अजमेर में श्रद्धा एवं उमंग से घरों में मनाई गई महावीर जयंती

अजमेर। जैन परंपरा के 24वें तीर्थंकर, अहिंसा और शांति के अग्रदूत भगवान महावीर की 2619वीं जन्म जयंती (जन्म कल्याणक) ‘लॉकडाउन’ के बीच राजस्थान के अजमेर में सकल जैन समाज आज श्रद्धा, उत्साह एवं उमंग के साथ मनाई।

महावीर जयंती के मौके पर दिगंबर व श्वेतांबर समाज के लोगों ने अपने अपने घरों पर परिजनों के बीच सामूहिक रूप से भगवान महावीर की जयकार करते हुए घंटियां बजाकर णमोकार मंत्र का जाप किया।। घरों की छतों पर केसरिया एवं पचरंगा जैन ध्वज फहराया गया।

मांडना सजाकर अहिंसा का संदेश देने वाले भगवान महावीर के जन्म कल्याणक को साकार रूप में अंगीकार किया। ‘घर घर महावीर, हर घर महावीर’ के जयघोष के साथ विश्व शांति के साथ कोरोना मुक्ति के लिए प्रार्थनाएं की गईं।

कुछ घरों में विश्व शांति के लिए भक्तामर विधान का भी आयोजन कर सकंट से मुक्ति का मार्ग के लिए पूजा अर्चना का सिलसिला चला। अजमेर शहर के केसरगंज जैसवाल मंदिर से हर साल होने वाली परंपरागत शोभा यात्रा स्थगित कर दी गई और शहर के करीब साठ से ज्यादा जिनालय वीरान एवं सूने रहे।

जैन समाज का गढ़ माने जाने वाले अजमेर में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी अपनी श्रद्धा के अनुसार पूण्य अर्जन के कार्य किए। अजमेर के सरावगी समाज, जैसवाल समाज, पल्लीवाल समाज, श्वेतांबर समाज सड़कों पर नजर नहीं आए। ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली भी करीब करीब सुनसान है और वहां स्थित गौशाला में गायों को हरा चारा डालने का काम किया जा रहा है।

तीर्थंकर महावीर एक ऐसे प्रकाश स्तंभ रहे जिन्होंने अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह और शांतिपूर्ण अस्तित्व के जरिए प्रकाश किरणों से विश्व इतिहास को आलोकित किया। उनका संपूर्ण जीवन दर्शन एवं शिक्षाएं अब भी प्रासंगिक हैं। महावीर जयंती की पूर्व संध्या पर सामूहिक दीप प्रज्वलन का कार्यक्रम घरों पर ही किया गया।

उल्लेखनीय है कि चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को राजकुमार के रूप में कुंडलपुर (बिहार) में जन्मे महावीर ने तीस वर्ष की आयु में ही राजपाठ छोड़ वैराग्य का मार्ग अपना लिया था।