मेट्रो जल्द ही दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी मेट्रो सेवा हो जायेगी- नरेन्द्र मोदी

मेट्रो जल्द ही दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी मेट्रो सेवा हो जायेगी- नरेन्द्र मोदी
मेट्रो जल्द ही दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी मेट्रो सेवा हो जायेगी- नरेन्द्र मोदी

नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि मेट्रो ने लोगों का न केवल समय बचाया है बल्कि उनकी जिन्दगी भी बदल दी है और शहरों में वाहनों के प्रदूषण को भी कम किया है, लोगों को रोज़गार के अवसर दिए हैं तथा जिस गति से उसका विकास हो रहा है उससे वह जल्द ही दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी मेट्रो सेवा हो जायेगी।

मोदी ने रविवार को बहादुरगढ़ मुंडका मेट्रो सेवा का विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि बहादुरगढ़ हरियाणा का तीसरा बड़ा क्षेत्र है जो दिल्ली मेट्रो से जुड़ा हुआ है। आज के इस लोकार्पण के बाद हरियाणा में मेट्रो नेटवर्क की लंबाई 26 किलोमीटर तक पहुंच गई है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में चल रही मेट्रो ने किस तरह लोगों का जीवन बदला है, उसका गवाह हर वो व्यक्ति है जिसने कभी न कभी इसमें सफर किया है। मैं भी कई बार दिल्ली मेट्रो में सफर कर चुका हूं। आज से यह अनुभव बहादुरगढ़-मुंडका लाइन पर चलने वाले लोगों को भी मिलेगा। विशेषकर बहादुरगढ़ में तेजी के साथ विकसित होते उद्योगों की वजह से काफी अरसे से मेट्रो का इंतजार हो रहा था। बहादुरगढ़ में कई कॉलेज, संस्थान और विश्वविद्ययालय भी हैं। दिल्ली से हर रोज़ छात्र-छात्राएं आवाजाही करते हैं। अब इस क्षेत्र के लाखों उद्यमियों को, विद्यार्थियों को, अलग-अलग प्रोफेशन के लोगों को, दिल्ली आने-जाने में और आसानी होगी। ऐसे तो बहादुरगढ़ को हरियाणा का द्वार कहा जाता है लेकिन ये मेट्रो लाइन यहां विकास का द्वार बनकर पहुंची है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मेट्रो की वजह से लोगों की सहूलियत बढ़ेगी, नई कॉलोनियां बनेंगी, उद्योगों का विस्तार होगा, तो रोजगार के भी नए अवसर बनेंगे। कनेक्टिविटी का विकास से जो नाता है, इस मेट्रो नेटवर्क को देखकर समझा जा सकता है। अभी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 280 किलोमीटर मेट्रो लाइन ऑपरेशनल है। मेट्रो का जिस तेजी से विस्तार हो रहा है, बहुत जल्द शंघाई, बीजिंग, लंदन और न्यूयॉर्क के बाद, दुनिया के पांचवें सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्क के तौर पर दिल्ली मेट्रो की पहचान होगी।

मोदी ने कहा कि मेट्रो से जुड़े कार्यों में एक बहुत बड़ी कमी यह थी कि हर शहर में पहले अपने ही तरीके से काम किया जा रहा था। मेट्रो और उससे जुड़े निर्माण कार्यों के लिए कोई नीति नहीं थी, इसलिए कोई मानक, कोई स्टैंडर्ड भी नहीं तय था। नेताओं की मर्जी के मुताबिक स्टेशन और अलग-अलग विभागों के हितों के मुताबिक फैसले हो रहे थे।

अब 2017 में देश की पहली मेट्रो पॉलिसी के बनाने के बाद इन सब चीजों पर ध्यान दिया जा रहा है। लोगों को एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन और फिर अपने घर या दफ्तर तक पहुंचने में परेशानी ना हो इसके लिए शहरों के पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम का इंटीग्रेशन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अब देश में कहीं भी मेट्रो बने, लेकिन एक तय स्टैंडर्ड पर काम करेगी। 21वीं सदी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शहरों में स्मार्ट, सुलभ, सस्ता और साफ-सुथरा पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम देना इस सरकार की प्रतिबद्धता है।

