माघी पूर्णिमा : संगम में लाखों ने लगाई आस्था की डुबकी

प्रयागराज। मौनी अमावस्या के बाद माघी पूर्णिमा स्नान पर्व पर संगम की रेती पर आस्था का समंदर हिलोरें मारता दिखायी पड़ा जब लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगा कर अपने परिवार की सुख शांति की कामना की।

मेला क्षेत्र में लगातार दो गज की दूरी मुंह पर मास्क जरूरी लाउडस्पीकर पर गूंज रहा था लेकिन संगम पहुंचने वाले कोरोना से बेपरवाह आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। संगम क्षेत्र में भारतीय जन जीवन आध्यात्मिक चिंतन और विभिन्न संस्कृति की सरिता का संगम परिलक्षित हो रहा है।

माघी पूर्णिमा का स्नान श्रद्धालुओं ने भोर के चार बजे से ही हर-हर गंगे और हर-हर महादेव, जय मां गंगे का जाप करते त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य का लाभ प्राप्त करना शुरू कर दिया।

माघी पूर्णिमा स्नान से एक दिन पहले शुक्रवार से श्रद्धालुओं ने तीर्थराज प्रयाग में त्रिवेणी में परिचितों के शिविरों में डेरा डाल दिया था। त्रिवेणी के दोनो किनारे रात में एलईडी की सफेद दूधीया रोशनी से ऐसा जगमगा रही थी मानो सूर्य के प्रकाश से तिमिर का वजूद खत्म हो चला है। हालांकि सुबह हल्की ठंड महसूस हो रही थी लेकिन भगवान भास्कर के उदय होते ही संगम स्वर्णिम हो उठा और श्रद्धालुओं का रेला बढ़ गया।

भारत की आध्यात्मिक सांस्कृतिक सामाजिक एवं वैचारिक विविधताओं को एकता के सूत्र में पिरोने वाला माघ मेला भारतीय संस्कृति का द्योतक है। इस मेले में पूरे भारत की संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। अपने सिर पर गठरी और कंधे पर कमरी रखे विभिन्न वेशण्भूषाए भाषा वाले महिलायें, पुरूष, युवा, बच्चे और विकलांग सभी उम्र के लोगों का हुजूम आज देखने को मिला है।

देश एवं प्रदेश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं और गृहस्थ गांव की झोपड़ियां से लेकर महलों तक के लोग विभिन्न वेष-भूषाए बोल-चाल और रंगण्ढ़ंग के इस राष्ट्र की भावनात्मक एकता के प्रतीक प्रयागराज के कुम्भ में माघी पूर्णिमा पर आज बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, स्नानार्थियों ने सभी आठ घाटों पर स्नान कर माघी पूर्णिमा की गरिमा को बढ़ाया।

पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवान सीटी बजाकर स्नान कर चुके स्नानार्थियों से घाट खाली करने की अपील कर रहे थे लेकिन श्रद्धालु अपनी ही धुन में मां गंगा के गोद को छोड़ने को तैयार ही नहीं हो रहे थे। महिलाएं स्नान के बाद घाट पर ही पूजा-पाठ और दीप-दान करने में मश्गूल नजर आ रही थी।

घुड़सवार पुलिस के सिपाही भी सीटी बजाकर लोगों को इधर से उधर जाने की मनाही करते नजर आ रहे थे लेकिन सेल्फी लेने वालों पर उनके संदेशों का कोई फर्क पडता नजर नहीं आ रहा था। वे हटते तभी थे, जब उनका सेल्फी शाट पूरा हो जाता था।