काॅर्पोरेट ऋण वाले क्षेत्र में निवेश कर पैसा कमाना अभी भी संभव

वेत्री सुब्रमण्यम बाजार खण्ड जो अधिक आसान स्थिति में है पिछले 5-7 वर्षों में, वातावरण काफी भिन्न रहा है। यदि फंड्स के प्रदर्शन पर देखा जाये, तो इस अवधि में स्टाॅक के चुनाव ने क्षेत्र के चयन की अपेक्षा परिणामों में भारी बदलाव लाया है। वर्तमान ट्रेंड जारी रहेगा। लेकिन जब बाजार कुछ क्षेत्रों को लेकर उन्मत्त अवसादग्रस्त अवस्था में आ जाता है, तो अवसर पैदा होते हैं, जिसका कारण यह है कि मूल्यांकन आकर्षक दिखने लगते हैं। धातुएं क्लासिक प्रतिक्षेपक हैं; वर्ष 2015 के उतरार्द्ध और वर्ष 2016 के पूर्वार्द्ध में यह नीचे दिखा, लेकिन बाद में ठीक हो गया। हाल में, केवल 2-3 खण्डों ने ही उस तरह का प्रभाव प्रदर्शित किया है – आईटी, फार्मा एवं काॅर्पोरेट ऋणदाता। अन्य खण्ड है, यूटिलिटी क्षेत्र की कंपनियां।

काॅर्पोरेट ऋण क्षेत्र विशेष सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में निवेश
किसी भी वित्तीय व्यवसाय में, मुख्य रूप से मजबूत देयता फ्रेंचाइजी, स्वस्थ पूंजी पर्याप्तता एवं उपयुक्त ग्राहक अधिग्रहण इंजन, काॅर्पोरेट या रिटेल पर ध्यान दिया जाता है। कुछ निजी क्षेत्र के ऋणदाताओं में ये सभी विशेषताएं मौजूद होती हैं, भले ही उनकी काॅर्पोरेट ऋण पुस्तिका उतनी अधिक न हो। वहां अवसर मौजूद है कि जब चीजें स्थिर होती हैं और उनमें सुधार होने लगता है, तो उनकी वृद्धि दर बढ़ने लगेगी और वे पूंजी या अपनी बढ़ने की क्षमता से बाधित नहीं होगी।

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा इस चुनौती का सामना किया जाता है कि उनके पास निम्न पूंजी पर्याप्तता है। सामान्य तौर पर, पीएसयू बैंकों के लिए कम एक्सपोजर होता है, ऐसे में उनके बारे में कोई राय नहीं होगी। उसका कारण यह भी है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से उन्होंने मजबूत आरओई (इक्विटी पर रिटर्न) प्रदर्शित नहीं किया है, जिसके चलते स्टाॅक का चयन करते समय काफी सोच-विचार करना पड़ेगा।

फंड मैनेजर प्रदर्शन का मूल्यांकन

फंड मैनेजर्स का मूल्यांकन बेंचमार्क और समान समूह के सापेक्ष किया जाता है। एक, तीन और पांच वर्षों की रोलिंग अवधियों के लिए दोनों ही मात्रकों का मूल्यांकन किया जाता है और तीन एवं पांच वर्ष के प्रदर्शनों के लिए उच्च वजन होता है। लंबी समयावधियों के लिए वजन बढ़ाने की दिशा में विचार करने हेतु परामर्श दिया जाता है। योजना वर्गीकरण के परिणामस्वरूप होने वाले परिवर्तनों के चलते पीयर तुलना के समक्ष एक नई चुनौती उठ खड़ी होती है। पिछले प्रदर्शन पर कैसे देखें, इसको लेकर कोई निश्चितता नहीं है, क्योंकि कुछ मामलों में, पीयर्स में महत्वपूर्ण बदलाव आये हैं।

स्टाॅक्स के चुनाव में फंड मैनेजर की क्षमता पर परिभाषित श्रेणियों में नई सीमाओं का प्रभाव
परिभाषित श्रेणियों में नई सीमाएं चुनौती बनने वाली हैं। अब तक, हर फंड हाउस इस बात को लेकर अपने स्वयं के नियमों का पालन करता था कि मध्यम पूंजीकरण की क्या परिभाषा है। कभी-कभी, बाजार में परिवर्तन होने के साथ, पुनर्विचार करना पड़ सकता है कि 101वें स्टाॅक से 250वें स्टाॅक को मिड-कैप कहना इसे करने का सही तरीका है या नहीं। किसी भी रेटिंग सिस्टम में एक कठोरता होगी। यदि माॅर्निंगस्टार के तरीके से देखें, तो लघु, मध्यम एवं बड़े को बाजार पूंजीकरण के प्रतिशत रूप में परिभाषित किया जाता है। इस विधि में, नई-नई कंपनियों को जोड़े जाने के साथ, कंपनियों की संख्या घट-बढ़ सकती है।

पिछले वर्ष, मध्यम-पूंजीकरण फंड में, लगभग 100 स्टाॅक्स थे, जिसे लगभग 80 तक नीचे लाया गया। काफी अधिक संख्या में स्टाॅक्स डीप वैल्यू निवेश के लिए काम करते हैं। लेकिन इस परिपत्र के परिणामस्वरूप, इस पर दोबारा काम करना पहले ही शुरू हो चुका है और व्यावहारिक रूप से, लगभग 70-75 स्टाॅक्स हो सकते हैं।