मोदी ने यह भी कहा कि आज देश के 12 शहरों में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। देश के दूसरे शहरों को भी मेट्रो से जोड़ने के लिए राज्य सरकारों को प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही मेट्रो के डिब्बे भी देश में तैयार करने का काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने गुजरात के वड़ोदरा और तमिलनाडु के चेन्नई में आधुनिक प्लांट का जिक्र करते हुए कहा कि मेट्रो प्रोजेक्ट्स में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने खरीद की नीति को बदला है और लगभग 75 प्रतिशत भारत में बना सामान लगाना अनिवार्य किया गया है।

उन्होंने मेट्रो की व्यवस्था हमारे अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और सहयोग का भी एक बेहतरीन उदाहरण है। पहले कई देशों ने मेट्रो के लिए हमारी मदद की, अब भारत दुनिया के कई देशों को मेट्रो के कोच की सप्लाई करने के लिए तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा कि मेट्रो सहकारी संघवाद का भी एक सफल उदहारण इस रूप में है कि आज देश के जिन-जिन राज्यों में भी मेट्रो बन रही है वह केंद्र और राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी से बन रही है।

मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आज जितना मेट्रो नेटवर्क विकसित हुआ है उसने हर रोज़ लगभग 6 लाख गाड़ियों की जरूरत को खत्म किया है। मेट्रो ने लोगों का समय बचाया है, पैसा बचाया है और प्रदूषण भी कम करने का काम किया है। मेट्रो के साथ ही सरकार परिवहन की पूरी व्यवस्था को ही आधुनिक और लोगों की जरूरत के मुताबिक बनाने का काम कर रही है। दिल्ली को हाई स्पीड रेल के माध्यम से सोनीपत, अलवर और मेरठ से जोड़ने के लिए रीजनल रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर भी काम चल रहा है।

इसके अलावा दिल्ली के चारों ओर एक्सप्रेस वे का एक घेरा बनाने का काम भी तेजी से किया जा रहा है। उस काम को पूरा करने के लिए भी लोग कोशिश कर रहे हैं| हरियाणा की तरफ से पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेस वे पर भी काम प्रगति पर है। पेरिफेरल एक्सप्रेसवे ने दिल्ली से होकर गुजरने वाली छोटी-बड़ी गाड़ियों की संख्या को 25 से 30 प्रतिशत तक कम किया है। इससे ट्रैफिक पर तो प्रभाव पड़ा ही है प्रदूषण की एक बड़ी वजह भी कम हुई है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बीते चार वर्षों में रोड, रेलवे, एयरवे, वॉटरवे और बिजली से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर सबसे अधिक निवेश किया गया है। करगिल से लेकर कन्याकुमारी तक कच्छ से लेकर कामाख्या तक कनेक्टिविटी पर बल दिया जा रहा है। सबसे लंबी सुरंगें हों या फिर सबसे पड़े पुल, एक के बाद एक सारे प्रोजेक्ट समय-सीमा में पूरे किए जा रहे हैं।

भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत देश में 35 हजार किलोमीटर लंबे आधुनिक हाईवेज का जाल बिछाने का काम शुरू किया गया है। आने वाले समय में एक तरफ जहां सौ से ज्यादा वॉटरवेज, बुलेट ट्रेन, देश के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव लायेंगे वहीं छोटे-छोटे शहरों में विकसित होते एयरपोर्ट, लोगों का हौंसला आसमान तक पहुंचाने का काम करेंगे। यह आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर हमारे शहरों को, 21वीं सदी में आर्थिक विकास का केंद्र बिंदु बनाने में मदद करेंगे।

देश के अलग-अलग इलाकों में जितना ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, संपर्क सुगम होगा, जितना ज्यादा ट्रांसपोर्ट के अलग-अलग माध्यम एक दूसरे को सपोर्ट करेंगे, उतना ही लोगों का जीवन आसान बनेगा, व्यापार के नए अवसर बनेंगे, रोजगार के नए अवसर बनेंगे।