शोभायात्रा, आतिशबाजी, दीपदान से यादगार बनी ज्योतिबा फुले जयंती

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अजमेर।
महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती पर माली समाज की ओर से सोमवार को शोभायात्रा, आतिशबाजी, दीपदान, भजन संध्या सरीखे भव्य आयोजन किए गए।

फुले जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रमों के तहत ज्योतिबा फुले सर्किल स्थित स्मारक पर लगी ज्योतिबा फुले की प्रतिमा को रंग बिरंगे फूलों की मालाओं से आकर्षक ढंग से सजाया गया। सुबह से ही स्मारक पर माली समाज के लोगों तथा विभिन्न संगठनों तथा राजनीतिक दलों से जुडे नेताओं पदाधिकारियों का आना बना रहा। सभी ने ज्योतिबा फुले के समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को याद किया।

समस्त माली समाज की ओर से अपराहन बाद शहर के विभिन्न मार्गों से विशाल शोभायात्रा निकाली गई, यह शोभायात्रा गाजे बाजों व वाहनों के काफिलों के साथ शाम को मुख्य समारोह स्थल ज्योतिबा फुले सर्किल पहुंची। शोभायात्रा में समाज के सैकडों लोगों ने शिरकत की। समूचे मार्ग में ज्योतिबा फुले अमर रहे के नारे गूंजते रहे।

शोभायात्रा के आगमन के साथ ही फुले सर्किल पर भव्य आतिबाजी की गई। रंग बिरंगी रोशनी से आकाश चमक उठा। करीब 30 मिनट तक हुई आतिशिबाजी का लोगों ने लुत्फ उठाया। आतिशबाजी समाप्त होने के तत्काल बाद हजारों दीपकों की लौ से हर तरफ जगमग हो गई। इस दौरान फुले स्मारक पर माली समाज के विभन्न संगठनों तथा आमजन की ओर ज्योतिबा फुले की प्रतिमा पर माल्यार्पण का तांता लगा रहा। महिलाओं ने मंगलगीत गाए। शहनाई की गूंज वातावरण में मधुर रस घोल रही थी।

देर शाम अखिल भारतीय महात्मा ज्योतिबा फुले समता परिषद राष्ट्रीय जागृति मंच की ओर से स्मारक स्थल पर भजन संध्या में एक से बढकर एक सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। श्रोताओं ने आनंद विभोर होकर नृत्य किए।

इस मौके पर पहुंचे अजमेर के सांसद भागीरथ चौधरी ने महात्मा ज्योतिबा फुले तथा सावित्री बाई फुले के समाज सुधारक के लिए कार्यों को देखते हुए भारत रत्न का असली हकदार बताया साथ ही भरोसा दिलाया किे वे अपनी ओर से संसद में इस मुद्दे को उठाएंगे। जरूरत पडी तो अन्य सांसदों का भी सहयोग लेंगे। फुले दम्पती को याद करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी से पहले महिला शिक्षा की जो अलख उन्होंने जगाई आज वह हर तरफ प्रकाशमान है।

कार्यक्रम के अंत में सहयोगी संस्थाओं व गणमान्यों का सम्मान किया गया। जल सेवा के लिए सोहनलाल, भामाशह सुनील भाटी, नेमीचंद बबेरवाल, चेतन सैनी, घीसू गढ़वाल, महेश चौहान, हेमराज खरोलिया समेत कई लोगों का शॉल ओढाकर व माला पहनाकर समाज की ओर से बहुमान किया गया। संपूर्ण आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पूनम मारोठिया का माली समाज के प्रबुद्धजनों ने आभार जताया।