कुपोषित बच्चें राष्ट्र की प्रगति में अवरोध -डॉ ध्रुव सनाढ़य

भारतीय संस्कृति में एक पुरानी कहावत है पहला सुख निरोगी काया यदि आप स्वस्थ है तो आप हर एक कार्य दक्षतापूर्वक कर सकते है बिना भौतिक सुख सुविधाओं के भी एक सुखमय जीवन व्यतीत कर सकते है परंतु कुपोषित व अस्वस्थ व्यक्ति खुद के लिए भी बोझ बन जाता है ,पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि कुशवाहा के निजी सहायक डॉ ध्रुव सनाढ़य ने बताया कि भारत में 33 लाख से ज्यादा कुपोषित बच्चे है एवं कोरोना महामारी के पश्चात इसमें भारी मात्रा में इजाफ़ा हुआ है।

कुपोषण देश की एक प्रमुख समस्या बन चुका है जिसमे प्रभावित इंसान शारेरिक समस्याओं के साथ साथ मानसिक रूप से भी अपंग हो जाता है जिसके फलस्वरूप वह शैक्षणिक योग्यताएँ अर्जित नहीं कर पाता और ना ही व्यावसायिक योग्यता अर्जित कर पाता है कोरोना के बाद दुनिया भर में विटामिन डी की कमी पाई गई है जिसका कुपोषण से सीधा संबंध है इसकी पूर्ति करने के लिए रोज आधा घंटा धूप का सेवन किया जाना चाहिए।

डॉ ध्रुव सनाढ़य ने बताया कि भारतीय संस्कृति में सूर्यदेव को जल चढाने की परंपरा इसी कारण बनी है सरकार द्वारा कुपोषण से लड़ने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है सरकारी विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार ,दालें आटे, एव अन्य पोषक तत्वों का वितरण किया जाता रहा है परंतु समय के साथ इन योजनाओं में परिवर्तन की जरूरत है कई बार इन योजनाओं के क्रियान्वयन के समय अत्यंत अनियमितताओं की जानकारी मिलती है जो खेदजनक है सरकार को चाहिए कि इनकी कड़ी जांच करवाए एव दोषियों को उचित सजा दे।