अब प्लेन में उडान के दौरान हो सकेगा मोबाइल फोन का इस्तेमाल

Major Airlines Welcome TC’s Nod For In-flight WiFi, Voice Services

नई दिल्ली। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने भारतीय आकाशीय क्षेत्र में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उडानाें में यात्रियों को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है।

प्रभु ने यहां संवाददाताओं से कहा कि प्राधिकरण के इस फैसले से विमान यात्रियों को विमान के भीतर वॉयस और डाटा उपलब्ध कराने के लिए वाई फाई सुविधा दी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि मंत्रालय आयोग के इस फैसले को जल्दी से जल्दी लागू कराने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में नियम शर्तों और तौर तरीकों के अंतिम प्रारुप को तीन महीने में जारी कर दिया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार विमान यात्रियों की यात्रा को बाधा मुक्त बनाने तथा संबंधित सेवाओं में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। विमान के भीतर यात्रियों को वाई फाई सुविधा की उपलब्ध कराने के प्रस्ताव का गृह मंत्रालय ने पहले ही अनुमोदित कर दिया है। दूरसंचार विभाग ने पिछले साल भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण को विमानों के भीतर वाई फाई उपलब्ध कराने के संबंधित सिफारिशें करने, नियम शर्तें तथा तौर तरीके तय को कहा था।

इस बीच दूरसंचार आयोग की अध्यक्ष एवं दूरसंचार सचिव अरुणा सुंदरराजन ने आयोग की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि विमान से कॉलिंग और एसएमएस अब शीघ्र ही सच्चाई बनने वाला है क्याेंकि इससे जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में ट्राई की लगभग सभी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया। इसके लिए तेजी से प्रक्रिया शुरू की जा रही है और अगले तीन- चार महीने में यह तैयार हो जाना चाहिए। शीघ्र इस निर्णय पर काम भी शुरू कर दिया जायेगा।

उन्होेंने बताया कि विमानों में वाई फाई और अन्य सुविधाएं देने के लिए लाइसेंस की अलग श्रेणी बनायी जायेगी जिसे इन फ्लाइट कनेक्टिविटी प्रदाता कहा जायेगा। इसका उपयोग 3,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इसको मंत्रिमंडल की मंजूरी की जरूरत नहीं है।

सुंदरराजन ने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र में शिकायत निवारण को ध्यान में रखते हुये टेलीकॉम ओम्बुड्समैन के गठन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। यह प्रस्ताव काफी समय से लंबित पड़ा था। उनहोंने कहा कि हर तिमाही करीब एक करोड़ शिकायतें मिलती हैं। इसके निपटान के लिए कई त्रिस्तरीय तंत्र बनाने का प्रस्ताव है।

पहला स्तर टेलीकॉम सेवा प्रदाता के यहां शिकायत निवारण की व्यवस्था की जानी है और यदि उपभोक्ता टेलीकॉम सेवा प्रदाता के शिकायत निवारण से संतुष्ट नहीं तो सेवा प्रदाता को ऐसी स्थिति के लिए अपने यहां अपीलीय तंत्र बनाने का प्रस्ताव है ताकि उपभोक्ता वहां अपनी शिकायत दर्ज करा सके। इसके बाद भी यदि यह सही तरीके से काम नहीं करता है तो उपभोक्ता शिकायत निवारण मंचों पर जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इसमें से सबसे ऊपर ट्राई द्वारा गठित टेलीकॉम ओम्बुड्समैन होगा। ट्राई ने कहा कि इसके गठन का अधिकार उसके पास नहीं है। इसलिए अब यह प्रस्ताव किया गया है कि इसके गठन का अधिकार ट्राई को दिया जायेगा। अभी हर सेवा प्रदाता के लिए एक ओम्बुड्समैन बनाये या हर क्षेत्र के लिए एक ओम्बुड्समैन या आवश्यकता अनुसार ओम्बुड्समैन बनाने का विचार है। इससे दूरसंचार क्षेत्र में अधिक संतुष्टि प्रदान वाला शिकायत निवारण तंत्र बनेगा। इसे प्राथमिकता के आधार पर किया जायेगा और इसके लिए ट्राई कानून में संशोधन किया जाएगा।

दूरसंचार सचिव ने कहा कि आयोग ने इंटरनेट टेलीफोनी को अनुमोदित कर दिया है। यह तत्काल शुरू हो जायेगा। इससे वीओआईपी टेलीफोनी में भारी तेजी आने की संभावना है। आयोग ने इसके अतिरिक्त दूरसंचार क्षेत्र में कारोबार सुगमता के लिए ट्राई की 12 प्रमुख सिफारिशों को अनुमोदित कर दिया है।

आयोग ने यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड और आठ राज्यों में भारत नेट परियोजना पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को भी अनुमोदित कर दिया है।