आगामी जनवरी में भेजा जायेगा मिशन चंद्रयान-2

Mission Chandrayaan-2,india second luncer mission on january in hindi
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नयी दिल्ली । चंद्रमा पर भारत का दूसरा मिशन चंद्रयान-2 अब अगले साल जनवरी में भेजे जाने की योजना है। यह मिशन पहले दो बार टाला जा चुका है।

इसरो के अध्यक्ष के. शिवन ने आज यहाँ संवाददाताओं को बताया कि चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण के लिए 03 जनवरी से 16 फरवरी 2018 का विंडो तय किया गया है। कोशिश यह होगी कि तीन जनवरी को ही प्रक्षेपण किया जाये,लेकिन मौसम अनुकूल नहीं रहा तो 16 फरवरी तक प्रक्षेपण संभव होगा।

मिशन की खास बात यह होगी कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के करीब (72 डिग्री दक्षिण) लैंडर उतारने वाला भारत पहला देश होगा। इसरो प्रमुख ने बताया कि चंद्रमा के इस हिस्से पर ज्यादा तेज सूरज की रौशनी नहीं पड़ती। इससे वहाँ पानी और खनिजों की ज्यादा मौजूदगी की संभावना है। साथ ही वहाँ दिन ज्यादा समय के लिए रहता है जिससे प्रयोग करने में आसानी होगी।

डॉ. शिवन ने बताया कि चंद्रयान-2 के पहले की बनावट में कुछ बदलाव किया गया है। इसके कारण यान का वजन बढ़ गया है। इसे देखते हुये अब इसका प्रक्षेपण जीएसएलवी एमके-3 प्रक्षेपणयान से किया जायेगा जो जीएसएलवी एमके-2 की तुलना में ज्यादा वजन ले जाने में सक्षम है। पहले कुल प्रक्षेपण वजन 3,250 किलोग्राम होना तय था। अब यह 3,850 किलोग्राम होगा। साथ ही पहले इसे 170 गुणा 24,000 किलोमीटर की कक्षा में भेजने की योजना थी, लेकिन अब इसे 170 गुणा 36,000 किलोमीटर की कक्षा में भेजा जायेगा।

यान के ऑर्बिटर का वजन 2,379 किलोग्राम, लैंडर का 1,471 किलोग्राम और रोवर का 27 किलोग्राम होगा। विभिन्न प्रयोगों के लिए ऑर्बिटर में आठ, लैंडर में चार और रोवर में दो पेलोड होंगे। मिशन के दौरान चंद्रमा की सतह में मौजूद तत्त्वों का अध्ययन करके यह पता लगाया जायेगा के उसके चट्टान और मिट्टी किन तत्त्वों से बनी हैं। साथ ही वहाँ मौजूद खाइओं और चोटियों की संरचना का पता लगाया जायेगा। चंद्रमा की सतह पर प्लाज्मा घनत्व और उसमें होने वाले परिवर्तन, ध्रुवों के पास की तापीय गुणों, चंद्रमा के आयनोस्फेयर में इलेक्ट्रॉनों की मात्रा आदि का अध्ययन भी किया जायेगा।

चंद्रयान-2 को चंद्रमा पर पहुँचने में 40 दिन का समय लगेगा। पृथ्वी के उपग्रह पर खनिजों, पानी और हाइड्रॉक्सिल के निशान ढूँढ़ना, लैंडिंग के स्थान की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेना, चट्टानों के घटक तत्त्वों की चंद्रमा पर मौजूदगी का पता लगाना और चंद्रमा की सतह की त्रिआयामी तस्वीरें लेना भी मिशन का उद्देश्य होगा।