मजीठिया आयोग की सिफारिशों को आपसी विचार विमर्श कर लागू किया जाएगा : मौर्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के श्रम, सेवायोजन एवं समन्वय मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि श्रमजीवी पत्रकारों एवं समाचार पत्रों के कर्मचारियों को मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों को आपसी विचार विमर्श करके शीघ्र लागू किया जाएगा।

मौर्य ने मंगलवार को श्रमजीवी पत्रकारों एवं समाचार पत्रों के कर्मचारियों के वेतन एवं भत्ते आदि के निर्धारण के लिए मजीठिया वेतन आयोग की संस्तुतियों को प्रदेश में लागू करने एवं इनके विवादों के निराकरण के लिए शासन द्वारा गठित त्रिपक्षीय समिति की यहां हुई बैठक को सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में मजीठिया आयोग की संस्तुतियों को आपसी सहमति एवं बातचीत के जरिये व्यवहारिक परिवेश में लागू कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि इसका निराकरण अदालतों से नहीं बल्कि आपसी विचार-विमर्श करके मध्यम मार्ग से किया जाए।

बैठक में श्रम मंत्री ने विभाग के प्रमुख सचिव श्रम को निर्देश दिए कि जिन प्रदेशों में आयोग की संस्तुतियां लागू की गई हैं उनकी प्रगति रिपोर्ट मंगाकर इसका अध्ययन किया जाए और अगली बैठक में इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि प्रदेश में भी इसे शीघ्र लागू किया जा सके।

उन्होंने निर्देशित किया कि प्रेस कर्मचारियों के वेतन भुगतान बैंक के माध्यम से हो रहा है कि हाथों-हाथ किया जा रहा है, इसकी भी रिपोर्ट प्रेस मालिकों से मंगा ली जाए। साथ ही सभी प्रेस मालिकों को आयोग की संस्तुतियों की छायाप्रति उपलब्ध करा दी जाए। ताकि वे इसकी सेवा शर्तो की जानकारी न होने का बहाना न बना सके।

मौर्य ने प्रेस मालिकों और संस्थानों में कार्यरत पत्रकारों एवं कर्मचारियों के बीच विवाद को समाप्त कर वेतन आयोग की सिफारिशों को शीघ्र लागू करने के लिए बैठक में समिति के अतिरिक्त अन्य प्रेस प्रतिनिधियों को भी बुलाया जाए। उन्होंने उप श्रमायुक्तों को निर्देश दिए कि अपने यहां पत्रकारों के लम्बित सभी मुकदमों का शीघ्र निस्तारण कराए और उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार पत्रकारों को मजदूरी दिलाए।

इस अवसर पर श्रम विभाग के प्रमुख सचिव सुरेश चन्द्रा ने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी जिला स्तर पर ही शिकायतों का निस्तारण करने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सदस्यों के साथ प्रतिमाह बैठक करेंगे। पत्रकारों की समस्याओं के निराकरण के लिए जिला स्तर पर प्रभावी माॅनीटरिंग की जाए। प्रेस एजेन्सियों की बैलेन्स शीट लेकर राजस्व के आधार पर श्रेणी का निर्धारण करते हुए पत्रकारों को न्यूनतम पारिश्रमिक दिलाने का भी प्रयास किया जाए।

बैठक में पत्रकार सदस्य मुदित माथुर, हसीब सिद्दीकी, लोकेश त्रिपाठी, जेपी त्यागी ने मजीठिया आयोग की संस्तुतियों, पत्रकारों की समस्याओं एवं श्रम विभाग के अपेक्षित सहयोग के संदर्भ में अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि सुबह से लेकर देर रात तक कार्य करने वाले पत्रकारों के काम का समय और वेतन का भी निर्धारण होना चाहिए।

मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियों को अन्य राज्यों की तरह यहां भी लागू करने के लिए विचार किया जाये। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर भी मानिटरिंग होनी चाहिए। जिला स्तरीय अखबार भी आय के आधार पर पत्रकारों को वेतन दें, इसके भी प्रयास किए जाए।

बैठक में उपस्थित उप श्रम आयुक्तों ने अपनी-अपनी प्रगति को बैठक में रखते हुए कहा कि अनुपालन में आ रही बाधाओं को दूर कर न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक चुस्त दुरूस्त बनाया जाएगा ताकि पत्रकारों को त्वरित न्याय सुलभ हो सके।

इस मौके पर श्रम एवं सेवायोजन राज्य मंत्री मनोहर लाल (मन्नू कोरी), श्रम आयुक्त अनिल कुमार, निदेशक सूचना डा उज्ज्वल कुमार, विशेष सचिव आरपी सिंह, मण्डलों से आये उप श्रम आयुक्त, सहायक श्रम आयुक्त आदि उपस्थित थे।