महाशिवरात्रि राम के बिना अधूरी थी | सती बनी पार्वती

महाशिवरात्रि की कहानी : जी हां महाशिवरात्रि से आप सभी अवगत होंगे और हर साल हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है और इस अवसर पर महिलाएं और पुरुष दोनों ही उपवास रखते हैं और भगवान शिव की पूजा करते हैं भगवान शिव की अर्चना करते हैं और इस दिन मंदिरों पर बड़ी भीड़ लगी रहती है लोगों की आस्था मंदिरों को देख कर ही पता चल जाती है जिस प्रकार से मंदिर पर लोगों की कतारें लगी रहती हैं।

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लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है इसके लिए कई लोगों की अलग-अलग प्रकार की धारणाएं हैं और इसके पीछे कई अलग-अलग कहानियां भी हैं इसके चलते आज हम आप को महाशिवरात्रि की एक कहानी सुनाएंगे जिससे आपको यह पता चलेगा कि आखिर महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है तो चलिए बिना किसी देर करें कहानी को शुरू करते हैं सबसे पहले कहानी को शुरू करने से पहले जय भोले।

अब आपको बता दें जब भगवान राम वनवास में थे और जिस समय सीता उनसे बिछड़ गई थी तो श्री राम भगवान सीता को ढूंढते ढूंढते जंगल में भटक रहे थे तभी भगवान शिव और उनकी पत्नी सती की नजर उन पर पड़ी जो कि आकाश से उन पर नजर रखे हुए थे शिव ने सती को बताया था कि यह भगवान श्रीराम हैं तो सती ने कहा कि यह तो एकदम सामान्य मनुष्य जैसे दिखते हैं और अगर मैं मान भी लूं कि यह एक भगवान है।

sati-parvati-story-hindi
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तो यह अपनी पत्नी को जगह जगह क्यों ढूंढ रहे हैं अपनी शक्ति से अपनी पत्नी का पता क्यों नहीं लगा लेते भगवान शिव ने कहा यह सब श्री राम की लीला है और इसके जवाब में सती ने कहा कि मैं ऐसा नहीं मानती तो भगवान शिव ने कहा अगर तुम चाहो तो जाकर श्री राम की परीक्षा ले लो तो सती ने कहा ठीक है तभी सती अपना रूप सीता के रूप में बदलकर श्री राम के सामने आ गई लेकिन श्रीराम ने उन्हें देखते ही कहा कैसी है सती माता सती राम के मुंह से यह सुनकर चौंक गई और यह समझ गई कि हां यह सच में ही भगवान है।

यह कोई साधारण मनुष्य नहीं हो सकता लेकिन सती किस मुंह से शिव के पास जाती तो वह भगवान शिव के पास गई और जब भगवान शिव ने पूछा क्या तुम राम की परीक्षा ले आई तो सती ने कहा नहीं मुझे उसकी जरूरत नहीं पड़ी लेकिन भगवान शिव तो खुद अंतर्यामी थे भगवान वह सब जानते थे तो शिव भगवान सती की बात से आहत हुए और उन्होंने सती से धीरे-धीरे दूरियां बना ली।

इसके कुछ समय बाद एक आश्रम में कहीं भगवानों की पूजा और अर्चना हो रही थी तभी सती ने शिव से कहा कि मैं भी उस पूजा और अर्चना का हिस्सा बनना चाहती हूं तो शिव ने कहा ठीक है तो वहां जा सकती हो सती ने भगवान शिव की आज्ञा ली और उस आश्रम की ओर प्रस्थान किया लेकिन जब सती उस आश्रम में पहुंची तो सती को वहां पर भगवान शिव की किसी प्रकार की मूर्ति नजर नहीं आई इससे नाराज होकर सती ने वही अपनी आहुति अग्नि में दे दी।

इसके बाद श्री राम भगवान शिव के पास गए और बोले की है भगवान शिव सती अगले जन्म में पार्वती का रूप लेकर आपके सामने विवाह का प्रस्ताव बनकर आएगी और आपको उनसे विवाह करना है भगवान शिव ने इस बात से हामी भर दी और जब शिव और पार्वती का विवाह हुआ उस दिन को महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाने लगा।

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तो दोस्तों यह थी भगवान शिव की और राम की सती की कहानी जिसका महाशिवरात्रि से एक बहुत बड़ा संबंध बताया जाता है इस प्रकार की कई अनेक कहानियां हैं जो महाशिवरात्रि को दर्शाती है और इस महाशिवरात्रि को और भी ज्यादा उत्सुकता से भर देती है।

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