकों ने बगावती तेवर दिखाते हुए विधायक पद से त्यागपत्र दे दिया और वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।

इन स्थितियों के बीच कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से 20 मार्च को त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद भी कांग्रेस को लगातार झटके लगते रहे और उसके कुल 26 विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर भाजपा का दामन थामा।

कांग्रेस ने 28 सीटों पर उपचुनाव में ‘बिकाऊ और टिकाऊ’ का मुद्दा जोरशोर से उठाने का प्रयास किया, लेकिन आज के नतीजों से प्रतीत होता है कि मतदाताओं ने कांग्रेस के मुद्दे को पूरी तरह नकार दिया है।