महंत नरेन्द्र गिरी को बाघम्बरी गद्दी मठ में दी गई भू-समाधि

प्रयागराज। साधु-संतों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी को बुधवार को श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी में भू-समाधि दी गई।

सुसाइड नोट में उनकी अंतिम इच्छा थी कि समाधी श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी पार्क में नीबू के पेड़ के पास गुरू जी के बगल दी जाए। अखाड़े के बड़े संत और महात्माओं ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उसी स्थान पर वेद मंत्रों के साथ सभी 13 अखाडों के बडे संत, महंत और साधु-सतों की उपस्थिति में भू-समाधि दी गई।

महंत को 12 फिट के गढ्ढे में तैयार गुप्त द्वारनुमा स्थान में सिद्ध योग मुद्रा में घंटे-घडियाल और मंत्रोचार के बीच समाधि में बैठाया गया। विभिन्न अखाड़ों के महामंडलेश्वर, आचार्य और बड़े महात्माओं ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि और माल्यार्पण किया। उनके पास उनके नित्य पूजा की अपयोग की सभी वस्तुओं को रखा गया।

महंत के भू समाधि में अखाड़ों के महामंडलेश्वर, आचार्य और बड़े संत महात्माओं ने वैष्णव सम्प्रदाय के परंपराओं को ध्यान में रखकर विधि विधान का पालन करते हुए शंखनाद के बीच क्रमश: पुष्प्, नमक, चीनी, घी,दूध,बेलपत्र पंचामृत आदि भू समाधि डाले गए।

एक लंबी प्रक्रिया के बाद अखाड़े से जुडे सभी लोगों ने मिट्टी से गढ्डे को ढ़कने की प्रकिया पूरी की। अंत में समाधि स्थल को गोबर से लेपन किया गया। इन सभी कार्यों में करीब दो घंटे का समय लगा। इस दौरान महंत नरेन्द्र गिरी की जयजयकार की जा रही थी।

मंहत नरेन्द्र गिरी के पार्थिव शरीर को जिस स्थान पर भू समाधि दी गई है, उसी स्थान पर एक त्रिशूल गाड़ा जाएगा। एक साल के बाद उस स्थान पर पक्का मंदिर बनाया जाएगा।

श्रद्धांजलि यात्रा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

मंहत नरेन्द्र गिरी की अंतिम यात्रा का दर्शन करने के लिए सड़कों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पोस्टमार्टम के बाद श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी लाए जाने के बाद महंत के पार्थिव शरीर का श्रृंगार किया गया फिर फूलों से सजे वाहन में पार्थिव शरीर को रखकर अंतिम यात्रा निकाली गई। अंतिम यात्रा को दारागंज होते हुए संगम ले जाया गया। वहां उनके पार्थिव शरीर पर गंगा जल का छिडकाव करने के बाद वापसी में किला के निकट स्थित बड़े हनुमान मंदिर के पास लोगों के दर्शनार्थ यात्रा को थोड़ी देर रोककर पुन: मठ बाघम्बरी गद्दी लाया गया।

श्रद्धांजलि यात्रा के सजे वाहन पर सबसे ऊपर माला फूल से सुसज्जित महंत नरेद्र गिरी का एक बड़ा चित्र लगाया गया है। श्रद्धांजलि यात्रा में तपोनिधि निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज, सचिव रवींद्र पुरी, तपोनिधि निरंजनी के सहयोगी आनंद अखाड़े के पीठाधीश्वर स्वामी बालकानंद गिरि समेत अनेक बड़े संत, दूसरे शहरों से पहुंचे बड़ी संख्या में संत महात्मा और मठ से जुड़े उनके शिष्य शामिल रहे। श्रद्धांजलि यात्रा का दर्शन करने के लिए सड़कों पर अनुयायी, श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड पड़ी।

श्रद्धाजंलि यात्रा के आगे ट्रैक्टर पर ढ़ोल और नगाडे के बीच महंत नरेन्द्र गिरी की शव यात्रा निकाली गई। इस दौरान मंत्राे का उच्चारण भी किया जा रहा था। यात्रा में तपोनिधि निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज, सचिव रवींद्र पुरी, तपोनिधि निरंजनी के सहयोगी आनंद अखाड़े के पीठाधीश्वर स्वामी बालकानंद गिरि समेत बड़ी संख्या में अनेक संन्यासी साथ चल रहे थे। अंतिम यात्रा में महंत के दर्शन को भीड़ उमड पड़ी।

महंत नरेन्द्र गिरी के सुसाइड नोट में आनंद, अद्या और संदीप का नाम