मार्च 2018 : क्या बोलते हैं ग्रह नक्षत्र

march 2018 : planetary positions and their effects
march 2018 : planetary positions and their effects

सबगुरु न्यूज। मार्च 2018 फाल्गुन मास की शुक्ल चतुर्दशी गुरूवार से आरभं होकर चैत्र मास की शुक्ल पूर्णिमा शनिवार तक रहेगा। इस मास मे आकाशीय ग्रहों की स्थिति इस प्रकार रहेगी। खास बात यह है कि मंगल ग्रह व शनि ग्रह एक साथ धनु राशि में आ गए हैं। इसका देश व दुनिया में क्या प्रभाव पड सकता है।

सूर्य

14 मार्च 2018 को सूर्य मीन राशि में 23 घंटे 41 मिनट पर प्रवेश करेंगे। सूर्य 4 मार्च को पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे इससे पूर्व शतभिषा नक्षत्र में भ्रमण कर रहे थे। दिनांक 18 मार्च 2018 उतराभाद्रपद नक्षत्र में 7 बजकर 59 मिनट पर प्रवेश करेंगे ओर 31 मार्च 2018 को रेवती नक्षत्र में 18 घंटे ओर 50 मिनट बाद प्रवेश करेंगे।

मंगल ग्रह

7 मार्च 2018 को धनु राशि में 18 घंटे और 29 मिनट बाद प्रवेश करेंगे। मंगल मूल नक्षत्र में भ्रमण शील रहेंगे। इससे पूर्व वृश्चिक राशि मे ही भ्रमण शील रहेंगे। 30 मार्च को मंगल ग्रह पूर्वाषाढा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।

बुध ग्रह

2 मार्च 2018 को मीन राशि में 30 घंटे ओर 54 मिनट बाद प्रवेश करेंगे तथा 4 मार्च को बुध ग्रह उदय होंगे। 22 मार्च को बुध ग्रह मीन राशि में वक्री होगे। 24 मार्च 2018 को बुध ग्रह अस्त हो जाएंगे। मास के अंत तक मीन राशि में ही भ्रमण शील रहेंगे। बुध ग्रह उतरा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र में भ्रमण शील रहेंगे।

गुरू ग्रह

गुरू ग्रह 9 मार्च 2018 को वक्री होंगे 10 घंटे 17 मिनट बाद। विशाखा नक्षत्र के तीसरे चरण में।
18 मार्च 2018 मे तुला राशि में भ्रमण कर रहे हैं तथा इस दिन नववर्ष प्रारभ करेंगे। मासान्त तक तुला राशि में ही वक्री गति से भ्रमण शील रहेंगे।

शुक्र ग्रह

शुक्र ग्रह 2 मार्च को 2018 को 11 घंटे और 41 मिनट बाद मीन राशि में प्रवेश करेंगे उत्तरा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र में भ्रमण करेंगे तथा 26 मार्च 2018 को 15 घंटे ओर 46 मिनट बाद मेष राशि ओर अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।

शनि ग्रह

धनु राशि में भ्रमण कर रहे हैं। पूर्वाषाढा नक्षत्र में।

राहू केतु

राहू कर्क राशि में व केतु मकर राशि मे भ्रमण कर रहे हैं। आश्लेषा नक्षत्र में राहू व श्रवण नक्षत्र में केतु।

चन्द्रमा

सिंह राशि से भ्रमण कर सिंह व कन्या राशि तक भ्रमण शील रहेंगे।

ग्रहों की युति

7 मार्च से मंगल ग्रह ओर शनि ग्रह की युति मासान्त तक चलती रहेगी।
2 मार्च से 14 मार्च तक बुध व शुक्र ग्रह की युति मीन राशि में रहेगी।
14 मार्च से सूर्य बुध व शुक्र ग्रह की युति 26 मार्च तक रहेगी लेकिन सूर्य व बुध ग्रह की युति मासान्त तक रहेगी।

सूर्य की मीन संक्रान्ति

सूर्य 14 मार्च 2018 को 23 घंटे ओर 43 मिनट बाद मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का मीन राशि में प्रवेश ही मीन संक्रान्ति कही जाती है। मंदाकिनी नाम की यह संक्रांति राजनेता व महिला अधिकारियों के लिए उत्तम फल देने वाली होगी। यह संक्रांति गर करण में प्रवेश कर रही है अतः भावों में तेजी मंदी, आतंकवाद व उपद्रव व चोरों से प्रजा को पीडित करेंगी। वाहन अस्त्र शस्त्र व कपड़े के व्यवसाय वालों को परेशान करेंगी।

मार्च के महीने में ग्रह नक्षत्रों के प्रभाव

इस माह मे मंगल शनि ग्रह का द्विदवादर्श योग तथा 7 मार्च से पूरे मास तक मंगल ग्रह व शनि ग्रह की युति देश व दुनिया के लिए शुभ नहीं है साथ ही सूर्य बुध व शुक्र ग्रह की युति मीन राशि में भी शुभ नहीं मानी जाती है ऐसा मैदनीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार संहिताएं बताती हैं।

संहिता के अनुसार मंगल खून खराबे, बम विस्फोट व सैन्य बलों द्वारा कार्यवाही व युद्ध आदि को अंजाम देने के लिए सदा तत्पर रहता हैं यथा भूकंप, भूस्खलन, ज्वाला मुखी, अग्नि कांड, विस्फोट, आगजनी, आतंकवाद, बमबारी, जंगलों में आग लग जाना। यह दुर्घटना आदि से अपूरित क्षति तथा अशांति को बढावा देता है। शनि शासन, प्रशासन, खनन कार्य, निर्माणी कार्यो को अस्त व्यस्त कर देता है। दोनों ही ग्रहों की युति से दोनों की मिली जुली घटना के परिणाम देखने को मिलते हैं।

सूर्य बुध व शुक्र ग्रह की युति प्राकृतिक प्रकोप बढाकर प्रचंड तूफान, चक्रवात, वर्षा आदि से फ़सल हानि करा सकती है व जल और वायु यात्रा में नुकसान पहुंचा सकता है। आकाशीय ग्रह पर जाने वाले यानों को भी दुर्घटना का शिकार बना सकता है।

विश्व स्तर पर अशांति, आंतकवाद, विवाद को लेकर गुप्त समझौते नुकसान पहुंचा सकते हैं। दुनिया का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्थाओं की स्थिति भी कमजोर हो कर सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ के लिए विषमता को खाई को नहीं पाट पाएगी। पश्चिम के देशों व राज्यों को प्राकृतिक प्रकोप से परेशान होना पडेगा। देश व दुनिया में प्रभावशाली नेता उद्योगपति या बडे कद काठी के व्यक्ति की कमी अखरेगी। बडे हादसे शनि ग्रह व मंगल ग्रह दे सकते हैं।

विश्व स्तर पर शासनाधयक्षों के खिलाफ जन आन्दोलन, सत्ता से हटाने तथा व्यापक स्तर पर कई देशों के सम्बन्ध बिगडते नजर आएंगे। शनि, मंगल अघोषित युद्ध को कराने के संकेत देते हैं।